
घरेलू उपभोक्ताओं के मासिक बजट में बिजली का बिल एक प्रमुख खर्च होता है। अक्सर जब सरकारें या बिजली कंपनियां 100 से 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली या भारी टैरिफ सब्सिडी की घोषणा करती हैं, तो उपभोक्ताओं के मन में बिल की अंतिम राशि को लेकर कई सवाल उठते हैं। बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड (BSPHCL)—जिसके अंतर्गत NBPDCL (नॉर्थ बिहार) और SBPDCL (साउथ बिहार) काम करती हैं—के घरेलू बिजली बिलिंग सिस्टम में सरकारी अनुदान (State Govt. Subsidy) और स्लैब स्ट्रक्चर की गणना कैसे की जाती है, इसे लेकर कई लोग भ्रमित रहते हैं। यदि आपकी मासिक खपत 125 यूनिट के आसपास है, तो यह समझना जरूरी है कि बिल शून्य कैसे हो सकता है या अतिरिक्त यूनिट्स पर किस दर से चार्ज लगता है।
बिहार में शहरी घरेलू श्रेणी (Domestic Service – II) के तहत बिजली खपत को मुख्य रूप से तीन स्लैब में बांटा जाता है:
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स्लैब 1 (1 से 100 यूनिट): इस प्राथमिक स्लैब में ऊर्जा शुल्क (Energy Charge) की मूल दर सामान्यतः लगभग ₹7.57 प्रति यूनिट निर्धारित होती है, जिस पर बिहार सरकार द्वारा लगभग ₹3.30 से ₹3.50 प्रति यूनिट की सीधी सब्सिडी दी जाती है। इस प्रकार उपभोक्ता को प्रभावी रूप से करीब ₹4.20 से ₹4.27 प्रति यूनिट ही चुकाना होता है।
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स्लैब 2 (101 से 200 यूनिट): इस दायरे में आने वाली खपत पर मूल दर लगभग ₹8.96 से ₹9.00 प्रति यूनिट होती है, जिस पर सरकार लगभग ₹3.30 प्रति यूनिट का अनुदान देती है, जिससे प्रभावी दर करीब ₹5.60 से ₹5.68 प्रति यूनिट पड़ती है।
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स्लैब 3 (200 यूनिट से अधिक): 200 यूनिट के पार जाने वाली हर अतिरिक्त यूनिट पर प्रभावी दर ₹6.00 प्रति यूनिट से अधिक हो जाती है।
यदि किसी महीने आपके मीटर में कुल 125 यूनिट की खपत दर्ज हुई है, तो बिजली कंपनी पूरे 125 यूनिट पर एक ही दर नहीं लगाती, बल्कि इसे स्लैब के अनुसार विभाजित करती है:
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पहले 100 यूनिट की गणना:
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अगले 25 यूनिट (101 से 125) की गणना:
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कुल ऊर्जा शुल्क (Energy Charges):
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₹427 + ₹142 = ₹569
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इसके अतिरिक्त, बिल में दो अन्य मुख्य घटक जुड़ते हैं:
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फिक्स्ड चार्ज (Fixed Charge): लोड के अनुसार (जैसे 1 kW पर ₹40 से ₹50 प्रति माह)।
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विद्युत शुल्क (Electricity Duty / Tax): ऊर्जा शुल्क पर निर्धारित राज्य कर (लगभग 6%)।
जब सरकार द्वारा 100 या 125 यूनिट तक विशेष राहत या शून्य बिल का प्रावधान लागू किया जाता है, तो बिल में दो कॉलम स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं:
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Gross Bill (कुल बिल राशि): इसमें बिना सब्सिडी की पूरी दर और फिक्स्ड चार्ज जोड़कर दिखाया जाता है।
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Government Relief / Subsidy (सरकारी सब्सिडी): ऊर्जा खपत की छूट राशि को घटा दिया जाता है।
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यदि खपत तय सीमा के भीतर है और संपूर्ण राहत योजना लागू है, तो नेट पेयबल अमाउंट (Net Payable Amount) शून्य या केवल न्यूनतम फिक्स्ड चार्ज के बराबर आता है।
उपभोक्ताओं में सबसे बड़ा कन्फ्यूजन यह रहता है कि क्या 125 यूनिट से अधिक खर्च होने पर पूरी छूट खत्म हो जाती है। टेलीस्कोपिक स्लैब (Telescopic Billing) प्रणाली के तहत:
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यदि आपकी खपत 130 यूनिट हो जाती है, तो पहले 100 यूनिट पर स्लैब 1 की रियायती दर लागू रहेगी।
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केवल ऊपर के 30 यूनिट पर ही स्लैब 2 की ऊंची दर लगेगी।
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हालांकि, यदि कोई योजना ‘शर्त-आधारित मुफ्त बिजली’ (जैसे केवल 125 यूनिट तक ही शत-प्रतिशत छूट) के तहत अधिसूचित होती है, तो सीमा पार करते ही अतिरिक्त यूनिट्स का भार पूरे बिल पर प्रभाव डाल सकता है। इसलिए हर महीने मीटर रीडिंग पर नजर रखना फायदेमंद रहता है।
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समय पर भुगतान पर छूट: BSPHCL द्वारा समय से पहले या ऑनलाइन (Suvidha App अथवा डिजिटल पेमेंट) बिल भरने पर 1% से 1.5% तक की अतिरिक्त समयबद्ध छूट (Rebate) दी जाती है।
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‘सुविधा’ (Suvidha) मोबाइल ऐप: उपभोक्ता गूगल प्ले स्टोर से BSPHCL का आधिकारिक ‘Suvidha App’ डाउनलोड करके हर महीने का बिल ब्रेकअप, स्लैब डिटेल और दैनिक खपत सीधे अपने मोबाइल पर ट्रैक कर सकते हैं।
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