
त्योहारी सीजन, करवाचौथ, धनतेरस और आगामी शादियों के लग्न से ठीक पहले सोने-चांदी के आभूषणों के बाजार से एक बड़ी नीतिगत खबर सामने आई है। भारत में सोने की शुद्धता को प्रमाणित करने वाली शीर्ष सरकारी संस्था ‘भारतीय मानक ब्यूरो’ (Bureau of Indian Standards – BIS) ने सोने के आभूषणों और कलाकृतियों पर लगने वाले हॉलमार्किंग शुल्क में भारी संशोधन कर दिया है। बीआईएस द्वारा 14 सितंबर 2026 को जारी ‘ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (हॉलमार्किंग) संशोधन विनियम, 2026’ (Bureau of Indian Standards Hallmarking Amendment Regulations, 2026) के आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन के तहत सोने की प्रति आर्टिकल हॉलमार्किंग फीस को 45 रुपये से बढ़ाकर सीधे 75 रुपये तय कर दिया गया है। यानी प्रत्येक आभूषण पर हॉलमार्किंग का खर्च सीधे 30 रुपये बढ़ गया है। गणितीय आधार पर देखें तो यह शुल्क में सीधे 66.67 प्रतिशत (लगभग 67%) का भारी इजाफा है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के चौक और अमीनाबाद सराफा बाजार, कानपुर के बिरहाना रोड, वाराणसी के ठठेरी बाजार, नोएडा, मेरठ से लेकर दिल्ली के चांदनी चौक और मुंबई के जवेरी बाजार तक के ज्वैलर्स और आभूषण खरीदारों के बीच इस फैसले की चर्चा तेज हो गई है।
हॉलमार्किंग फीस में 67 फीसदी की बढ़ोतरी की खबर सुनते ही आम उपभोक्ताओं के मन में यह आशंका पैदा हो गई है कि क्या अब सोने के गहने खरीदना बहुत ज्यादा महंगा हो जाएगा? इसे समझने के लिए प्रति आर्टिकल शुल्क और आभूषण की कुल कीमत के अनुपात को देखना जरूरी है। साल 2022 में बीआईएस ने सोने के प्रति गहने की हॉलमार्किंग फीस 35 रुपये से बढ़ाकर 45 रुपये की थी। अब चार साल बाद 2026 के इस संशोधन में इसे 45 रुपये से बढ़ाकर 75 रुपये (+ लागू 18% जीएसटी) किया गया है।
इस बढ़ोतरी का ग्राहक के बजट पर पड़ने वाले प्रभाव का व्यावहारिक विश्लेषण इस प्रकार है:
-
अंगूठी या चेन की खरीद पर: यदि आप 10 ग्राम की सोने की चेन या अंगूठी बनवाते हैं, जिसकी बाजार कीमत वर्तमान में लगभग ₹70,000 से ₹75,000 के आसपास है, तो पहले उस पर ₹45 की हॉलमार्किंग फीस लगती थी। अब नए नियम के बाद उस पर ₹75 की फीस लगेगी। यानी ₹75,000 के गहने पर आपको मात्र ₹30 अतिरिक्त चुकाने होंगे।
-
पूरे ब्राइडल सेट की खरीद पर: यदि कोई परिवार शादी के लिए एक भारी ब्राइडल ज्वेलरी सेट खरीदता है, जिसमें एक हार, दो झुमके (ईयररिंग्स), एक मांगटीका, दो चूड़ियां और एक नथ शामिल है—यानी कुल 7 अलग-अलग आर्टिकल्स हैं। पहले इन 7 टुकड़ों पर कुल हॉलमार्किंग चार्ज ₹315 (7 × ₹45) बनता था। अब ₹75 प्रति आर्टिकल की दर से यह खर्च ₹525 (7 × ₹75) होगा। यानी करीब ₹4 लाख से ₹5 लाख के भारी-भरकम सेट पर ग्राहक की जेब पर कुल अतिरिक्त बोझ मात्र ₹210 का पड़ेगा।
