
जून के महीने में मानसून की सुस्त पड़ती रफ्तार के बीच भारतीय कृषि क्षेत्र पर अल-नीनो (El-Nino) का खौफनाक साया मंडराने लगा है। उत्तर प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र तक देश के 12 प्रमुख राज्यों पर इसका सबसे गंभीर और प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इस संभावित कृषि संकट से निपटने और खरीफ फसलों (Kharif Crops) को सूखे की मार से बचाने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्रालय पूरी तरह सतर्क हो गया है।
इस बीच, केंद्रीय कृषि सचिव अतीष चंद्रा ने न्यूज एजेंसी पीटीआई (PTI) को दिए एक विशेष इंटरव्यू में बताया कि केंद्र सरकार जून 2026 के अंत में आने वाले भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के नए और विस्तृत पूर्वानुमान का इंतजार कर रही है। इस अंतिम रिपोर्ट के बाद ही अल-नीनो के दाखिल होने की सटीक टाइमलाइन साफ होगी, जिसके आधार पर मंत्रालय अपनी अंतिम रणनीतिक योजनाओं पर मुहर लगाएगा।
यूपी से महाराष्ट्र तक: अल-नीनो की रडार पर आए ये 12 प्रभावित राज्य
कृषि मंत्रालय ने मुख्य रूप से ‘वर्षा-आधारित खेती’ (Rain-fed Agriculture) पर निर्भर रहने वाले देश के उन 12 राज्यों की पहचान की है, जहां अल-नीनो के कारण सूखे या बेहद कम बारिश का सबसे घातक असर देखने को मिल सकता है। इन राज्यों की सूची निम्नलिखित है:
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उत्तर प्रदेश
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बिहार
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झारखंड
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मध्य प्रदेश
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महाराष्ट्र
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राजस्थान
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गुजरात
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ओडिशा
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आंध्र प्रदेश
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तेलंगाना
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कर्नाटक
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तमिलनाडु
326 जिले हाई-रिस्क पर; तैयार हो रहा है स्पेशल ‘कंटिंजेंसी प्लान’
कृषि सचिव अतीष चंद्रा के मुताबिक, इन 12 प्रभावित राज्यों के भीतर आने वाले 326 जिलों को ‘हाई-रिस्क’ (अत्यंत संवेदनशील) जोन के रूप में चिह्नित किया गया है। इन सभी जिलों के लिए विशेष जिला-स्तरीय कृषि कार्य योजनाओं (District-level Action Plans) को युद्ध स्तर पर अपडेट किया जा रहा है।
मौसम के इस गंभीर पूर्वानुमान को देखते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), केंद्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान (CRIDA) और विभिन्न राज्यों के कृषि विश्वविद्यालयों के सक्रिय सहयोग से आकस्मिक योजनाओं (Contingency Plans) में जरूरी तकनीकी बदलाव किए जा रहे हैं। वर्षा आधारित क्षेत्रों में उगाई जाने वाली प्रमुख नकदी और खाद्य फसलें—जैसे तिलहन, ऑयल पाम, दलहन (दालें) और कपास (कॉटन) के राष्ट्रीय मिशनों की गहन समीक्षा की जा रही है, ताकि कम पानी में भी फसलों को बचाया जा सके।
IMD का जून एंड फोरकास्ट: बुवाई के चरम पर साफ होगी तस्वीर
कृषि सचिव ने साफ किया कि अल-नीनो के भारत में सक्रिय होने की सटीक टाइमलाइन को लेकर अभी अंतिम वैज्ञानिक निष्कर्ष आना बाकी है। आईएमडी (IMD) इस जून के अंत तक अपना नया और व्यापक बुलेटिन जारी करेगा। तब तक देश में खरीफ की बुवाई का सीजन अपने चरम (Peak) पर होगा, जिससे यह सटीक मूल्यांकन करने में आसानी होगी कि यह सीजन आगे कैसा रहने वाला है।
अब तक के व्यापक अनुमानों के अनुसार, प्रशांत महासागर में अल-नीनो के नवंबर 2026 के आसपास पूरी तरह सक्रिय होने की बात कही गई है, लेकिन मौसम विभाग अपनी अंतिम रिपोर्ट जारी करने से पहले डेटा में अधिक सटीकता और निश्चितता की तलाश में है।
मानसून ट्रैकर: तय समय से 4 से 5 दिन की देरी से चल रही है रफ्तार
