
शादी-ब्याह, पार्टियों और त्योहारों के सीजन में यदि आप भी बाजार या डेरी से खुले पनीर की खरीदारी कर रहे हैं, तो बेहद सतर्क हो जाने की जरूरत है। स्वाद और प्रोटीन के नाम पर बाजार में आपकी थाली तक जानलेवा केमिकल्स और घटिया तत्वों से तैयार किया गया ‘जहरीला नकली पनीर’ (Synthetic / Fake Paneer) परोसा जा रहा है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की टीम ने एक गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी करते हुए खतरनाक व्हाइटनिंग एजेंट, पाम ऑयल, घटिया डिटर्जेंट और स्टार्च से तैयार किया जा रहा लगभग 1038 किलोग्राम नकली पनीर बरामद कर मौके पर ही नष्ट करवा दिया। इस बड़ी कार्रवाई के बाद मिलावटखोरों में हड़कंप मच गया है, वहीं प्रशासन ने आम जनता को पनीर खरीदते समय विशेष सावधानी बरतने की चेतावनी जारी की है।
व्हाइटनिंग एजेंट और पाम ऑयल का खेल: कैसे बनता है यह जहरीला पनीर?
छापेमारी के दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने जो खुलासा किया, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। मुनाफा कमाने के लिए मिलावटखोर बिना किसी असली दूध के केवल केमिकल फॉर्मूले पर पनीर तैयार कर रहे थे।
-
व्हाइटनिंग एजेंट और सिंथेटिक कलर: पनीर को एकदम चमकदार, सफेद और ताजा दिखाने के लिए उसमें खतरनाक केमिकल व्हाइटनिंग एजेंट मिलाए जा रहे थे, जिनका इस्तेमाल आमतौर पर पेंट या इंडस्ट्रियल ब्लीचिंग में होता है।
-
पाम ऑयल और रिफाइंड फैट: असली दूध की मलाई (फैट) के बजाय सस्ते पाम ऑयल और सिंथेटिक लिक्विड का इस्तेमाल फैट प्रतिशत बढ़ाने के लिए किया जा रहा था।
-
स्टार्च और यूरिया का मिश्रण: पनीर को भारी और ठोस रूप देने के लिए आरारोट (स्टार्च), डिटर्जेंट और यूरिया का गाढ़ा घोल बनाकर प्रोसेस किया जा रहा था।
सेहत पर पड़ता है गंभीर असर: कैंसर और लिवर फेलियर का खतरा
डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, केमिकल युक्त नकली पनीर का सेवन शरीर के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
-
इसमें मौजूद सिंथेटिक व्हाइटनर और डिटर्जेंट सीधे लिवर और किडनी को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे लिवर सिरोसिस या किडनी फेलियर का जोखिम बढ़ जाता है।
-
लगातार ऐसा मिलावटी पनीर खाने से पेट में गंभीर अल्सर, आंतों में सूजन और दीर्घकालिक रूप से पेट के कैंसर (Stomach Cancer) का खतरा हो सकता है।
-
बच्चों और बुजुर्गों में इसका सेवन अचानक फूड पॉइजनिंग, उल्टी और डायरिया का कारण बन सकता है।
घर पर असली और नकली पनीर की पहचान कैसे करें? (Simple Testing Hacks)
आम उपभोक्ता किचन में उपलब्ध कुछ आसान परीक्षणों के जरिए असली और नकली पनीर के बीच का फर्क आसानी से पहचान सकते हैं:
-
1. आयोडीन या टिंचर टेस्ट (Iodine Test for Starch): पनीर का एक छोटा सा टुकड़ा पानी में उबालकर ठंडा कर लें। अब उस पर 2 से 3 बूंद आयोडीन टिंचर की डालें। यदि पनीर का रंग नीला या काला पड़ जाए, तो समझ लें कि उसमें आरारोट या स्टार्च मिलाया गया है। असली पनीर का रंग नहीं बदलेगा।
-
2. हाथ से मसलने का परीक्षण (Texture Test): पनीर के टुकड़े को हथेली पर रखकर उंगलियों से मसलें। असली पनीर मलाईदार होगा और टूटते समय उसमें से चिकनाई महसूस होगी। वहीं नकली पनीर बिखरने लगेगा, चिपचिपा लगेगा या रबर जैसा खिंचेगा।
-
3. अरहर दाल / सोयाबीन पाउडर टेस्ट: उबले हुए पनीर के पानी में थोड़ी सी पिसी हुई अरहर की दाल या सोयाबीन का आटा डालें। 5 मिनट बाद यदि यह मिश्रण लाल होने लगे, तो इसका मतलब है कि पनीर में डिटर्जेंट या यूरिया की मिलावट की गई है।
-
4. गर्म पानी में उबालकर देखना: असली पनीर को गर्म पानी में डालने पर वह और अधिक मुलायम (Soft) हो जाता है, जबकि केमिकल से बना नकली पनीर रबर की तरह सख्त और खिंचने वाला हो जाता है।
प्रशासन की अपील: केवल रजिस्टर्ड और सीलबंद दुकानों से खरीदें
खाद्य विभाग के अधिकारियों ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अत्यधिक सस्ते दामों पर मिलने वाले खुले और लावारिस पनीर को खरीदने से बचें। हमेशा FSSAI से पंजीकृत डेरी या विश्वसनीय ब्रांड्स के पैक्ड पनीर को ही प्राथमिकता दें। यदि किसी दुकान पर पनीर की गुणवत्ता को लेकर संदेह हो, तो तुरंत खाद्य सुरक्षा विभाग के टोल-फ्री नंबर या ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
girls globe