सीधे शब्दों में कहें तो प्रतिशत के लिहाज से 67% की बढ़ोतरी बहुत बड़ी और आक्रामक दिखती है, लेकिन सोने की मौजूदा रिकॉर्ड कीमतों को देखते हुए किसी एक आभूषण के कुल मूल्य पर इसका असर 0.05% से भी कम है।
बीआईएस द्वारा जारी ताजा अधिसूचना में चांदी (Silver) के शौकीनों और चांदी के आभूषण बनाने वाले कारीगरों को पूरी राहत दी गई है। नए नियमों के अनुसार, चांदी के आभूषणों और कलाकृतियों की हॉलमार्किंग फीस में कोई बदलाव नहीं किया गया है। चांदी के प्रत्येक आर्टिकल के लिए निर्धारित 35 रुपये की फीस पहले की तरह यथावत लागू रहेगी। इसके अलावा, ज्वैलर्स द्वारा हॉलमार्किंग सेंटरों को भेजे जाने वाले चांदी के कंसाइनमेंट के लिए न्यूनतम कंसाइनमेंट फीस भी पहले की तरह ₹150 ही बनी रहेगी। वहीं सोने के मामले में भी ज्वैलर्स को राहत देते हुए बीआईएस ने प्रति कंसाइनमेंट की न्यूनतम फीस को नहीं बढ़ाया है; यह न्यूनतम फीस पहले भी ₹200 थी और नए संशोधन के बाद भी ₹200 ही रखी गई है।
हॉलमार्किंग की इस नई व्यवस्था में केवल ज्वैलर्स से ली जाने वाली फीस ही नहीं बढ़ी है, बल्कि ‘एसेइंग एंड हॉलमार्किंग सेंटर्स’ (Assaying and Hallmarking Centres – AHC) द्वारा बीआईएस को दी जाने वाली रॉयल्टी फीस में भी संशोधन किया गया है। देश भर में संचालित मान्यता प्राप्त निजी हॉलमार्किंग सेंटर्स जब किसी गहने की शुद्धता की एक्स-रे और रासायनिक जांच करते हैं, तो वे बीआईएस को एक निश्चित हिस्सा देते हैं।
-
सोने के लिए AHC से BIS फीस: पहले हॉलमार्किंग सेंटर बीआईएस को ₹4.50 प्रति आर्टिकल का भुगतान करते थे। नई अधिसूचना के तहत इसे बढ़ाकर ₹7.50 प्रति आर्टिकल कर दिया गया है, यानी इसमें प्रति आर्टिकल ₹3 की सीधी बढ़ोतरी हुई है। इसके लिए न्यूनतम कंसाइनमेंट फीस ₹20 पर स्थिर रखी गई है।
-
चांदी के लिए AHC से BIS फीस: चांदी के आभूषणों के लिए हॉलमार्किंग सेंटर द्वारा बीआईएस को दी जाने वाली फीस में कोई बदलाव नहीं किया गया है; यह पहले की तरह ₹3.50 प्रति आर्टिकल और न्यूनतम ₹15 प्रति कंसाइनमेंट बनी रहेगी।
हॉलमार्किंग एसोसिएशन के प्रतिनिधियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में स्पेक्ट्रोमीटर मशीनों की लागत, रासायनिक परीक्षण सामग्री (Chemicals/Acids) के दाम, लेजर मार्किंग सॉफ्टवेयर और कुशल लेबर का खर्च काफी बढ़ गया था। ऐसे में फीस बढ़ने से हॉलमार्किंग केंद्रों की वित्तीय स्थिति सुधरेगी और वे आधुनिक तकनीकी उपकरणों के साथ गहनों की शुद्धता की जांच अधिक तेजी और सटीकता से कर सकेंगे।
केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल 2023 से ही देश भर में बिना 6 डिजिट वाले ‘अल्फ़ान्यूमेरिक एचयूआईडी’ (HUID – Hallmark Unique Identification) के सोने के गहनों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है। जब भी आप किसी ज्वैलर से हॉलमार्क वाला नया गहना खरीदते हैं, तो आपको उस पर तीन प्रमुख निशान देखने चाहिए:
