
कुत्ता इंसान का सबसे सच्चा, वफादार और समझदार साथी माना जाता है। सुख हो या दुख, वह अपने मालिक की सुरक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहता है। इतिहास और हमारे आसपास ऐसे अनगिनत उदाहरण बिखरे पड़े हैं, जहां इन बेजुबान जीवों ने अपने मालिक की जान बचाने के लिए खुद मौत के मुंह में छलांग लगा दी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जब एक कुत्ते का अंतिम समय करीब आता है, तो वह कुछ ऐसे शांत और गहरे संकेत देने लगता है जिन्हें हर पशु प्रेमी या पेट ओनर को समझना बहुत जरूरी है।
एक सामान्य कुत्ते की उम्र लगभग 12 से 15 साल के बीच होती है। वे इंसानों की तरह मौत के दार्शनिक मतलब को तो नहीं समझ पाते, लेकिन अपने शरीर के भीतर घटती ताकत, बदलती ऊर्जा और आसपास के माहौल को बहुत बारीकी से महसूस कर लेते हैं। अंतिम दिनों में उनके व्यवहार में कोई नाटकीय बदलाव नहीं होता, बल्कि भावनात्मक स्तर पर कुछ ऐसी चीजें बदलती हैं जो उनकी विदाई का इशारा होती हैं।
1. बहुत ज्यादा सोना और एकांत ढूंढना
जब आपके प्यारे दोस्त का अंतिम समय नजदीक आने लगता है, तो उसकी रोज़मर्रा की उछाल-कूद और दौड़-भाग अचानक थम जाती है। वह सामान्य दिनों के मुकाबले बहुत ज्यादा सोने लगता है। उसे अब आपके साथ वॉक पर जाने, बॉल से खेलने या घर के बाहर घूमने में कोई दिलचस्पी नहीं रह जाती। वह घर का कोई ऐसा शांत, खामोश या अंधेरा कोना तलाशने लगता है जहां कोई उसे परेशान न करे। उसके चेहरे की वो पुरानी रौनक गायब हो जाती है और उसकी जगह एक अजीब सी उदासी ले लेती है। धीरे-धीरे उसकी अपनी ही एक छोटी सी खामोश दुनिया बन जाती है।
2. भूख और प्यास का पूरी तरह कम हो जाना
मौत आने से कुछ हफ्ते या महीने पहले से ही कुत्ते के खान-पान की आदतों में बड़ा बदलाव दिखने लगता है। भोजन के प्रति उसकी इच्छा पूरी तरह खत्म होने लगती है। आप उसे उसका सबसे पसंदीदा खाना, चिकन या कोई भी ट्रीट (Treat) दे दें, वह उसकी तरफ उत्साह से देखेगा तक नहीं। यह बदलाव अचानक नहीं होता, बल्कि धीरे-धीरे उसकी डाइट कम होती चली जाती है। अंत में वह पानी पीना भी बेहद कम या बंद कर देता है, जो इस बात का साफ इशारा है कि उसका शरीर अब अंदर से पूरी तरह थक चुका है।
3. शरीर का तापमान गिरना और भारी सांसें
आम दिनों में आपने देखा होगा कि कुत्ते अक्सर बहुत तेज-तेज हांफते हैं, जो उनके शरीर के तापमान को संतुलित रखने का प्राकृतिक तरीका है। लेकिन जब जीवन का अंत करीब आता है, तो उनके शरीर का इंटरनल टेंपरेचर तेजी से गिरने लगता है। अगर आप इस दौरान उनके पंजों या कानों को छुएंगे, तो वे आपको एकदम ठंडे महसूस होंगे। इसके साथ ही उनकी सांस लेने की गति बहुत भारी, धीमी या अनियमित हो जाती है। सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली बात यह है कि अंतिम समय में अंगों पर से उनका नियंत्रण खत्म हो जाता है, जिसके कारण वे लेटे-लेटे ही अनजाने में मल-मूत्र त्यागने लगते हैं।
4. अत्यधिक सुस्ती और पैरों का लड़खड़ाना
उम्र बढ़ने और मांसपेशियों की ताकत पूरी तरह खत्म हो जाने के कारण कुत्ता उठने-बैठने में भी असमर्थ हो जाता है। अगर वह अपनी जगह से उठने या थोड़ा चलने की कोशिश भी करे, तो कमजोरी की वजह से उसके पैर लड़खड़ाने लगते हैं और वह गिर जाता है। जब आप उसे प्यार से आवाज देंगे या उसके पास जाएंगे, तो वह पहले की तरह पूंछ हिलाकर या उछलकर अपनी खुशी जाहिर नहीं कर पाएगा। वह बस एक ही जगह सुस्त लेटा रहेगा और बहुत उदास दिखेगा। उसकी यह बेबसी देखकर किसी भी इंसान का दिल पसीज सकता है।
5. मालिक से असीमित लगाव या सबसे दूरी बना लेना
इस अंतिम घड़ी में अलग-अलग कुत्तों का व्यवहार दो बिल्कुल अलग रूपों में सामने आता है जिसे समझना बेहद जरूरी है:
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पूरी तरह एकांतप्रिय होना: कुछ कुत्ते अपनी तकलीफ को छुपाने के लिए बिल्कुल अकेले रहना पसंद करते हैं। वे पलंग के नीचे, अलमारी के पीछे या किसी अंधेरे कोने में जाकर चुपचाप बैठ जाते हैं।
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हद से ज्यादा चिपक जाना: इसके विपरीत, कुछ कुत्ते अपने मालिक से बहुत ज्यादा लगाव दिखाने लगते हैं। मालिक घर में जहां भी जाएगा, वे अपनी बची-कुची ताकत लगाकर उनके पीछे-पीछे चलने की कोशिश करेंगे। वे एक पल भी अपने मालिक से दूर नहीं होना चाहते। उन्हें हर वक्त इंसानी स्पर्श की भूख होती है, क्योंकि आपका प्यार से सहलाना उन्हें एक अनूठा सुकून और सुरक्षा का अहसास देता है।
अंतिम समय में एक मालिक का फर्ज (Emotional Duty)
| कुत्ते का व्यवहार | मालिक को क्या करना चाहिए? | मिलने वाला प्रभाव |
| शांत और एकांत में लेटना | उसके पास एक आरामदायक और गर्म बिस्तर तैयार करें। | उसे शारीरिक आराम मिलेगा। |
| खाना-पीना पूरी तरह छोड़ देना | जबरदस्ती खिलाने के बजाय थोड़ा-थोड़ा पानी या लिक्विड दें। | शरीर को अत्यधिक कष्ट नहीं होगा। |
| हर वक्त पास रहने की इच्छा | उसके पास बैठें, सिर पर हाथ फेरें और प्यार से बातें करें। | वह खुद को सुरक्षित महसूस करेगा। |
असल में, जीवन के अंतिम पड़ाव पर आए ये बदलाव डराने वाले नहीं होते। यह प्रकृति का नियम है और कुत्ता अपने तरीके से अपने शरीर के बदलावों को जाहिर कर रहा होता है। इस समय किसी भी मालिक की जिम्मेदारी सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण हो जाती है। आपके वफादार साथी को इस वक्त किसी दवा या डांट से ज्यादा आपके प्यार, असीमित धैर्य और नरम देखभाल की जरूरत होती है। पूरी जिंदगी बिना किसी स्वार्थ के हमें अपना निस्वार्थ प्रेम और वफादारी देने वाले इस प्यारे जीव को सम्मान, शांति और दुलार के साथ विदा करना ही हमारी उसके प्रति सबसे बड़ी कृतज्ञता है।
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