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Durga Puja 2026: बिहार में छाई दुर्गा पूजा की भव्य तैयारी की रौनक

शारदीय नवरात्र और महापर्व दुर्गा पूजा के आगमन से पहले ही पूरे बिहार में उत्सव, उमंग और आध्यात्मिक ऊर्जा का माहौल पूरी तरह से परवान चढ़ने लगा है। राजधानी पटना से लेकर सूबे के तमाम जिलों में भव्य पूजा पंडालों के निर्माण और मां दुर्गा की मनमोहक प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने का काम युद्ध स्तर पर शुरू हो चुका है। जैसे-जैसे महाषष्ठी की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे बाजारों में खरीदारों की भीड़ और सड़कों पर रोशनी की सजावट देखते ही बन रही है। हालांकि इस बार के आयोजनों को लेकर प्रशासन ने अपनी तरफ से कमर कस ली है और सुरक्षा के मोर्चे पर बेहद कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। खासकर राजधानी पटना में कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा और भीड़भाड़ को नियंत्रित करने के लिए लगभग 900 बड़े पूजा पंडालों में 24 घंटे काम करने वाले सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। इस विशेष रिपोर्ट में आइए विस्तार से जानते हैं कि इस बार बिहार में दुर्गा पूजा की तैयारियां किस तरह चल रही हैं और प्रशासन की नई गाइडलाइंस के क्या मायने हैं।

पटना के 900 बड़े पंडालों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम और सीसीटीवी की अनिवार्यता

बिहार की राजधानी पटना में दुर्गा पूजा के दौरान हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु अलग-अलग ऐतिहासिक और भव्य पंडालों का दर्शन करने के लिए निकलते हैं। डाकबंगला चौराहा, बोरिंग रोड, फ्रेजर रोड, राजा बाजार और कंकड़बाग जैसे प्रमुख इलाकों में बनने वाले थीम आधारित विशाल पंडाल देश भर में अपनी अनूठी कला के लिए जाने जाते हैं। सुरक्षा और सुगमता को सर्वोपरि रखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने संयुक्त रूप से यह निर्देश जारी किया है कि शहर के सभी 900 से अधिक बड़े पूजा पंडालों में सीसीटीवी कैमरे लगाने होंगे, जो हर गतिविधि पर पैनी नजर रखेंगे। इसके साथ ही समितियों को अपने वालंटियर्स (स्वयंसेवकों) की तैनाती आई-कार्ड के साथ करने को कहा गया है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति या मनचलों पर तुरंत शिकंजा कसा जा सके।

प्रशासनिक गाइडलाइन: पंडालों की ऊंचाई तय और डीजे पर पूर्ण प्रतिबंध

सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरण और प्रशासनिक नियमों का पालन कराने के लिए सरकार ने इस बार कई सख्त और अहम कदम उठाए हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के नियमों का हवाला देते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी पूजा पंडाल की अधिकतम ऊंचाई और मूर्तियों के आकार को एक तय सीमा के भीतर ही रखना होगा। इसके अलावा, मूर्तियों के निर्माण में पर्यावरण के प्रतिकूल प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) और रासायनिक रंगों के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। सबसे बड़ा फैसला यह लिया गया है कि पंडाल परिसरों और विसर्जन जुलूस के दौरान डीजे (DJ) के इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा, ताकि ध्वनि प्रदूषण और हुड़दंग पर लगाम कस सके। बिजली सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा निगम (PESU) ने भी सभी समितियों को वैध और अस्थायी कनेक्शन लेने तथा गुणवत्तापूर्ण वायरिंग करने के निर्देश दिए हैं।

गंगा नदी के संरक्षण को लेकर प्रशासन का सख्त रुख, कृत्रिम तालाबों का होगा निर्माण

दुर्गा पूजा के दौरान प्रतिमा विसर्जन को लेकर हर साल पर्यावरण और नदियों की स्वच्छता को लेकर चिंता जताई जाती रही है। इसे ध्यान में रखते हुए इस बार प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी स्थिति में मुख्य गंगा नदी के भीतर मूर्तियों का विसर्जन करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके विकल्प के रूप में नगर निगम और स्थानीय प्रशासन द्वारा विभिन्न घाटों के पास बड़े और सुरक्षित कृत्रिम तालाबों (Artificial Ponds) का निर्माण कराया जा रहा है, जहां सभी पूजा समितियां पूरी आस्था और अनुशासित तरीके से मां की प्रतिमाओं का विसर्जन संपन्न कर सकेंगी। इस कदम से जहां एक तरफ धार्मिक परंपराओं का पालन सुरक्षित तरीके से हो सकेगा, वहीं दूसरी तरफ पवित्र गंगा नदी को प्रदूषण से बचाने में भी बड़ी मदद मिलेगी।

जन-उत्साह और प्रशासनिक सतर्कता के बीच ऐतिहासिक उत्सव बनने की उम्मीद

बिहार में दुर्गा पूजा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह आपसी भाईचारे, संस्कृति और सामाजिक सौहार्द का एक ऐसा महाकुंभ है जिसमें हर वर्ग और धर्म के लोग शामिल होते हैं। पंडालों की थीम, आकर्षक विद्युत सज्जा और मां के जयकारों से गूंजती सड़कें अभी से ही इस बात की गवाही दे रही हैं कि इस वर्ष का यह उत्सव पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ने वाला है। एक तरफ जहां पूजा समितियां अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासन की यह चौकसी और कड़े नियम इस बात की गारंटी दे रहे हैं कि इस बार का महापर्व पूरी तरह से शांतिपूर्ण, सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न होगा। माता के जयकारों और ढोल-बाजे की थाप के साथ बिहार की यह पावन धरा एक बार फिर से भक्ति के रंग में सराबोर होने के लिए पूरी तरह तैयार है।