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Ganesh Visarjan 2026: 5वें दिन नम आंखों से बप्पा को विदाई! नोट कर लें आज 5 दिवसीय गणेश विसर्जन के शुभ चौघड़िया मुहूर्त, सही विधि और जरूरी नियम

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर घरों और पूजा पंडालों में विधि-विधान से विराजे प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश के 5 दिवसीय उत्सव का आज विदाई पर्व है। सनातन परंपरा में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और कुल परंपरा के अनुसार डेढ़ दिन, 3 दिन, 5 दिन, 7 दिन या फिर अनंत चतुर्दशी पर पूरे 10 दिन बाद बप्पा का विसर्जन करते हैं। जिन भक्तों ने अपने घर में 5 दिनों के लिए विघ्नहर्ता को आमंत्रित किया था, वे आज नम आंखों और ढोल-ताशों की गूंज के साथ लाडले गजानन को विदाई दे रहे हैं। शास्त्रों में मान्यता है कि बप्पा को विदा करते समय सही शुभ मुहूर्त, चौघड़िया और विधि-विधान का पालन करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का स्थायी वास होता है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार विसर्जन का कर्म शुभ चौघड़िया और अनुकूल लग्न में करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। राहुकाल के समय विसर्जन करने से बचना चाहिए। आज के प्रमुख विसर्जन मुहूर्त इस प्रकार हैं:

  • प्रातःकालीन मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत): सुबह 06:15 बजे से सुबह 10:45 बजे तक का समय बप्पा की अंतिम आरती और विदाई शोभायात्रा शुरू करने के लिए बेहद उत्तम है।

  • मध्याह्न मुहूर्त (शुभ चौघड़िया): दोपहर 12:15 बजे से दोपहर 01:45 बजे तक दोपहर का सबसे शुभ समय रहेगा।

  • सायंकालीन मुहूर्त (चर, लाभ): शाम 04:50 बजे से शाम 06:20 बजे तक और गोधूलि वेला के समय भी विसर्जन का अनुष्ठान संपन्न किया जा सकता है।

  • राहुकाल से बचें: दिन के उस विशिष्ट 90 मिनट के पहर (राहुकाल) के दौरान विसर्जन कर्म अथवा अंतिम प्रस्थान टालना शास्त्र सम्मत माना गया है।

बप्पा को विदा करने से पूर्व उनका आदर-सत्कार उसी भाव से करना चाहिए जैसा स्थापना के दिन किया गया था। सबसे पहले भगवान गणेश को गंगाजल और पंचामृत के छींटे देकर स्वच्छ वस्त्र अथवा पीतांबरी अर्पित करें। इसके बाद रोली, अक्षत, चंदन, इत्र और दूर्वा की 21 गांठें अर्पित करें। लाल गुड़हल का पुष्प गणपति को अत्यंत प्रिय है, इसे अवश्य चढ़ाएं। इसके उपरांत मोदक, बेसन के लड्डू, ऋतु फल और पंचमेवा का भोग लगाएं।

परिवार के सभी सदस्य मिलकर गणेश जी की धूप-दीप से आरती गाएं। इसके बाद एक साफ पीले या लाल कपड़े में थोड़ी सुपारी, अक्षत, दूर्वा, दक्षिणा और मोदक बांधकर ‘पाथेय’ (यात्रा का भोजन/राशन) के रूप में बप्पा की प्रतिमा के साथ रखें। मान्यता है कि विदाई के समय भगवान को खाली हाथ नहीं भेजा जाता।

आरती और भोग के उपरांत विसर्जन यात्रा शुरू करने से पहले उस चौकी या पाटे को, जिस पर बप्पा स्थापित हैं, ईशान कोण की दिशा में धीरे से कुछ इंच आगे खिसकाएं। इसे ‘पाटा हिलाना’ कहते हैं, जो इस बात का प्रतीक है कि भगवान का आतिथ्य पूर्ण हुआ और अब वे अपने धाम (कैलाश) प्रस्थान कर रहे हैं।

इसके बाद हाथ जोड़कर जाने-अनजाने पूजा में हुई गलतियों के लिए क्षमा मंत्र का जाप करें:

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥

भगवान से प्रार्थना करें कि वे परिवार के सारे कष्ट, विघ्न और नकारात्मक ऊर्जा अपने साथ ले जाएं तथा घर में रिद्धि-सिद्धि और बरकत छोड़ जाएं।

नदियों और जलाशयों की स्वच्छता को बनाए रखने के लिए आज घर पर ही पर्यावरण-अनुकूल विसर्जन का प्रचलन तेजी से बढ़ा है। यदि आपके घर में मिट्टी (शाडू माटी) के गणेश जी स्थापित हैं, तो एक बड़े टब, साफ बाल्टी या गमले में स्वच्छ जल भरें और उसमें थोड़ा गंगाजल, हल्दी और ताजे पुष्प डालें। इसके बाद जयकारों के साथ बप्पा की प्रतिमा को जल में धीरे से विसर्जित करें। जब मिट्टी पूरी तरह घुल जाए, तो उस पवित्र मिट्टी और जल को तुलसी के पौधे को छोड़कर घर के अन्य फूलों वाले गमलों या पौधों की जड़ों में डाल दें। इससे बप्पा की कृपा आपके घर के प्रांगण में ही सदैव हरी-भरी बनी रहेगी।

  • प्रतिमा को फेंकें नहीं: किसी नदी, नहर या तालाब में विसर्जित करते समय प्रतिमा को कभी भी पुल या किनारे से फेंके नहीं। पूरे आदर के साथ जल में उतरकर या किनारे बैठकर दोनों हाथों से धीरे-धीरे जलमग्न करें।

  • पीठ न दिखाएं: जब तक बप्पा जल में पूरी तरह विलीन न हो जाएं, तब तक हाथ जोड़कर प्रार्थना मुद्रा में रहें, तुरंत पीठ फेरकर न लौटें।

  • पूजा सामग्री का अपमान न हो: विसर्जन के साथ प्रयुक्त फूल, माला और नारियल को प्लास्टिक की थैलियों में बांधकर जल में न फेंके, बल्कि सूखे कचरे का अलग से निस्तारण करें।

  • काले या नीले वस्त्र न पहनें: विसर्जन के पावन अवसर पर काले या गहरे नीले रंग के कपड़े पहनने से बचें; इस दिन पीला, नारंगी, लाल या श्वेत वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है।