
अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार और वैश्विक ऊर्जा सेक्टर में इन दिनों सांसें थामने वाला मंजर देखने को मिल रहा है। कल सुबह जहां खाड़ी देशों में युद्ध भड़कने की आशंका से कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही थीं, वहीं देर रात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बड़े और सकारात्मक एलान ने बाजार का पूरा रुख ही पलट दिया। ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच इस वीकेंड ही एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।
इस बड़ी कूटनीतिक सफलता की उम्मीद में वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति (Global Energy Supply) में आने वाली रुकावटों का डर अचानक खत्म हो गया, जिसके चलते वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 5 प्रतिशत से ज्यादा की भारी गिरावट दर्ज की गई।
दो महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंचे दाम
इस बड़े फेरबदल के बाद कच्चे तेल के दोनों प्रमुख बेंचमार्क अपने दो महीने के सबसे निचले स्तर के करीब आ गए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले इस बदलाव को आप नीचे दी गई तालिका से आसानी से समझ सकते हैं:
नोट: एशियाई बाजारों में अगस्त डिलीवरी के लिए ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई इसी दायरे में कारोबार कर रहे हैं।
सुबह मिलिट्री अटैक, शाम को कूटनीति: ऐसे पलटी बाजार की बाजी
कच्चे तेल के बाजार में यह उतार-चढ़ाव किसी रोलर-कोस्टर राइड जैसा रहा। दरअसल, ट्रंप द्वारा तेहरान पर अंतरिम शांति व्यवस्था से जुड़ी बातचीत में जानबूझकर देरी करने का आरोप लगाने के बाद अमेरिकी सेना ने गुरुवार को लगातार दूसरे दिन ईरान पर हवाई हमले किए थे। इन हमलों की खबर आते ही ब्रेंट क्रूड ऑयल में 2.5% का तगड़ा उछाल आया और यह क्षण भर में $95 प्रति बैरल को पार कर गया।
शुरुआत में ट्रंप ने ईरान के तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह तबाह करने और आगे और भी सख्त कार्रवाई करने की खुली धमकी दी थी। लेकिन कुछ ही घंटों बाद उनके सुर बदले और उन्होंने दावा किया कि दोनों देश एक बड़ी डील के बेहद करीब हैं। हालांकि, ईरान के शीर्ष नेतृत्व या तेहरान मीडिया की तरफ से अभी तक इस ड्राफ्ट समझौते को किसी भी तरह की मंजूरी देने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से दोबारा शुरू हुई हलचल
अंतरराष्ट्रीय बाजार इस समय युद्ध से ज्यादा इस विवाद के कूटनीतिक समाधान पर भरोसा कर रहा है। यह विवाद इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके चलते होर्मुज स्ट्रेट से तेल का बहाव पूरी तरह रुक गया था। यह समुद्री रास्ता दुनिया भर में कच्चे तेल, ईंधन और नेचुरल गैस के शिपमेंट के लिए सबसे अहम लाइफलाइन माना जाता है। ट्रंप के मुताबिक, इस समझौते के तहत ईरान भविष्य में परमाणु हथियार न बनाने का लिखित वादा करेगा, जिसके बदले में होर्मुज स्ट्रेट को जहाजों की आवाजाही के लिए पूरी तरह सुरक्षित और बहाल कर दिया जाएगा। कुछ तेल टैंकर फारस की खाड़ी से बाहर निकलना शुरू भी हो चुके हैं।
दुनिया भर में तेल के स्टॉक की भारी कमी
भले ही शांति समझौते की उम्मीद से कीमतों में तात्कालिक गिरावट आ गई हो, लेकिन बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि हालात पूरी तरह सामान्य होने में अभी वक्त लगेगा। पिछले कई हफ्तों की जंग के कारण एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा है और कई जगहों पर प्रोडक्शन पूरी तरह ठप है।
इस समय पूरी दुनिया में तेल का स्टॉक (Oil Inventory) अपने बेहद निचले स्तर पर आ चुका है:
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सिंगापुर संकट: सिंगापुर में कमर्शियल फ्यूल का स्टॉक घटकर साल 2013 के बाद से सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।
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अमेरिकी क्रूड इन्वेंटरी: पिछले कुछ हफ्तों के दौरान अमेरिका में भी कच्चे तेल के सुरक्षित स्टॉक में भारी और तेजी से गिरावट दर्ज की गई है।
ऐसे में यदि यह शांति समझौता इस वीकेंड हकीकत में तब्दील नहीं होता है, तो कम इन्वेंटरी के चलते कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर से बड़ा और खतरनाक उछाल देखने को मिल सकता है। फिलहाल, भारतीय तेल कंपनियों और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार से आई यह गिरावट एक बड़ी राहत की खबर है।
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