
पैकेज्ड फूड और डेयरी सेक्टर में उपभोक्ताओं की सेहत और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने बड़े ब्रांड्स पर शिकंजा कसना तेज कर दिया है। नेस्ले इंडिया और हिंदुस्तान यूनिलीवर को नोटिस जारी करने के बाद अब नियामक की केंद्रीय जांच टीमों ने दक्षिण भारत की प्रमुख दुग्ध उत्पादक कंपनी डोडला डेयरी (Dodla Dairy) और देश के लोकप्रिय ‘प्रियागोल्ड’ (Priyagold) बिस्किट निर्माता सूर्या फूड एंड एग्रो लिमिटेड (Surya Food & Agro Ltd) की निर्माण इकाइयों पर अचानक छापा मारकर सघन निरीक्षण अभियान चलाया। जांच के दौरान उत्पादन इकाइयों में साफ-सफाई (Good Hygienic Practices), कच्चे माल के भंडारण और लेबलिंग मानकों में गंभीर कमियां पाई गईं। इसके बाद एफएसएसएआई ने न केवल इन कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं, बल्कि संदिग्ध सामग्री के नमूनों को जब्त कर विस्तृत लैब टेस्टिंग के लिए भेजा है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) समेत देश भर की नियामक इकाइयों में इस कार्रवाई के बाद हड़कंप मचा हुआ है।
दक्षिण भारत और पश्चिमी राज्यों में दूध, पनीर, घी और मक्खन का बड़े पैमाने पर वितरण करने वाली डोडला डेयरी के प्रोसेसिंग प्लांट पर केंद्रीय निरीक्षकों की टीम ने औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पाई गई मुख्य अनियमितताएं इस प्रकार रहीं:
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दूध संकलन और चिलिंग चेन में लापरवाही: रॉ मिल्क (कच्चे दूध) के संग्रह के समय तापमान नियंत्रण (Cold Chain Maintenance) के मानकों का उल्लंघन पाया गया। कई बैचों में दूध का तापमान निर्धारित 4 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज हुआ, जिससे बैक्टीरिया पनपने का गंभीर जोखिम रहता है।
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फैट और एसएनएफ (SNF) में विसंगतियां: टोंड और स्टैंडर्डाइज्ड मिल्क के तैयार पैकेटों में फैट और सॉलिड्स-नॉट-फैट (SNF) की मात्रा एफएसएसएआई द्वारा तय मानकों से कम पाई गई, जो सीधे तौर पर मिलावट या घटिया गुणवत्ता की श्रेणी में आता है।
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प्रोसेसिंग एरिया में सैनिटेशन की कमी: पाश्चराइजेशन यूनिट और पैकेजिंग हॉल के फर्श व पाइपलाइनों में उचित सैनिटाइजेशन और ‘क्लीन-इन-प्लेस’ (CIP) प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया जा रहा था।
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वाटर क्वालिटी रिपोर्ट का अभाव: दूध के प्रसंस्करण और बर्तनों की धुलाई में इस्तेमाल होने वाले पानी की अनिवार्य आवधिक माइक्रोबायोलॉजिकल टेस्टिंग रिपोर्ट मौके पर प्रस्तुत नहीं की जा सकी।
‘हक से मांगो’ स्लोगन से घर-घर में पहचाने जाने वाले प्रियागोल्ड बिस्किट की उत्पादन इकाई (ग्रेटर नोएडा/उत्तरी भारत प्लांट) में एफएसएसएआई की टीम को कच्चे माल के भंडारण और पैकेजिंग मानकों में गंभीर उल्लंघन मिले:
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पाम ऑयल और रिफाइंड फैट की गुणवत्ता पर सवाल: बिस्किट और कुकीज बनाने में इस्तेमाल होने वाले एडिबल ऑयल और वेजिटेबल फैट के ड्रमों में ट्रांस-फैट और एसिड वैल्यू के अनिवार्य सुरक्षा मानकों का अभाव देखा गया। तय सीमा से अधिक बार गर्म किए गए तेल (Total Polar Compounds – TPC) के उपयोग का संदेह भी जताया गया है।
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गोदामों में सीलन और कीट नियंत्रण (Pest Control) में चूक: मैदा, चीनी और फ्लेवरिंग एजेंट्स के भंडारण गोदामों में पर्याप्त वेंटिलेशन और सीलन-रोधी व्यवस्था नहीं थी। पेस्ट कंट्रोल रिकॉर्ड्स अद्यतन नहीं पाए गए, जिससे कीट और फफूंद लगने का खतरा बना हुआ था।
