FDI नियमों में बड़ा बदलाव: 10% चीनी हिस्सेदारी वाली कंपनियों के लिए खुला ‘ऑटोमैटिक रूट’, जानें अब निवेश करना कितना आसान

भारत सरकार ने विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के नियमों में एक बड़ा और रणनीतिक बदलाव किया है. 1 मई 2026 से लागू हुए नए नियमों के तहत, उन विदेशी कंपनियों को बड़ी राहत मिली है जिनमें चीनी संस्थाओं की हिस्सेदारी सीमित है. वित्त मंत्रालय ने FEMA (फेमा) के तहत नए बदलावों का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है, जिसे केंद्रीय कैबिनेट ने इसी साल मार्च में हरी झंडी दी थी.

क्या है नया नियम और ‘प्रेस नोट 3’ में बदलाव?

DPIIT (उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग) के ‘प्रेस नोट 3’ में किए गए सुधारों के अनुसार, अब ऐसी विदेशी कंपनियां जिनमें चीन या हांगकांग की होल्डिंग 10 प्रतिशत या उससे कम है, वे भारत में बिना सरकारी मंजूरी के सीधे निवेश कर सकेंगी. यह छूट केवल उन सेक्टर्स के लिए है जहाँ पहले से ही ‘ऑटोमैटिक रूट’ (Automatic Route) के जरिए एफडीआई की अनुमति मिली हुई है.

हालांकि, सरकार ने सुरक्षा के लिहाज से एक स्पष्ट रेखा भी खींची है. यह ढील उन संस्थाओं पर लागू नहीं होगी जो सीधे तौर पर चीन, हांगकांग या भारत की सीमा से लगे किसी भी देश में रजिस्टर्ड हैं. इसके अलावा, आरबीआई (RBI) के नियमों के तहत निवेश की रिपोर्टिंग करना अनिवार्य बना रहेगा.

पहले की तुलना में अब क्या बदला?

नियमों में इस बदलाव से पहले की स्थिति काफी सख्त थी. पुराने नियमों के तहत, यदि भारत की सीमा से लगे किसी भी देश (जैसे चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश आदि) के शेयरहोल्डर के पास किसी विदेशी कंपनी का सिर्फ एक शेयर भी होता था, तो उस कंपनी को भारत में निवेश करने से पहले अनिवार्य रूप से सरकार से अनुमति लेनी पड़ती थी.

अब इस ‘एक शेयर’ वाले प्रतिबंध को हटाकर इसे ‘बेनेफिशियल ओनर्स’ (Beneficial Owners) पर केंद्रित कर दिया गया है. यानी जब तक चीन या सीमावर्ती देशों का मालिकाना हक एक तय सीमा (10%) से कम है, तब तक निवेश के रास्ते में सरकारी मंजूरी की बाधा नहीं आएगी.

किसे माना जाएगा ‘बेनेफिशियल ओनर’?

डिपार्टमेंट ऑफ इकनॉमिक अफेयर्स (DEA) के अनुसार, बेनेफिशियल ओनर की परिभाषा वही होगी जो मनी लांड्रिंग एक्ट (PMLA) में दी गई है. इसके तहत, अगर किसी कंपनी के शेयरों, कैपिटल या मुनाफे में किसी का 10% से अधिक हिस्सा है, तो उसे ‘कंट्रोलिंग ओनरशिप’ माना जाता है.

नोटिफिकेशन में यह भी साफ किया गया है कि यदि कोई मल्टीनेशनल बैंक या फंड (जिसमें भारत भी एक हिस्सेदार है) निवेश करता है, तो उसे किसी एक देश की इकाई नहीं माना जाएगा. इसका मतलब है कि ऐसे फंड्स के जरिए आने वाले निवेश को किसी विशेष देश का ‘बेनेफिशियल ओनर’ नहीं माना जाएगा, जिससे वैश्विक निवेश का प्रवाह सुगम होगा.

भारत में चीनी निवेश की वर्तमान स्थिति

आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत के कुल एफडीआई में चीन की हिस्सेदारी बहुत कम रही है. अप्रैल 2000 से दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, भारत में आए कुल एफडीआई इक्विटी निवेश में चीन का हिस्सा मात्र 0.32% ($251 करोड़) रहा है. इस सूची में चीन 23वें स्थान पर है. जानकारों का मानना है कि नए बदलावों से उन वैश्विक कंपनियों को भारत आने में आसानी होगी जिनके निवेश पोर्टफोलियो में चीनी फंड्स की छोटी हिस्सेदारी शामिल है.