
वैश्विक बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेतों, मजबूत होते अमेरिकी डॉलर और दुनिया भर की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका के चलते घरेलू वायदा बाजार में आज सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है।
शुक्रवार, 22 मई 2026 को सुबह के कारोबार में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने और चांदी दोनों ही कीमती धातुएं लाल निशान पर ट्रेड करती दिखीं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण महंगाई का दबाव बढ़ने और केंद्रीय बैंकों द्वारा सख्त रुख अपनाए जाने के डर से निवेशकों का सेंटिमेंट प्रभावित हुआ है।
घरेलू बाजार (MCX) पर आज के भाव (Gold-Silver Prices on MCX)
सुबह के कारोबारी सत्र में भारतीय वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में निम्नलिखित उतार-चढ़ाव देखा गया:
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सोने का भाव (Gold Rate): एमसीएक्स (MCX) पर सोने का वायदा भाव 0.25 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹1,59,202 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया।
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चांदी का भाव (Silver Rate): वहीं, चांदी के वायदा भाव में अधिक कमजोरी देखी गई। चांदी 0.43 प्रतिशत की कमी के साथ ₹2,73,690 प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी छाई मंदी (Global Gold & Silver Spot Prices)
वैश्विक स्तर पर भी बहुमूल्य धातुओं की कीमतों पर दबाव साफ नजर आ रहा है:
| धातु (Metals) | स्पॉट भाव (Spot Price) | गिरावट (Percentage) |
|---|---|---|
| स्पॉट गोल्ड (Spot Gold) | $4,522.89 प्रति औंस | -0.4% |
| यूएस गोल्ड वायदा (US Gold Futures) | $4,524.40 प्रति औंस | -0.4% |
| स्पॉट सिल्वर (Spot Silver) | $76.18 प्रति औंस | -0.7% |
अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस कारोबारी सप्ताह के दौरान सोने में अब तक कुल 0.3 प्रतिशत की साप्ताहिक गिरावट दर्ज की जा चुकी है।
कीमतें गिरने की 3 सबसे बड़ी वजहें (Reasons Behind the Price Drop)
1. डॉलर की मजबूती और छह सप्ताह का हाई
इन दिनों अमेरिकी डॉलर सूचकांक अपने छह सप्ताह के उच्चतम स्तर (High) के करीब मंडरा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का व्यापार डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर के मजबूत होने से अन्य देशों की करेंसी (जैसे भारतीय रुपया) के खरीदारों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे इसकी मांग घटती है और कीमतें गिरती हैं।
2. मध्य पूर्व तनाव और क्रूड ऑयल का असर
पिछले दो महीनों से अमेरिका-ईरान संघर्ष के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भारी उछाल आया है। क्रूड महंगा होने से दुनिया भर में महंगाई (Inflation) बढ़ने की आशंका गहरा गई है।
3. ब्याज दरें बढ़ने की आशंका (Fed & RBI Policy)
आमतौर पर सोने को महंगाई के खिलाफ एक सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इस पर कोई तय ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता। कच्चे तेल के कारण बढ़ती महंगाई को काबू में करने के लिए अब मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस साल ब्याज दरों में दोबारा बढ़ोतरी शुरू कर सकते हैं।
एक्सपर्ट्स का अनुमान: सीएमई ग्रुप के ‘फेडवॉच टूल’ (FedWatch Tool) के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, बाजार के कम से कम 60% व्यापारियों का मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस साल दिसंबर तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो निवेशक सोने से पैसा निकालकर फिक्स्ड इनकम और बॉन्ड्स में लगाने लगते हैं, जिससे सोने पर दबाव और बढ़ जाता है।
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