
प्रकृति के रहस्यों की जब भी बात आती है, तो जीव-जंतुओं की शारीरिक क्षमताएं इंसानी समझ को दंग कर देती हैं। जब हम सांपों की कल्पना करते हैं, तो जमीन पर रेंगते, झाड़ियों में छिपते या पेड़ों की डालियों पर लिपटे जीव की तस्वीर सामने आती है। लेकिन क्या आप सोच सकते हैं कि कोई सांप बिना किसी पंख, झिल्ली या पैरों के 50 से 100 मीटर की ऊंचाई से छलांग लगाकर हवा में सैकड़ों फीट तक तैर सकता है? यह कोई काल्पनिक कहानी नहीं बल्कि हकीकत है। जंगलों में पाई जाने वाली ‘क्रिसोपेली’ (Chrysopelea) प्रजाति, जिसे दुनिया ‘फ्लाइंग स्नेक’ (Flying Snake) के नाम से जानती है, हवा में बिल्कुल किसी कुशल पैराग्लाइडर की तरह उड़ान भरती है। वैज्ञानिकों ने जब हाई-स्पीड कैमरों से इसके उड़ने की तकनीक को डिकोड किया, तो इसके पीछे का भौतिक विज्ञान और एरोडायनामिक्स देखकर दुनिया भर के शोधकर्ता भी हतप्रभ रह गए।
वैज्ञानिक दृष्टि से यह सांप पक्षियों की तरह अपने बल पर ऊपर की ओर उड़ान (Powered Flight) नहीं भरता, बल्कि यह गुरुत्वाकर्षण और वायु प्रतिरोध का इस्तेमाल करते हुए ‘ग्लाइडिंग’ (Gliding) करता है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि उड़ने वाली गिलहरी (Flying Squirrel) या चमगादड़ के पास त्वचा की विशेष झिल्ली (Patagium) होती है, जबकि इस सांप के पास ऐसा कुछ नहीं होता। इसके बावजूद यह इन चरणों में अपनी उड़ान पूरी करता है:
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‘J’ आकार में छलांग लगाना: उड़ान भरने से पहले सांप पेड़ की किसी ऊंची शाखा के सिरे पर जाता है। वहां यह अपने शरीर के अगले हिस्से को अंग्रेजी के ‘J’ अक्षर के आकार में मोड़ता है और स्प्रिंग की तरह अचानक उछलकर शून्य में छलांग लगा देता है।
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शरीर को ‘U’ आकार में चपटा करना: जैसे ही सांप हवा में आता है, वह अपनी पसलियों (Ribs) को दोनों तरफ चौड़ा कर लेता है। इससे उसका सामान्य गोल बेलनाकार शरीर नीचे से पूरी तरह चपटा (Flattened) और ऊपर से अर्धचंद्राकार या अवतल (U-Shaped / Concave) हो जाता है।
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प्राकृतिक पैराशूट और एरोफॉयल: शरीर को चपटा करते ही उसका निचला हिस्सा एक मिनी पैराशूट या हवाई जहाज के पंख (Aerofoil) की तरह काम करने लगता है। यह आकृति नीचे से आने वाली हवा को रोकती है (Air Resistance), जिससे सांप के गिरने की गति अचानक धीमी हो जाती है और उसे हवा में लिफ्ट (Lift) मिल जाती है।
हवा में गोता लगाते समय यह सांप बिल्कुल स्थिर नहीं रहता, बल्कि तेजी से अपने शरीर को दाएं और बाएं लहराता है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में ‘अंड्यूलेशन’ (Undulation) कहा जाता है।
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संतुलन और स्थिरता: हाई-स्पीड कैमरों से पता चला है कि हवा में शरीर को ‘S’ आकार में लहराने से सांप का संतुलन नहीं बिगड़ता और वह सीधा गिरकर चोटिल होने से बच जाता है।
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मिड-एयर टर्न (दिशा बदलना): सांप केवल सीधी रेखा में नहीं तैरता, बल्कि अपनी पूंछ और सिर के घुमाव से हवा के बीच में ही 90 डिग्री तक मुड़ सकता है। यदि उसे सामने कोई बाधा या शिकारी दिखता है, तो वह हवा में ही अपना रास्ता बदलकर किसी दूसरे पेड़ की सुरक्षित शाखा पर उतर जाता है।
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100 मीटर तक का सफर: यह सांप एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक 80 से 100 फीट (24 से 30 मीटर) और अनुकूल हवा मिलने पर इससे भी अधिक दूरी तक हवा में तैरकर आसानी से पहुंच जाता है।
फ्लाइंग स्नेक की कुल 5 प्रजातियां पहचानी गई हैं, जिनमें ‘पैराडाइज ट्री स्नेक’ (Chrysopelea paradisi) और ‘गोल्डन ट्री स्नेक’ (Chrysopelea ornata) सबसे प्रमुख हैं:
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प्राकृतिक आवास: यह प्रजाति मुख्य रूप से दक्षिण-पूर्व एशिया (थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, वियतनाम) के वर्षावनों के साथ-साथ भारत के पश्चिमी घाट (Western Ghats), पूर्वोत्तर राज्यों और श्रीलंका के घने जंगलों में पाई जाती है।
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जहर का स्तर: आम लोगों के लिए राहत की बात यह है कि यह सांप इंसानों के लिए जानलेवा नहीं होता। यह ‘माइल्डली वेनेमस’ (हल्का विषैला) और रियर-फैंग्ड (Rear-fanged) होता है। इसका हल्का विष केवल छिपकलियों, मेंढकों, चमगादड़ों और छोटे पक्षियों के शिकार के लिए ही असरदार होता है। इसके काटने से इंसानों में केवल मामूली सूजन या खुजली हो सकती है, जान का कोई खतरा नहीं रहता।
हवा में सांप की इस असाधारण ग्लाइडिंग क्षमता ने रोबोटिक्स और एयरोस्पेस इंजीनियरों को भी प्रेरित किया है। अमेरिकी रक्षा और अंतरिक्ष अनुसंधान से जुड़े वैज्ञानिक इस सांप की शारीरिक हलचलों का अध्ययन कर ऐसे बायो-इंस्पायर्ड ड्रोन्स और रोबोट्स तैयार कर रहे हैं, जो बिना बड़े पंखों के भी तंग जगहों (आपदा क्षेत्रों या जंगलों) में हवा में तैरकर जासूसी और रेस्क्यू ऑपरेशन कर सकें।
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