
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) की सबसे चर्चित आवासीय भूखंड योजना ‘मधुबन बापूधाम योजना’ (Madhuban Bapudham Scheme-935) में आवेदन करने वाले हजारों नागरिकों के लिए एक जरूरी प्रशासनिक अपडेट सामने आया है। 350 आवासीय भूखंडों के लिए आयोजित ई-लॉटरी के बाद प्राधिकरण ने असफल रहे 42,000 से अधिक आवेदकों की जमा धरोहर राशि यानी टोकन मनी (Earnest Money Deposit – EMD) वापस लौटाने की प्रक्रिया शुरू की थी। हालांकि, बैंकिंग और तकनीकी कारणों के चलते 647 आवेदकों के बैंक खातों में रिफंड ट्रांसफर फेल (NEFT/RTGS Failed) हो गया है। त्योहारी सीजन के बीच अपने लाखों रुपये की पंजीकरण राशि अटकने से आवेदक लगातार प्राधिकरण के चक्कर काट रहे हैं। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, नोएडा, दिल्ली-एनसीआर और राजधानी लखनऊ तक के आवेदकों की चिंताओं को देखते हुए जीडीए प्रशासन ने साफ किया है कि किसी भी पात्र आवेदक का पैसा नहीं डूबेगा और बैंक विवरण संशोधित होते ही पूरी राशि पुनः ट्रांसफर कर दी जाएगी।
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के वित्त एवं कंप्यूटर अनुभाग द्वारा जारी समीक्षा के अनुसार, रिफंड ट्रांजेक्शन फेल होने के पीछे जीडीए का सिस्टम नहीं, बल्कि आवेदन के समय फॉर्म में दर्ज की गई बैंकिंग त्रुटियां मुख्य कारण बनी हैं:
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गलत या मर्ज हो चुका IFSC कोड: देश में बैंकों के हालिया विलय (Merger) के बाद कई बैंकों के पुराने आईएफएससी कोड बदल गए। आवेदकों ने फॉर्म में पुराने कोड दर्ज कर दिए, जिससे ऑटोमेटेड क्लियरिंग सिस्टम ने पैसा रिजेक्ट कर दिया।
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बैंक खाता संख्या में त्रुटि: ऑनलाइन आवेदन भरते समय खाता संख्या (Account Number) में एक-दो अंकों की गलती या टाइपो के कारण एनईएफटी बाउंस हो गया।
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नाम में मिसमैच (Name Mismatch): आवेदन पत्र में दर्ज नाम और बैंक खाते के रिकॉर्ड में दर्ज नाम में स्पेलिंग का अंतर होना।
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निष्क्रिय या बंद बैंक खाता: कई आवेदकों के खाते इनऑपरेटिव (Inoperative), फ्रीज या पूरी तरह बंद पाए गए, जिससे बैंक ने रिफंड स्वीकार नहीं किया।
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कैफे संचालक का खाता देना: कुछ आवेदकों ने साइबर कैफे से फॉर्म भरवाते समय स्वयं के खाते के बजाय कैफे संचालक का खाता नंबर दे दिया था, जिसके चलते वित्तीय सत्यापन में विसंगति सामने आई।
मधुबन बापूधाम योजना के नियमों के अनुसार, ड्रॉ में असफल रहे आवेदकों को उनकी पूरी पंजीकरण धरोहर राशि बिना किसी ब्याज और बिना किसी कटौती के लौटाई जाती है:
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सामान्य एवं ओबीसी वर्ग: भूखंड की कुल अनुमानित कीमत का 10 प्रतिशत (जो लगभग ₹1.5 लाख से ₹5 लाख तक बनता है)।
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एससी एवं एसटी संवर्ग: कुल मूल्य का 5 प्रतिशत पंजीकरण राशि।
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ब्रोशर शुल्क अप्रतिदेय: केवल आवेदन के समय लिया गया ई-ब्रोशर शुल्क (लगभग ₹1,100) नॉन-रिफंडेबल होता है, शेष पूरी टोकन मनी बैंक में वापस भेजी जाती है।
जीडीए ने असफल ट्रांजेक्शन वाले 647 आवेदकों की सूची आधिकारिक रूप से चिन्हित की है। आवेदक घर बैठे अपना स्टेटस इन चरणों में जांच सकते हैं:
