
तमिलनाडु की राजनीति और विमानन क्षेत्र (Aviation Sector) में इस समय एक बहुत बड़ा और निर्णायक मोड़ आया है, जहां मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (C. Joseph Vijay) की सरकार ने बहुचर्चित और लंबे समय से विवादों में रहे परंदूर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को आधिकारिक रूप से रद्द करने के तुरंत बाद चेन्नई मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र (CMA) के लिए दो बिल्कुल नए और वैकल्पिक स्थानों की खोज कर ली है। सरकारी सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार ने मनेल्लूर (Manellore) और चेय्यूर (Cheyyur) को दूसरे अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के संभावित और उपयुक्त ठिकानों के रूप में चिन्हित कर लिया है, और इन दोनों ही जगहों की विस्तृत तकनीकी सिफारिशों को एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के पास गहन अध्ययन और फिजिबिलिटी सर्वे के लिए आधिकारिक तौर पर भेज दिया गया है। इन दोनों वैकल्पिक साइटों के सामने आने के बाद से ही राज्य के प्रशासनिक गलियारों और औद्योगिक क्षेत्रों में सुगबुगाहट तेज हो गई है कि क्या आने वाले दिनों में चेन्नई को उसकी दूसरी बड़ी विमानन सौगात इन इलाकों में मिल पाएगी या नहीं।
चेन्नई से दूरी और भौगोलिक स्थिति के आधार पर चुनी गईं ये दो नई साइटें
राज्य सरकार द्वारा शॉर्टलिस्ट की गई इन दोनों नई जगहों की भौगोलिक स्थिति और शहर से दूरी पर अगर नजर डाली जाए तो मनेल्लूर चेन्नई शहर से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जिसे कनेक्टिविटी और शहरी विस्तार के लिहाज से काफी मुफीद माना जा रहा है, जबकि दूसरी साइट चेय्यूर चेन्नई से लगभग 100 किलोमीटर की दूर दक्षिण की ओर स्थित है। दिलचस्प बात यह है कि चेय्यूर साइट करीब 7 साल पहले जब पहली बार चर्चा के केंद्र में आई थी, तब वह कुल 11 संभावित स्थानों की सूची में शामिल थी, लेकिन वर्ष 2021 से 2026 के बीच पिछली डीएमके सरकार की तरफ से चुनी गई चार प्रमुख शॉर्टलिस्टेड साइटों (परंदूर, पन्नूर, तिरुपोतूर और पडालम) में यह शामिल नहीं हो पाई थी। इन दोनों चुनिंदा जगहों के चयन के पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आने वाले दशकों में महानगर की बढ़ती विमानन जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ घनी आबादी और संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र पर कम से कम नकारात्मक प्रभाव पड़े। इसके साथ ही, चेन्नई के मौजूदा मीनांबक्कम एयरपोर्ट के आधुनिकीकरण और विस्तार का काम भी समानांतर रूप से जारी रहेगा, जिसके तहत एएआई ने मौजूदा एयरपोर्ट के उत्तर-पश्चिम हिस्से में एक नया अत्याधुनिक पैसेंजर-हैंडलिंग सिस्टम बनाने की योजना बनाई है और इसे राष्ट्रीय राजमार्ग से निर्बाध रूप से जोड़ने के लिए नई सड़कों के निर्माण की अनुमति मांगी है, जिस पर विजय सरकार ने पूर्ण प्रशासनिक सहयोग का पूरा आश्वासन दिया है।
परंदूर प्रोजेक्ट रद्द करने के पीछे किसानों का हित और राजनीतिक वजहें
पूर्ववर्ती द्रमुक (DMK) सरकार की तरफ से प्रस्तावित लगभग 27,400 करोड़ रुपये के भारी-भरकम परंदूर प्रोजेक्ट को अचानक रद्द करने के मुख्यमंत्री विजय के इस साहसिक और बड़े फैसले पर राज्य के मुख्य विपक्षी दलों की तरफ से बेहद तीखा हमला बोला गया है, लेकिन सरकार अपने इस फैसले पर पूरी तरह अडिग नजर आ रही है। विधानसभा के पटल पर अपने इस कदम का जोरदार बचाव करते हुए मुख्यमंत्री विजय ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया कि ग्रेटर चेन्नई की भविष्य की बढ़ती औद्योगिक और व्यावसायिक जरूरतों के लिए एक