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Delhi Weather Today: दिल्ली-NCR में अचानक बदला मौसम, 60km/h की रफ्तार से आएगी आंधी; IMD का ‘येलो अलर्ट’ जारी

ढाका, 12 मई : बांग्लादेश के उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) के अपीलीय विभाग ने हाल ही में जारी एक फैसले के पूरे टेक्स्ट ( निर्णय के हर एक शब्द, विवरण और कानूनी तर्क) में अपने पूर्व के फैसले पर अफसोस जताया। इस फैसले में बांग्लादेश के 1971 के युद्ध के दौरान मानवता के खिलाफ किए गए अपराधों के लिए दायर केस में बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के नेता एटीएम अजहरुल इस्लाम की मौत की सजा को बरकरार रखा गया था।

द डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश सैयद रेफात अहमद की अगुवाई वाली सात सदस्यों वाली पीठ ने 74 पेज के फैसले में कहा,”यह अपील विभाग पूरी न्यायिक जिम्मेदारी के साथ यह मानता है कि अपने पहले के फैसले में वह सबूतों की कमियों और उस बड़े संदर्भ पर सही और निष्पक्ष विचार करने में नाकाम रहा।

उच्चतम न्यायालय ने कहा, ”अफसोस की बात है कि पहले का फैसला इतने गंभीर किस्म के आपराधिक मामलों मेंजरूरी जांच और निष्पक्षता के ऊंचे मानक से कम था।” 27 मई, 2025 को अपील विभाग ने अपने पहले के फैसले को रद कर दिया, जिसमें 2014 में अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) ने अजहरुल के खिलाफ सुनाई गई मौत की सजा को बरकरार रखा गया था। न्यायालय ने उन्हें सभी आरोपों से बरी भी कर दिया और जेल अधिकारियों को निर्देश दिया कि अगर वे किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं, तो उन्हें तुरंत रिहा कर दिया जाए।

यह फैसला बेंच ने जमात नेता की अपील के बाद सुनाया गया। उन्होंने आईसीटी के फैसले को चुनौती दी थी। अजहरुल के वकील मोहम्मद शिशिर मनीर ने बताया कि उनके मुवक्किल 8 अगस्त 2012 से जेल में थे। उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद 28 मई 2025 को रिहा कर दिए गए। इस समय एटीएम अजहरुल बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के नायब-ए-अमीर हैं। 12 फरवरी को हुए राष्ट्रीय चुनाव में रंगपुर-2 से सांसद चुने गए है।

उल्लेखनीय है कि 1971 में मानवता के खिलाफ किए गए अपराधों से जुड़े मामलों में जमात नेता मतिउर रहमान निजामी, अब्दुल कादर मुल्ला, मोहम्मद कमरूज्जमान, अली अहसान मोहम्मद मुजाहिद,मीर कासिम अली और बीएनपी नेता सलाहुद्दीन कादर चौधरी को उच्चतम न्यायालय के फैसलों के बाद फांसी दी जा चुकी है।