
देश भर में सिंथेटिक और पार्टी ड्रग्स के बढ़ते जाल पर लगाम लगाने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्रालय के तहत कार्यरत राजस्व खुफिया महानिदेशालय (DRI) ने एक साथ दो बड़े और सटीक ऑपरेशनों को अंजाम दिया है। खुफिया इनपुट्स के आधार पर डीआरआई की विशेष टीमों ने कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु और महाराष्ट्र के प्रमुख शहर पुणे में रणनीतिक छापेमारी करते हुए 18 किलोग्राम से अधिक उच्च गुणवत्ता वाले एम्फैटेमिन (Amphetamine) और एमडीएमए (MDMA) को जब्त करने में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है।
इस पूरी कार्रवाई के दौरान दिल्ली से प्रतिबंधित नशीली दवाओं की खेप लेकर ट्रेनों से सफर कर रहीं दो महिला कैरियर्स सहित कुल चार शातिर आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय ड्रग तस्कर अब हवाई अड्डों और सड़क मार्गों की सख्त निगरानी से बचने के लिए भारतीय रेलवे के विशाल नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे थे। दिल्ली-एनसीआर से दक्षिण और पश्चिम भारत के पब-क्लब और हाई-प्रोफाइल पार्टी सर्किलों में इन जानलेवा सिंथेटिक ड्रग्स की आपूर्ति करने की यह पूरी साजिश डीआरआई की मुस्तैदी से नाकाम हो गई।
डीआरआई मुख्यालय को सटीक खुफिया सूचना मिली थी कि राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली से बेंगलुरु जाने वाली एक एक्सप्रेस ट्रेन के जरिए मादक पदार्थों की एक बहुत बड़ी खेप पहुंचाई जा रही है। इसके बाद डीआरआई बेंगलुरु जोनल यूनिट के अधिकारियों ने क्रांतिवीर संगोली रायण्णा (KSR) बेंगलुरु सिटी रेलवे स्टेशन पर घेराबंदी कर ली।
जैसे ही ट्रेन प्लेटफॉर्म पर आकर रुकी, अधिकारियों ने संदिग्ध महिला यात्री को रोककर हिरासत में ले लिया। जब उसके सामान की सघन तलाशी ली गई, तो उसके बैग से सफेद-पीले रंग के क्रिस्टलीय पाउडर वाले सात बड़े पैकेट बरामद हुए। अधिकारियों ने मौके पर ही फील्ड ड्रग डिटेक्शन किट (Field Drug Detection Kit) के जरिए रासायनिक परीक्षण किया, जिसमें प्रतिबंधित नारकोटिक पदार्थ ‘एम्फैटेमिन’ (Amphetamine) की पुष्टि हुई। बेंगलुरु स्टेशन से बरामद की गई इस खेप का कुल वजन लगभग 14.9 किलोग्राम निकला।
डीआरआई ने केवल महिला तस्कर की गिरफ्तारी तक ही इस ऑपरेशन को सीमित नहीं रखा, बल्कि पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने के लिए तुरंत एक ‘कंट्रोल्ड डिलीवरी’ (Controlled Delivery) ऑपरेशन शुरू किया। इसके तहत महिला कैरियर को उसी तरह आगे बढ़ने दिया गया जैसे वह सामान्य दिनों में डिलीवरी देने जाती थी।
तय डिलीवरी लोकेशन पर डीआरआई की टीम ने सादे कपड़ों में पोजीशन ली। जैसे ही बेंगलुरु का स्थानीय रिसीवर खेप लेने के लिए मौके पर पहुंचा, उसे तत्काल दबोच लिया गया। उससे की गई त्वरित पूछताछ के आधार पर एक और कड़ी का खुलासा हुआ और टीम ने आगे बढ़कर उस तीसरे व्यक्ति को भी गिरफ्तार कर लिया, जो इस पूरे स्टॉक को आगे शहर के विभिन्न सब-डीलरों और पार्टियों में बांटने का काम संभालने वाला था। इस तरह बेंगलुरु में तस्करी, परिवहन और माल रिसीव करने वाले तीनों मुख्य आरोपियों को एनडीपीएस अधिनियम (NDPS Act, 1985) के तहत सलाखों के पीछे भेज दिया गया।
उसी दिन डीआरआई ने महाराष्ट्र के पुणे रेलवे स्टेशन पर एक अन्य स्वतंत्र लेकिन समान खुफिया सूचना पर दूसरा प्रहार किया। अधिकारियों की टीम ने दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से ट्रेन के जरिए पुणे जंक्शन पहुंची एक अन्य भारतीय महिला यात्री को इंटरसेप्ट किया।
महिला यात्री के सामान की गहन पड़ताल के दौरान जांच अधिकारियों को दो अलग-अलग प्रकार की सिंथेटिक ड्रग्स मिलीं:
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2.53 किलोग्राम एम्फैटेमिन: बैग के अंदर गुप्त कंपार्टमेंट में छिपाकर रखा गया उच्च श्रेणी का क्रिस्टलीय एम्फैटेमिन बरामद हुआ।
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878 ग्राम एमडीएमए टेबलेट्स: इसके साथ ही 3,4-मिथाइलीनडाइऑक्सीमेथामफेटामाइन (MDMA) की 878 ग्राम वजनी सैकड़ों गोलियां (Ecstasy Tablets) भी जब्त की गईं।