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पैकेजिंग और एक्सपायरी दावों में भ्रामक जानकारी: कुछ बिस्किट वेरियंट्स पर ‘बेस्ट बिफोर’ की तारीख और न्यूट्रिशनल इंफॉर्मेशन के फॉन्ट साइज एफएसएसएआई के ‘पैकेजिंग एंड लेबलिंग रेगुलेशंस’ के अनुकूल नहीं थे। बिना स्पष्ट लैब प्रमाण के उत्पादों पर ‘हाई फाइबर’ और ‘विटामिन एनरिच्ड’ के दावे मुद्रित पाए गए।
निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर एफएसएसएआई के नामित अधिकारियों ने तत्काल प्रभाव से कई सख्त कदम उठाए हैं:
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सख्त कारण बताओ नोटिस (Show-Cause Notice): दोनों कंपनियों के प्रबंधन को धारा 31 और 32 के तहत नोटिस जारी कर 7 से 14 दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
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सैकड़ों किलोग्राम सामग्री सील: संदिग्ध पाए गए कच्चे माल, पाम ऑयल के स्टॉक और बिस्किट व पैकेज्ड मिल्क के तैयार बैचों को जब्त कर सील कर दिया गया है।
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लैब में भेजे गए सैंपल: जब्त किए गए नमूनों को परीक्षण के लिए नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैबोरेटरीज (NABL) द्वारा मान्यता प्राप्त केंद्रीय प्रयोगशालाओं में भेजा गया है।
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लाइसेंस निलंबन की चेतावनी: यदि लैब रिपोर्ट में रासायनिक या सूक्ष्मजैविक मिलावट की पुष्टि होती है, तो संबंधित उत्पादन लाइनों के संचालन लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) या रद्द किया जा सकता है।
खाद्य सुरक्षा कानून के अनुसार, ब्रांड कितना भी बड़ा क्यों न हो, सार्वजनिक स्वास्थ्य से समझौता करने पर कड़े दंडात्मक प्रावधान लागू होते हैं:
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सब-स्टैंडर्ड फूड (धारा 51): निर्धारित गुणवत्ता से कम स्तर का उत्पाद पाए जाने पर ₹5 लाख तक का जुर्माना।
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मिसब्रांडेड फूड (धारा 52): भ्रामक लेबलिंग और गलत पोषण दावों पर ₹3 लाख तक का अर्थदंड।
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असुरक्षित खाद्य पदार्थ (Unsafe Food – धारा 59): यदि भोजन मानव उपभोग के लिए असुरक्षित पाया जाता है, तो कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों को 6 महीने से लेकर आजीवन कारावास और ₹10 लाख तक के जुर्माने की सजा हो सकती है।
पैकेज्ड फूड और दैनिक दूध की खरीद करते समय उपभोक्ताओं को इन बातों की बारीकी से जांच करनी चाहिए:
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FSSAI लोगो और 14 अंकों का लाइसेंस नंबर: पैकेजिंग पर स्पष्ट रूप से एफएसएसएआई का लोगो और वैध लाइसेंस नंबर अनिवार्य रूप से लिखा होना चाहिए।
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पैकेट की सील और लीकेज: दूध या बिस्किट का पैकेट यदि ढीला, फूला हुआ (Puffed) या तैलीय रिसाव वाला लगे, तो उसे कतई न खरीदें।
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तारीखों का मिलान: मैन्युफैक्चरिंग डेट, बैच नंबर और ‘बेस्ट बिफोर’ तिथि में ओवरराइटिंग या अस्पष्टता होने पर तत्काल दुकानदार को सूचित करें।
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सीधी शिकायत दर्ज कराएं: यदि किसी भी ब्रांडेड उत्पाद में स्वाद, गंध या गुणवत्ता में असामान्यता महसूस होती है, तो उपभोक्ता FSSAI के आधिकारिक पोर्टल fssai.gov.in या ‘Food Safety Connect’ ऐप के जरिए सीधे बैच नंबर और फोटो अपलोड करके ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
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