दूसरा एयरपोर्ट होना अत्यंत आवश्यक है, लेकिन इस तरह का कोई भी विकास कार्य उपजाऊ कृषि भूमि और गरीब किसानों की आवासीय बस्तियों की भारी कीमत पर हरगिज़ नहीं किया जा सकता है। इस मामले में राज्य के ऊर्जा और कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार ने विधानसभा में सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि पिछली सरकार ने बिना किसी प्रकार के ‘पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन’ (EIA) या जरूरी कानूनी मंजूरियों के जल्दबाजी में करीब 5,846 एकड़ विशाल जमीन के अधिग्रहण की विवादास्पद प्रक्रिया शुरू कर दी थी। टीवीके सरकार का यह भी तर्क था कि प्रस्तावित कुल भूमि में से लगभग 1,558 एकड़ सरकारी जमीन असल में नहरों, तालाबों और महत्वपूर्ण जल निकायों के रूप में थी, जो किसी भी रनवे के निर्माण के लिए तकनीकी रूप से पूरी तरह अनुपयुक्त थी।
पर्यावरणीय संवेदनशीलता और हजारों किसानों का विस्थापन बना परंदूर के रद्द होने का कारण
विजय सरकार द्वारा परंदूर एयरपोर्ट साइट को पूरी तरह से खारिज करने के पीछे कई बेहद ठोस और व्यावहारिक कारण गिनाए गए हैं, जिसमें सबसे प्रमुख बिंदु यह था कि प्रस्तावित साइट लगभग 5,746 एकड़ उपजाऊ और बहु-फसल वाली कृषि भूमि पर बनाई जा रही थी, जिससे क्षेत्र के हजारों अन्नदाता किसानों की पुश्तैनी जमीन और उनकी आजीविका हमेशा के लिए छिन जाती। इसके अलावा, परंदूर और उसके आसपास के गांवों के स्थानीय निवासियों ने पिछले 1,150 से भी अधिक दिनों से लगातार इस महत्वाकांक्षी परियोजना के खिलाफ अभूतपूर्व और कड़ा विरोध प्रदर्शन किया था, क्योंकि इस मेगा प्रोजेक्ट के कारण बड़ी संख्या में लोगों को अपने घरों से बेघर होना पड़ता। इस प्रस्तावित साइट के दायरे में कई प्रमुख जल निकाय और पारिस्थितिकी रूप से बेहद संवेदनशील वेटलैंड क्षेत्र भी शामिल थे, जो भौगोलिक रूप से चेन्नई और उसके आसपास के जिलों के लिए प्राकृतिक बाढ़ अवरोधक (Natural Flood Barriers) के रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मुख्यमंत्री विजय ने अपने चुनावी प्रचार के दौरान ही परंदूर एयरपोर्ट का पुरजोर विरोध किया था और किसानों से यह खुला वादा किया था कि यदि उनकी सरकार सत्ता में आती है तो वे सबसे पहले इस जनविरोधी परियोजना को रद्द कर देंगे, जिसे उन्होंने कार्यभार संभालते ही पूरा कर दिखाया है।
सियासी वार-पलटवार और आने वाले समय की बड़ी चुनौतियां
इस पूरे प्रकरण पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक घमासान पूरी तरह से चरम पर पहुंच चुका है, जहां डीएमके का यह पुख्ता तर्क है कि किसी भी विकास प्रोजेक्ट को 90 प्रतिशत से अधिक काम पूरा होने के बाद अचानक बीच में ही रद्द कर देने से राज्य के औद्योगिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ी है और देश-विदेश के निवेशकों के भरोसे को भी भारी आर्थिक झटका लगा है। इसके जवाब में सत्तारूढ़ दल ने स्पष्ट किया कि 1,150 से अधिक दिनों से धरने पर बैठे एकनापुरम और आसपास के 12 गांवों के गरीब किसानों को उनके घरों से उजड़ने और बेघर होने से बचाना उनकी सरकार का सर्वोच्च नैतिक और चुनावी कर्तव्य था, जिसे उन्होंने पूरी ईमानदारी से निभाया है। अब तमाम राजनीतिक और प्रशासनिक गहमागहमी के बीच सबकी निगाहें एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) की उस अंतिम तकनीकी रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं, जो यह तय करेगी कि अंततः मनेल्लूर या चेय्यूर में से किस वैकल्पिक स्थान पर मुहर लगती है और चेन्नई के नए एयरपोर्ट का रास्ता साफ होता है।
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