Credit Card 3 Days Grace Period Rule: ड्यू डेट छूटने के बाद भी नहीं लगेगी पेनाल्टी, RBI के 3 दिन वाले नियम से ऐसे बचाएं लेट फीस और सिबिल स्कोर

क्रेडिट कार्ड का उपयोग आज की डिजिटल जीवनशैली में आम हो चुका है, लेकिन कई बार व्यस्तता, तकनीकी खराबी या बैंक सर्वर डाउन होने की वजह से पेमेंट की अंतिम तारीख यानी ड्यू डेट (Payment Due Date) छूट जाती है। अमूमन लोगों को लगता है कि तय तारीख बीतते ही उन पर भारी भरकम लेट पेमेंट चार्ज, ब्याज और सिबिल स्कोर (CIBIL Score) बिगड़ने का खतरा मंडराने लगेगा। हालांकि, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने क्रेडिट कार्ड धारकों को इस तरह की अचानक लगने वाली पेनल्टी से राहत देने के लिए एक विशेष नियम बनाया हुआ है, जिसे ‘3 Days Grace Period Rule’ यानी तीन दिन का रियायती नियम कहा जाता है।

क्या है RBI का 3 दिन वाला ग्रेस पीरियड नियम

भारतीय रिज़र्व बैंक के मास्टर डायरेक्शन (Master Direction on Credit Card and Debit Card Operations) के तहत सभी बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) और कार्ड जारी करने वाली संस्थाओं के लिए यह नियम अनिवार्य किया गया है। इस नियम के अनुसार, यदि कोई कार्डधारक बिल की देय तिथि (Due Date) तक भुगतान करने से चूक जाता है, तो बैंक तुरंत उस पर कोई पेनाल्टी या लेट फीस नहीं लगा सकते। बैंक या क्रेडिट कार्ड कंपनी को ग्राहक को ड्यू डेट के बाद अतिरिक्त 3 दिनों का रियायती समय (Grace Period) देना अनिवार्य होता है।

पेनाल्टी और लेट फीस से कैसे मिलती है पूरी राहत

यदि आपकी क्रेडिट कार्ड पेमेंट की अंतिम तारीख 10 तारीख है और आप किसी वजह से उस दिन बिल नहीं भर पाते हैं, तो आरबीआई के नियमानुसार बैंक आपको 13 तारीख तक का समय देगा। यदि आप 13 तारीख को या उससे पहले अपने पूरे बिल या मिनिमम ड्यू का भुगतान कर देते हैं, तो बैंक आपसे किसी भी तरह का लेट पेमेंट चार्ज (Late Payment Fee) नहीं वसूल सकता। आसान शब्दों में कहें तो पेनल्टी केवल तभी लगाई जा सकती है जब बकाया राशि का भुगतान तय ड्यू डेट के 3 दिन बाद भी न किया गया हो।

CIBIL स्कोर और क्रेडिट हिस्ट्री पर नहीं पड़ेगा कोई बुरा असर

क्रेडिट कार्ड का बिल समय पर न भरने का सबसे बड़ा नुकसान क्रेडिट स्कोर का खराब होना माना जाता है। सिबिल स्कोर बिगड़ने से भविष्य में होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन मिलने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। आरबीआई के नियमों में यह स्पष्ट दिशा-निर्देश है कि क्रेडिट कार्ड जारी करने वाले बैंक या वित्तीय संस्थान ड्यू डेट मिस होने के तुरंत बाद क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियों (जैसे CIBIL, Experian, CRIF High Mark) को ‘डिफ़ॉल्ट’ या ‘लेट पेमेंट’ की सूचना नहीं भेज सकते। बैंक क्रेडिट ब्यूरो को ग्राहक की डिफ़ॉल्ट रिपोर्ट केवल तभी भेज सकते हैं जब देय तिथि के बाद मिले 3 दिन के ग्रेस पीरियड में भी पेमेंट पूरी तरह पेंडिंग रह जाए।

ब्याज की गणना को लेकर ध्यान रखें यह जरूरी बात

ग्रेस पीरियड के दौरान आपको लेट फीस से तो पूरी सुरक्षा मिलती है, लेकिन वित्तीय जानकारों की सलाह है कि इस नियम को नियमित आदत बनाने से बचना चाहिए। यदि आप ड्यू डेट के बाद इन 3 दिनों में पेमेंट करते हैं, तो बैंक लेट फीस नहीं लगाएंगे, लेकिन कुछ मामलों में ट्रांजैक्शन की तारीख से लगने वाला सामान्य फाइनेंस चार्ज (ब्याज दर) लागू हो सकता है यदि आपने पूरा बिल नहीं चुकाया है। इसलिए अतिरिक्त ब्याज के बोझ से बचने के लिए तय तारीख के भीतर ही पूरे बिल का भुगतान करना सबसे सुरक्षित विकल्प रहता है।

बिल मिस होने से बचने के लिए अपनाएं ये आसान टिप्स

तकनीकी अड़चनों या भूलने की वजह से क्रेडिट कार्ड का बिल मिस न हो, इसके लिए कुछ आसान डिजिटल तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। सबसे पहले, अपने सेविंग्स अकाउंट से ‘ऑटो-डेबिट’ (Auto-Debit) की सुविधा एक्टिवेट कर लें, जिससे ड्यू डेट पर आपके खाते से बिल की राशि अपने आप कट जाए। इसके अलावा, कैलेंडर रिमाइंडर सेट करें और बिल जेनरेट होते ही ईमेल व एसएमएस नोटिफिकेशन को ध्यान से चेक करें। यदि कभी सर्वर एरर के कारण पेमेंट अटक जाए, तो तुरंत बैंक के कस्टमर केयर को ईमेल भेजकर सूचित करें ताकि 3 दिन के नियम का लाभ समय पर सुरक्षित किया जा सके।