पुणे में पकड़ी गई महिला आरोपी को भी नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी के आरोप में गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया। दोनों शहरों की कुल जब्ती को मिलाकर देखा जाए तो डीआरआई ने एक ही दिन में 18.3 किलोग्राम से अधिक खतरनाक सिंथेटिक ड्रग्स को खुले बाजार में जाने से रोक दिया।
डीआरआई की इस दोहरी सफलता ने तस्करों के उस नए तौर-तरीके (Modus Operandi) की कलई खोल दी है, जिसमें महिलाएं कुरियर या कैरियर के रूप में काम कर रही हैं। हवाई अड्डों पर लगे 3D एक्स-रे स्कैनर्स, बॉडी स्कैनर्स और सीआईएसएफ की पैनी निगाहों के कारण तस्कर लंबी दूरी की सुपरफास्ट और राजधानी-दुरंतो ट्रेनों को सुरक्षित जरिया मान रहे थे।
शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि यह पूरा सिंडिकेट दिल्ली-एनसीआर और सीमावर्ती इलाकों में स्थित भूमिगत सिंथेटिक लैब्स से माल तैयार कर रहा था या अवैध प्रीकर्सर केमिकल्स के जरिए इसे प्रोसेस किया जा रहा था। इसके बाद कम वजन के पैकेट्स में इसे महिलाओं के पर्स, ट्रॉली बैग के इनर लाइनिंग और कपड़ों के बीच छिपाकर मेट्रो शहरों जैसे बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद और मुंबई के कॉलेजों, आईटी प्रोफेशनल्स और क्लब कल्चर वाले इलाकों में भारी मुनाफे पर खपाने की योजना थी।
राजस्व खुफिया महानिदेशालय की यह कार्रवाई किसी एक शहर या क्षेत्र तक सीमित नहीं है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के अनुसार, डीआरआई ने पिछले दो सप्ताह (एक पखवाड़े) के भीतर देश भर में चलाए गए पांच अलग-अलग ऑपरेशनों में लगभग 150 किलोग्राम एम्फेटामाइन-टाइप स्टिमुलेंट्स (ATS) जब्त करने में सफलता पाई है।
हालिया हफ्तों में एजेंसी द्वारा की गई बड़ी कार्यवाहियों में शामिल हैं:
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उत्तर-पूर्वी सीमा पर स्ट्राइक: भारत-म्यांमार सीमा से सटे उत्तर-पूर्वी राज्यों में दो बड़े अभियानों के दौरान लगभग 76 किलोग्राम मेथम्फेटामाइन (Methamphetamine) गोलियां जब्त की गईं।
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समुद्री और निर्यात खेप पर शिकंजा: सऊदी अरब के जेद्दा भेजे जा रहे एक वाणिज्यिक निर्यात शिपमेंट में मक्के (Corn) के बोरों के भीतर छिपाकर रखी गई 55.86 किलोग्राम उच्च-शुद्धता वाली नशीली सामग्री पकड़ी गई।
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कठोर कानूनी प्रावधान: पकड़े गए सभी आरोपियों पर एनडीपीएस अधिनियम की गैर-जमानती धाराओं (धारा 8, 21, 22 और 29) के तहत मामले दर्ज किए गए हैं, जिसमें वाणिज्यिक मात्रा (Commercial Quantity) होने के चलते 10 से 20 साल के कठोर कारावास और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
एम्फैटेमिन और एमडीएमए जैसी नशीली दवाएं सेंट्रल नर्वस सिस्टम (CNS) को उत्तेजित करने वाले अत्यंत खतरनाक रासायनिक यौगिक हैं। ये दवाएं मस्तिष्क में डोपामाइन और सेरोटोनिन के स्तर को अचानक बढ़ा देती हैं, जिससे कुछ समय के लिए अत्यधिक उत्तेजना महसूस होती है। लेकिन इनका नियमित या अनियंत्रित सेवन दिल का दौरा, स्ट्रोक, मतिभ्रम, ऑर्गन फेलियर और मानसिक संतुलन बिगड़ने का कारण बनता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जहां हेरोइन या कोकीन जैसे पारंपरिक ड्रग्स पौधों पर आधारित होते हैं, वहीं सिंथेटिक ड्रग्स को अवैध प्रयोगशालाओं में आसानी से उपलब्ध रसायनों (Precursors जैसे Ephedrine और Pseudoephedrine) से सिंथेसाइज किया जा सकता है। इससे इनकी लागत कम होती है और मुनाफा कई गुना अधिक।
डीआरआई, नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और स्थानीय पुलिस अब उन फाइनेंसरों, डार्कनेट हैंडल्स और हवाला ऑपरेटर्स की तलाश में दिल्ली, पुणे और बेंगलुरु के विभिन्न ठिकानों पर सघन तलाशी अभियान चला रही है, जो इस पूरे गिरोह के पीछे मास्टरमाइंड बनकर बैठे हैं। एजेंसी के अधिकारियों का कहना है कि जब तक पूरे सप्लाई नेटवर्क और मनी ट्रेल को पूरी तरह ध्वस्त नहीं कर दिया जाता, यह देशव्यापी ऑपरेशन इसी आक्रामकता के साथ जारी रहेगा।
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