
राजधानी दिल्ली के कनॉट प्लेस (Connaught Place) और जंतर-मंतर इलाके में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘संसद मार्च’ के दौरान हुए भयंकर बवाल, पथराव और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में दिल्ली पुलिस ने कड़ा एक्शन लिया है। पुलिस ने हिंसा, तोड़फोड़ और पुलिसकर्मियों पर हमले की गंभीर धाराओं के तहत अज्ञात उपद्रवियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो केंद्रीय दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था को ठेंगा दिखाने वाले इन उपद्रवियों को बेनकाब करने के लिए दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच और स्पेशल सेल ने दर्जनों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है।
CP और जंतर-मंतर पर कैसे शुरू हुआ बवाल?
बिना पुलिस अनुमति के संसद भवन की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों को जब सुरक्षा बलों ने जंतर-मंतर पर रोका, तो स्थिति अचानक हिंसक हो गई:
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बैरिकेड्स तोड़े और पथराव किया: प्रदर्शनकारियों ने न केवल पुलिस बैरिकेड्स को उखाड़ फेंका, बल्कि आक्रामक होकर पुलिसकर्मियों पर पथराव शुरू कर दिया।
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कनॉट प्लेस में तोड़फोड़: प्रदर्शनकारियों की भीड़ का एक हिस्सा इनर और आउटर सर्कल (CP) की तरफ बढ़ गया, जहां दुकानों के शीशे तोड़े गए, बसों को निशाना बनाया गया और दुकानों के बाहर लगे बोर्ड उखाड़ दिए गए।
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दुकानदारों में दहशत: दिल्ली के सबसे प्रमुख कारोबारी हब कनॉट प्लेस में अचानक हुई तोड़फोड़ और उपद्रव के कारण व्यापारियों ने आनन-फानन में अपनी दुकानें बंद कर दीं।
दिल्ली पुलिस की FIR में किन धाराओं का हुआ इस्तेमाल?
न्यू दिल्ली जिले के संसद मार्ग और कनाट प्लेस पुलिस स्टेशनों में दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई सख्त धाराएं जोड़ी गई हैं:
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सरकारी काम में बाधा डालना और हमला: पुलिसकर्मियों पर हमला करने और उनके ड्यूटी में रुकावट डालने की धाराएं।
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सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान (PDPP Act): बसों, बैरिकेड्स और दुकानों को पहुंचाए गए नुकसान के लिए प्रिवेंशन ऑफ डैमेज टू पब्लिक प्रॉपरटी एक्ट।
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गैर-कानूनी जमावड़ा (Unlawful Assembly) और उपद्रव करना: बिना अनुमति बीएनएसएस की धारा 163 (पुराना 144) का उल्लंघन कर भीड़ जुटाने के आरोप।
CCTV और डिजिटल साक्ष्यों से हो रही पहचान
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, उपद्रवियों को चिह्नित करने के लिए विशेष टीमें बनाई गई हैं:
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सीसीटीवी और वीडियो फुटेज: कनॉट प्लेस और संसद मार्ग पर लगे सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन फुटेज और मीडिया कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
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चेहरों की पहचान (Facial Recognition): एफआरएस (FRS) तकनीक का इस्तेमाल कर पथराव और तोड़फोड़ करने वाले मुख्य साजिशकर्ताओं और उपद्रवियों की पहचान की जा रही है।
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अब तक दर्जनों हिरासत में: पुलिस ने मौके से कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था, जिनसे पूछताछ कर अन्य आयोजकों के नाम सामने लाने की कोशिश जारी है।
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि राजधानी में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
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