-
बीआईएस का मानक लोगो (BIS Triangular Logo): तिकोने आकार का आधिकारिक सरकारी मार्क।
-
कैरेट और शुद्धता का अंक (Purity Mark): जैसे 24K के लिए 999, 22 कैरेट सोने के लिए 22K916, 18 कैरेट के लिए 18K750 और 14 कैरेट के लिए 14K585।
-
6-अंकों का HUID कोड (6-Digit Alphanumeric Code): प्रत्येक आभूषण पर लेजर से उकेरा गया 6 अंकों का एक अनूठा कोड (जैसे AB12CD), जो उस गहने का डिजिटल आधार कार्ड होता है।
उपभोक्ता अपने स्मार्टफोन में ‘BIS Care’ मोबाइल ऐप डाउनलोड करके ‘Verify HUID’ विकल्प में जाकर इस 6 अंकों के कोड को दर्ज कर सकते हैं। कोड डालते ही स्क्रीन पर यह स्पष्ट आ जाता है कि यह गहना किस ज्वैलर ने बनवाया, किस हॉलमार्किंग सेंटर ने इसे प्रमाणित किया, इसका शुद्ध वजन कितना है और यह कितने कैरेट का है। इससे सोने में किसी भी प्रकार की मिलावट या धोखाधड़ी की संभावना शत-प्रतिशत समाप्त हो जाती है।
बीआईएस के सख्त दिशा-निर्देशों के अनुसार, देश के किसी भी छोटे या बड़े ज्वैलर के लिए आभूषण के बिल में हॉलमार्किंग चार्ज को अलग से पारदर्शी तरीके से दर्शाना अनिवार्य है। जब आप नया आभूषण खरीदें, तो अपने इनवॉइस में इन बिंदुओं की पड़ताल अवश्य करें:
-
बिल पर स्पष्ट प्रविष्टि: ज्वैलर को बिल में सोने का शुद्ध वजन (Gross Weight और Net Weight), उस दिन का 22K या 18K का सोने का भाव, मेकिंग चार्ज (Making Charges) और हॉलमार्किंग फीस (अब ₹75 + 18% GST = ₹88.50 प्रति पीस) को अलग लाइन आइटम के रूप में दिखाना होगा।
-
पत्थरों का वजन अलग: यदि आप कुंदन, पोलकी, हीरे या अन्य नगीनों (Stones) से जड़ा हुआ आभूषण ले रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि बिल में सोने का वजन अलग हो और पत्थरों का वजन व कीमत अलग हो। कभी भी पत्थरों के वजन को सोने के भाव में न तुलने दें।
-
जीएसटी की दर: गहने की कुल कीमत (सोना + मेकिंग चार्ज + हॉलमार्किंग फीस) पर केंद्र और राज्य सरकार का कुल 3 प्रतिशत जीएसटी (GST) लागू होता है। पक्का बिल ही भविष्य में उस आभूषण को एक्सचेंज करने, री-सेल करने या गोल्ड लोन लेने के समय शुद्धता का एकमात्र वैध कानूनी प्रमाण होता है।
हॉलमार्किंग फीस में ₹30 की यह बढ़ोतरी तकनीकी रूप से 67% की एक बड़ी नियामक वृद्धि जरूर है, लेकिन आम उपभोक्ता के लिए यह कतई चिंता का विषय नहीं है। हजारों और लाखों रुपये के सोने के आभूषणों पर ₹30 का अतिरिक्त शुल्क आपकी शुद्धता की 100% सरकारी सुरक्षा की गारंटी देता है। यह मामूली अतिरिक्त राशि इस बात को सुनिश्चित करती है कि आप जिस 22 कैरेट सोने की मोटी कीमत चुका रहे हैं, उसमें 1 रत्ती की भी मिलावट न हो। इसलिए इस त्योहारी सीजन में जब भी सराफा बाजार जाएं, तो बिना किसी झिझक के केवल 6 डिजिट HUID कोड वाला प्रमाणित हॉलमार्क सोना ही खरीदें और पक्का इनवॉइस लेना बिल्कुल न भूलें।
girls globe