Explainer: E20 पेट्रोल के बाद क्या CNG में भी मिलावट! क्या है नई गोबरधन स्कीम, कैसे गोबर-पराली से चलेंगी गाड़ियां? क्या है सरकार का महाप्लान

पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग (E20) का लक्ष्य हासिल करने के बाद अब केंद्र सरकार ने देश के गैस नेटवर्क में एक बड़ा हरित बदलाव करने की तैयारी कर ली है। सरकार ने कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) और घरों में सप्लाई होने वाली पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) में कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG / Bio-CNG) का मिश्रण करने का फैसला किया है। इस महाप्लान को जमीन पर उतारने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने ₹23,731 करोड़ के बजट के साथ ‘गोबरधन (GOBARdhan) – नेशनल सर्कुलर बायोएनर्जी स्कीम’ को मंजूरी दी है। 10 साल (वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36) तक चलने वाली इस योजना का लक्ष्य देश में घरेलू बायोगैस उत्पादन को लगभग 10 गुना तक बढ़ाना है।

1. क्या सीएनजी में होगी मिलावट? ब्लेंडिंग का पूरा टाइमलाइन नियम

इसे आम भाषा में भले ही मिलावट कहा जाए, लेकिन वैज्ञानिक और तकनीकी रूप से यह ‘सीबीजी ब्लेंडिंग ऑब्लिगेशन’ (CBG Blending Obligation) है। सरकार ने सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियों के लिए प्राकृतिक सीएनजी में बायो-सीएनजी मिलाना अनिवार्य करने का चरणबद्ध रोडमैप बनाया है:

  • वित्त वर्ष 2026-27: 3 प्रतिशत बायो-सीएनजी की अनिवार्य ब्लेंडिंग

  • वित्त वर्ष 2027-28: 4 प्रतिशत बायो-सीएनजी ब्लेंडिंग

  • वित्त वर्ष 2028-29 से आगे: 5 प्रतिशत या उससे अधिक बायो-सीएनजी ब्लेंडिंग

2. कैसे गोबर, पराली और गीले कचरे से तैयार होगी बायो-सीएनजी?

बायो-सीएनजी को पूरी तरह से जैविक कचरे (Organic Waste) से तैयार किया जाता है।

  1. कच्चा माल (Feedstock): इसमें पशुओं का गोबर, खेतों की पराली (फसल अवशेष), चीनी मिलों का प्रेसमड (Press Mud) और नगर निगम का ऑर्गेनिक कचरा इस्तेमाल होता है।

  2. प्रोसेसिंग और प्यूरिफिकेशन: ऑक्सीजन रहित एनारोबिक डाइजेशन (Anaerobic Digestion) तकनीक के जरिए इस कचरे से बायोगैस बनाई जाती है। इसके बाद गैस को प्रोसेस करके उसमें से कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य अशुद्धियां बाहर निकाल दी जाती हैं।

  3. 90% मीथेन कंटेंट: रिफाइन होने के बाद इसमें 90 से 95 प्रतिशत से अधिक शुद्ध मीथेन (CH4) बचती है। रासायनिक संरचना के मामले में यह गैस ज़मीन के नीचे से निकलने वाली रेगुलर सीएनजी के 99% समान (Chemically Identical) होती है।

3. आपकी सीएनजी कार पर क्या पड़ेगा असर? (इंजन, माइलेज और मेंटेनेंस)

पेट्रोल में इथेनॉल (E20) मिलाए जाने पर कार चालकों को रबर पार्ट्स खराब होने और इंजन कंपैटिबिलिटी की चिंताएं झेलनी पड़ी थीं। लेकिन बायो-सीएनजी (CBG) के मामले में ऐसी कोई समस्या नहीं आएगी:

  • इंजन को कोई नुकसान नहीं: चूंकि रिफाइंड बायो-सीएनजी का रासायनिक ढांचा प्राकृतिक सीएनजी जैसा ही होता है, इसलिए यह कार के इंजन, पाइप या फ्यूल इंजेक्टर को बिल्कुल नुकसान नहीं पहुंचाती।

  • किसी बदलाव की जरूरत नहीं: आपको अपनी सीएनजी किट, टैंक या कार के हार्डवेयर में किसी भी प्रकार के ट्यूनिंग या बदलाव की आवश्यकता नहीं है।

  • माइलेज और पिकअप सेम रहेगा: बायोगैस की ऊर्जा क्षमता (Calorific Value) प्राकृतिक गैस के बराबर होती है, जिससे आपकी कार के माइलेज और पिकअप पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।

4. ₹23,731 करोड़ की नई ‘गोबरधन’ स्कीम के प्रमुख 6 पिलर

सरकार का उद्देश्य निजी कंपनियों और ग्रामीण उद्यमियों को बायोगैस प्लांट लगाने के लिए प्रेरित करना है। इसके मुख्य बिंदु हैं:

  • खरीद की 100% गारंटी (Assured Offtake): गैस कंपनियों को प्लांट से बनने वाली पूरी सीबीजी गैस खरीदनी होगी।

  • फिक्स्ड सेलिंग प्राइस: बायोगैस उत्पादकों को 10 सालों तक ₹2,110 प्रति MMBTU का फिक्स्ड रेट मिलेगा, जिससे बिजनेस रिस्क खत्म हो जाएगा।

  • कैपिटल सब्सिडी: नए बायोगैस प्लांट (Greenfield Projects) के लिए प्रति टन क्षमता पर ₹2 करोड़ तक की सरकारी सब्सिडी दी जाएगी।

  • पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर: प्लांट को मुख्य सीएनजी पाइपलाइन से जोड़ने का पूरा खर्च और ढांचा सरकार व गैस नेटवर्क कंपनियां मिलकर विकसित करेंगी।

5. देश, किसान और पर्यावरण को मिलने वाला बड़ा फायदा

भारत वर्तमान में अपनी जरूरत की 50 प्रतिशत से अधिक नेचुरल गैस विदेश से आयात करता है। यह महाप्लान विदेशी मुद्रा की बचत करने में मदद करेगा। इसके अलावा, किसान खेतों में पराली जलाने के बजाय उसे बायोगैस प्लांट को बेचकर अतिरिक्त कमाई कर सकेंगे। सर्दियों में वायु प्रदूषण (Smog) से राहत मिलेगी और बायोगैस बनने के बाद बचे हुए अवशेषों से देश में उच्च गुणवत्ता वाली ऑर्गेनिक (जैविक) खाद का उत्पादन भी तेजी से बढ़ेगा।