मौसम विभाग ने जून से सितंबर की चार महीने की अवधि के लिए दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) के दीर्घकालिक औसत (LPA) के लगभग 90 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है, जो सीधे तौर पर सामान्य से कम बारिश के सीजन का संकेत देता है। वर्तमान में मानसून अपनी तय समय-सारणी से 4 से 5 दिन पीछे चल रहा है।
प्रगति में बाधा की मुख्य वजह: उत्तर भारत में लगातार सक्रिय एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) को मानसून की आगे की रफ्तार में बड़ी बाधा माना जा रहा है। हालांकि, पश्चिम बंगाल के ऊपर बन रहे एक कम दबाव के क्षेत्र (Low Pressure Area) के कारण मानसून पूरब की ओर से तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन इसकी दक्षिणी शाखा जो महाराष्ट्र और मध्य भारत को कवर करने वाली थी, वह अभी भी अपने तय समय से पीछे चल रही है। कृषि सचिव ने बताया कि तमिलनाडु को छोड़कर (जहां मुख्य रूप से लौटते मानसून यानी उत्तर-पूर्वी मानसून से बारिश होती है) जिन राज्यों में मानसून दस्तक दे चुका है, वहां अब तक अच्छी बारिश दर्ज की गई है।
IOD का न्यूट्रल होना बढ़ा रहा है अर्थशास्त्रियों की चिंता
भारतीय मानसून पर अल-नीनो के असर को तय करने में ‘हिंद महासागर द्विध्रुव’ (Indian Ocean Dipole – IOD) की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण और निर्णायक होती है। मई के महीने में सकारात्मक (Positive) रहने के बाद, जून में आकर IOD पूरी तरह न्यूट्रल (तटस्थ) हो गया है, जिसने कृषि मंत्रालय की चिंता बढ़ा दी है।
आमतौर पर, एक पॉजिटिव IOD अल-नीनो के बुरे और सूखे वाले प्रभाव को पूरी तरह बेअसर कर देता है और भारत में अच्छी बारिश कराता है। लेकिन IOD के न्यूट्रल या नेगेटिव होने पर अल-नीनो भारतीय मानसून को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। हालांकि, आईएमडी के वैज्ञानिक अभी भी आशान्वित हैं कि आगामी दिनों में समुद्र के तापमान में कुछ ऐसे सकारात्मक बदलाव होंगे जो अल-नीनो के प्रभाव को कम कर देंगे।
सरकार की मुस्तैदी: खाद, उन्नत बीज और पानी का बफर स्टॉक तैयार
कृषि सचिव ने देश के अन्नदाताओं को आश्वस्त करते हुए कहा कि अल-नीनो की खबरों से पैनिक होने या घबराने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। इतिहास गवाह है कि सिर्फ साल 2014-15 के स्ट्रॉन्ग अल-नीनो को छोड़कर, यह मौसमी घटना भारत को कभी भी बहुत गंभीर रूप से नुकसान नहीं पहुंचा पाई है और उस सूखे वाले साल में भी देश का कुल कृषि उत्पादन मजबूत रहा था।
भारत की मजबूत जमीनी तैयारी:
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क्लाइमेट-स्मार्ट बीज: आज भारत के पास जलवायु-अनुकूल (Climate-Resilient) और कम पानी में पकने वाले बीजों की उन्नत किस्में प्रचुर मात्रा में मौजूद हैं।
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जलाशयों का बेहतर स्तर: देश के प्रमुख बांधों और जलाशयों में पानी का वर्तमान स्तर पिछले साल की तुलना में काफी बेहतर है। केवल बिना सिंचाई वाले (Non-irrigated) क्षेत्र ही चिंता का विषय हैं, जबकि सिंचित क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित हैं।
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अमृत सरोवर योजना: भूजल स्तर (Groundwater Level) को रिचार्ज करने के लिए सरकार ने अमृत सरोवर योजना के तहत देश भर में 75,000 से अधिक तालाबों का जीर्णोद्धार किया है और 1 लाख से अधिक वाटर रिचार्ज स्ट्रक्चर्स को पुनर्जीवित किया है।
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फर्टिलाइजर बैकअप: देश में यूरिया और डीएपी सहित सभी प्रमुख उर्वरकों (Fertilizers) की आपूर्ति पर्याप्त है। बड़े किसानों ने मार्च और अप्रैल की शुरुआत में ही अपना अग्रिम स्टॉक खरीद लिया था, जबकि छोटे किसान जरूरत के वक्त सोसायटियों से खाद ले रहे हैं। जमीन पर खाद की उपलब्धता पिछले साल की तुलना में काफी सुगम है।
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