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सबसे पहले गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट gdaghaziabad.in पर जाएं।
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होमपेज पर ‘Important Information’ या ‘Latest Notices’ सेक्शन में जाएं।
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वहां ‘Download NEFT Failed Transaction List – Madhuban Bapudham Scheme’ लिंक पर क्लिक करें।
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पीडीएफ में अपने आवेदन संख्या (Application No.) या नाम से सर्च करें। यदि आपका नाम उस सूची में है, तो इसका अर्थ है कि आपका रिफंड बैंक से बाउंस होकर वापस जीडीए के खाते में आ चुका है।
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इसके अलावा आवेदक ‘जनहित यूपीडीए’ (Janhit UPDA) पोर्टल पर अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और ओटीपी से लॉगिन करके भी ‘Refund Status’ देख सकते हैं।
जिन आवेदकों का रिफंड फेल हुआ है, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। जीडीए ने बैंक डिटेल्स ठीक कराने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प दिए हैं:
विकल्प 1: व्हाट्सएप और ऑनलाइन ग्रीवेंस के जरिए (घर बैठे)
जीडीए ने असफल रिफंड की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए एक समर्पित व्हाट्सएप हेल्पडेस्क नंबर जारी किया है:
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प्राधिकरण के आधिकारिक व्हाट्सएप नंबर +91-9990988004 पर अपना विवरण भेजें।
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मैसेज में अपना एप्लीकेशन नंबर, पंजीकरण रसीद की कॉपी, और अपने सक्रिय बैंक खाते का कैंसिल्ड चेक (Cancelled Cheque) या पासबुक के पहले पन्ने की स्पष्ट फोटो संलग्न करें।
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इसके अलावा [email protected] पर ईमेल के माध्यम से भी विषय में “Correction in Bank Details for Madhuban Bapudham Refund” लिखकर दस्तावेज प्रेषित किए जा सकते हैं।
विकल्प 2: जीडीए मुख्यालय में ऑफलाइन प्रत्यावेदन
यदि कोई आवेदक व्यक्तिगत रूप से प्रक्रिया पूरी करना चाहता है:
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गाजियाबाद के विकास पथ स्थित जीडीए मुख्यालय (GDA Office) के कंप्यूटर एवं वित्त अनुभाग में जाएं।
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वहां एक सादे कागज पर ‘बैंक विवरण संशोधन एवं पुनः रिफंड’ हेतु प्रार्थना पत्र लिखें।
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प्रार्थना पत्र के साथ आवेदन फॉर्म का प्रिंटआउट, मूल आधार कार्ड की स्वप्रमाणित छायाप्रति और बैंक पासबुक/कैंसिल्ड चेक संलग्न करें।
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काउंटर से रिसीविंग (पावती) अवश्य प्राप्त करें।
प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, जैसे ही आवेदक द्वारा प्रस्तुत नया बैंक विवरण और आईएफएससी कोड सिस्टम में री-वेरिफाई (Re-verified) हो जाएगा, वित्त विभाग द्वारा ट्रेजरी के माध्यम से आरटीजीएस/एनईएफटी का दूसरा बैच जारी किया जाएगा। प्रक्रिया पूरी होने के बाद 7 से 10 कार्यदिवसों के भीतर धनराशि सीधे आवेदक के चालू बचत खाते में क्रेडिट हो जाएगी। जीडीए ने सभी प्रभावित नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनाधिकृत दलाल या फर्जी लिंक के झांसे में न आएं और केवल जीडीए के आधिकारिक पोर्टल gdaerp.in व निर्धारित हेल्पलाइन का ही सहारा लें।
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