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ECINet विवाद पर चुनाव आयोग की दो टूक: संधू और जोशी के पत्रों पर दी सफाई, IIT-IIIT विशेषज्ञों की कमेटी करेगी तकनीकी समीक्षा

नई दिल्ली। भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के भीतर आंतरिक कार्यप्रणाली, स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) और केंद्रीय आईटी पोर्टल ‘ECINet’ को लेकर सामने आई खबरों के बाद चुनाव आयोग ने आधिकारिक रुख स्पष्ट किया है। चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लिखे गए पत्रों और नोटिंग्स के सार्वजनिक होने के बाद आयोग ने एक विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है। आयोग ने दो टूक शब्दों में कहा कि निर्णय प्रक्रिया के दौरान विभिन्न दृष्टिकोण और असहमति किसी भी बहु-सदस्यीय संस्था की स्वस्थ एवं जीवंत कार्यशैली का प्रमाण हैं, न कि कोई संवैधानिक गतिरोध। इसके साथ ही आयोग ने विवादों के केंद्र में रहे ‘ECINet’ सिस्टम और आईटी बुनियादी ढांचे की कानूनी व तकनीकी समीक्षा के लिए आईआईटी (IIT) और ट्रिपल आईटी (IIIT) के शीर्ष विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का आदेश दिया है।

हाल ही में मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने पिछले कुछ महीनों में कम से कम 14 अलग-अलग अवसरों पर मतदाता सूची संशोधन (SIR), मतदाता पहचान पत्र प्रबंधन और आईटी निर्णयों की केंद्रीकृत प्रक्रिया पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इस खुलासे के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और स्वायत्तता पर तीखे सवाल खड़े कर दिए थे।

चुनाव आयोग द्वारा जारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि आयोग के आंतरिक विचार-विमर्श और अंतिम निर्णयों के बीच के अंतर को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है:

  • बहु-सदस्यीय आयोग की परंपरा: आयोग ने कहा कि भारत का निर्वाचन आयोग एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक निकाय है, जहां तीनों आयुक्त—मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्त—समान वैधानिक अधिकार रखते हैं। फाइलों पर विभिन्न पहलुओं पर प्रश्न उठाना, विस्तृत जानकारी मांगना और वैकल्पिक विचार रखना लोकतांत्रिक विचार-विमर्श का स्वाभाविक हिस्सा है।

  • SIR पर सर्वसम्मत फैसला: आयोग ने जोर देकर स्पष्ट किया कि 24 जून 2025 को पूरे देश में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) कराने का फैसला पूर्ण पीठ की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया था। बाद में इस प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट ने भी 27 मई 2026 के अपने ऐतिहासिक फैसले में संवैधानिक रूप से वैध और त्रुटिहीन माना था।

  • कैबिनेट सचिव से जुड़े पत्राचार पर सफाई: आयोग ने स्पष्ट किया कि कैबिनेट सचिव को लिखा गया पत्र आयोग की किसी आईटी नीति या सामान्य कामकाज से संबंधित नहीं था, बल्कि वह केवल प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर तैनात एक विशेष अधिकारी के प्रशासनिक दायित्वों से जुड़ा एक व्यक्तिगत संदर्भ था।

विवादों की जड़ रहे चुनाव आयोग के मुख्य तकनीकी प्लेटफॉर्म ‘ECINet’ की कार्यप्रणाली, डाटा सुरक्षा और चुनावी नियमों के सख्त अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने ठोस कदम उठाए हैं:

  • वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता में समिति: एक वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त (DEC) की अगुवाई में एक विशेष स्वतंत्र तकनीकी मूल्यांकन समिति का गठन किया गया है।

  • प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल: इस समिति में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) और भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) के जाने-माने कंप्यूटर साइंस व साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों को शामिल किया गया है।

  • ऑडिट का मुख्य दायरा: यह समिति परीक्षण करेगी कि क्या ECINet पर मतदाताओं के नाम जोड़ने, हटाने और ट्रांसफर करने की प्रक्रिया जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के कड़े कानूनी प्रावधानों के अनुरूप काम कर रही है।

  • नए आईटी प्रोजेक्ट्स पर सख्त प्रक्रिया: आयोग ने तय किया है कि भविष्य में कोई भी नया तकनीकी मॉड्यूल या सॉफ्टवेयर अपडेट सीधे लागू नहीं होगा। पहले उसे अधिकारियों की समिति (Committee of Officers – COO) में तकनीकी रूप से परखा जाएगा और उसके बाद आयोग की पूर्ण पीठ की औपचारिक मंजूरी मिलने पर ही सक्रिय किया जाएगा।

आयोग ने आंतरिक कार्यप्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए व्यवस्थागत सुधारों की भी घोषणा की है:

  1. बैठकों का एजेंडा पहले से तय: आयोग की किसी भी बैठक से पहले उसका लिखित एजेंडा अग्रिम रूप से प्रसारित किया जाएगा ताकि सभी सदस्य पूरी तैयारी के साथ विमर्श में शामिल हो सकें।

  2. बैठकों के कार्यवृत्त (Minutes) जारी होंगे: बैठकों में हुई चर्चाओं और निर्णयों के आधिकारिक मिनट्स तैयार कर रिकॉर्ड पर रखे जाएंगे।

  3. विदेश यात्रा पर पूर्व मंजूरी: चुनाव आयोग के किसी भी स्तर के अधिकारी को आधिकारिक विदेश दौरे पर जाने से पहले आयोग से अनिवार्य रूप से पूर्व अनुमति लेनी होगी।

  4. आयुक्तों के निर्देशों की निगरानी: आयुक्तों द्वारा जारी प्रशासनिक निर्देशों के अनुपालन की नियमित समीक्षा की जाएगी।

  5. प्रदर्शन मूल्यांकन की समय-सीमा: अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (APAR) को हर साल 31 दिसंबर तक अनिवार्य रूप से पूरा करने की अंतिम तिथि तय कर दी गई है।

चुनाव आयोग का मानना है कि इन स्वतंत्र समीक्षाओं और प्रशासनिक सुधारों से जहां तकनीकी प्रणालियों की दक्षता कई गुना बढ़ जाएगी, वहीं चुनावी प्रक्रिया की शुचिता, निष्पक्षता और पारदर्शिता पर देश के नागरिकों का अटूट विश्वास और अधिक सुदृढ़ होगा।