
पिछले काफी समय से अमेरिका और ईरान के बीच जारी विनाशकारी युद्ध को लेकर गुरुवार को वैश्विक मंच से एक बहुत बड़ी और राहत भरी खुशखबरी सामने आई है। लंबे सैन्य संघर्ष के बाद आखिरकार दोनों शक्तिशाली देशों के बीच एक शांति समझौते पर सहमति बन गई है। इस ऐतिहासिक डील के मसौदे को अब सिर्फ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है।
राजनयिक सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी और ईरानी शीर्ष अधिकारी युद्ध को रोकने के लिए एक 60 दिनों के समझौता ज्ञापन यानी MoU (Memorandum of Understanding) को जमीन पर लागू करने के लिए पूरी तरह राजी हो गए हैं, जिसकी पुष्टि खुद अमेरिकी अधिकारियों ने की है। अब अगर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस पर अपने आधिकारिक दस्तखत कर देते हैं, तो दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) में जारी भयानक सैन्य तनाव हमेशा के लिए खत्म हो सकता है।
खुल जाएगा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, भारत के लिए संजीवनी साबित होगी यह महाडील
एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के कारण महीनों से बंद पड़े स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए दोबारा खोलना इस शांति समझौते के सबसे मुख्य और बुनियादी बिंदुओं में से एक है। यह खबर भारत के लिए किसी बड़ी संजीवनी से कम नहीं है। इस प्रमुख समुद्री मार्ग के बंद होने की वजह से पूरी दुनिया सहित भारत में भी ऊर्जा संकट (Energy Crisis) अपने चरम पर पहुंच चुका है और कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिसके चलते भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं।
ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल के टैंकरों और जहाजों की आवाजाही दोबारा शुरू होने से भारत के एनर्जी सेक्टर पर जारी भारी दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा। आपको बता दें कि युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया के कुल तेल और गैस के वैश्विक व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा अकेले इसी संकरे समुद्री रास्ते से गुजरता था। हालांकि, ईरान पर अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए यहां से जहाजों के गुजरने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था, जिसके बाद अमेरिकी नौसेना ने भी इस क्षेत्र की सख्त नाकेबंदी कर दी थी।
जानिए क्या-क्या है इस अमेरिकी-ईरान शांति समझौते के मसौदे में?
अमेरिकी अधिकारियों द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, इस प्रस्तावित एमओयू (MoU) के तहत कई बड़े फैसले लिए गए हैं:
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जहाजों की बेरोक-टोक आवाजाही: होर्मुज के रास्ते से गुजरने वाले किसी भी देश के कमर्शियल जहाजों को रोका नहीं जाएगा।
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नो टोल टैक्स: इस रास्ते से गुजरने के लिए जहाजों को किसी भी प्रकार का कोई टोल टैक्स या अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा।
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बारूदी सुरंगों की सफाई: ईरान इस बात पर राजी हुआ है कि वह समझौते के अगले 30 दिनों के भीतर इस समुद्री रास्ते में बिछाई गई अपनी सभी घातक बारूदी सुरंगों (Naval Mines) को पूरी तरह हटा लेगा।
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नाकेबंदी से राहत: इसके बदले में अमेरिकी सेना भी ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई अपनी सख्त आर्थिक और सैन्य नाकेबंदी को धीरे-धीरे पूरी तरह खत्म कर देगी।
परमाणु हथियारों पर झुका ईरान, यूरेनियम भंडार पर होगी 60 दिन बात
इस शांति समझौते के मसौदे में ईरान की ओर से सबसे बड़ा आत्मसमर्पण परमाणु हथियारों को लेकर देखा जा रहा है। ईरान ने आधिकारिक तौर पर प्रतिबद्धता जताई है कि वह भविष्य में परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। मसौदा लागू होने के बाद शुरुआती 60 दिनों तक दोनों पक्षों के उच्चायुक्त इस विषय पर गहन बातचीत करेंगे।
पहले चरण की इस महावार्ता में ईरान के पास मौजूद संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) के विशाल भंडार के भविष्य को नष्ट या नियंत्रित करने पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसके एवज में अमेरिका भी ईरान पर लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंधों में बड़ी राहत देने, अंतरराष्ट्रीय बैंकों में जब्त किए गए ईरान के अरबों डॉलर के फंड को वापस करने और ईरान तक जरूरी मानवीय सहायता व दवाइयां पहुंचाने के लिए एक विशेष प्लान तैयार करने पर सहमत हुआ है।
…तो ईरान को पूरी तरह खत्म कर देंगे; डोनाल्ड ट्रंप की आखिरी चेतावनी!
इस महाडील के फाइनल होने की सकारात्मक खबरों के बीच अब भी युद्ध के काले बादल पूरी तरह छंटे नहीं हैं। बुधवार को व्हाइट हाउस में हुई कैबिनेट मीटिंग के दौरान पत्रकारों से बेहद कड़क लहजे में बात करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, विदेश मंत्री मार्को रूबियो और युद्ध मंत्री (रक्षा मंत्री) पीट हेगसेथ ने साफ संकेत दिया कि अगर ईरान ने ऐन वक्त पर इस समझौते से पैर पीछे खींचे, तो अमेरिकी हमले और ज्यादा भीषण कर दिए जाएंगे।
राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईरान को सीधी धमकी देते हुए कहा, “अगर इस बार कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ, तो मेरे बाईं ओर बैठा यह आदमी (युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ की ओर इशारा करते हुए) ईरान को दुनिया के नक्शे से पूरी तरह खत्म कर देगा।” वहीं विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने उम्मीद जताते हुए कहा, “हमें लगता है कि बातचीत में काफी सकारात्मक प्रगति हुई है। अब हम अगले कुछ घंटों में देखेंगे कि क्या इसे अंतिम रूप दिया जा सकता है।” हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि ट्रंप इस समझौते पर किस तय समय तक दस्तखत करेंगे, यह कहना फिलहाल जल्दबाजी होगी। अमेरिकी अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि इस डील में कोई भी गुप्त शर्त नहीं है— ईरान जितना ज्यादा परमाणु सरेंडर करेगा, उसे उतनी ही आर्थिक आजादी मिलेगी।
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