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CM योगी को आपत्तिजनक ईमेल भेजने के आरोपी को हाईकोर्ट से राहत, 2.5 साल जेल में रहने के बाद मिली सशर्त जमानत

प्रयागराज/लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी वाला ईमेल भेजने के मामले में आरोपी मुबारक अली को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली है। हाईकोर्ट ने करीब ढाई साल से जेल में बंद आरोपी की जमानत अर्जी मंजूर कर ली है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत देते समय मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की जा रही है।

मार्च 2024 से जेल में बंद था आरोपी

मामले में मुबारक अली को 20 मार्च 2024 से जेल में निरुद्ध बताया गया है। उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। अभियोजन के अनुसार आरोपी पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणी वाला ईमेल भेजने का आरोप है।

आरोपी की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उसे मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है। बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि उसकी आपराधिक पृष्ठभूमि में एक मामला है और वह लंबे समय से जेल में है।

ट्रायल की धीमी रफ्तार का भी रखा गया हवाला

जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से मुकदमे की कार्यवाही में हो रही देरी का मुद्दा भी उठाया गया। अदालत के समक्ष बताया गया कि मामले में गवाहों की बड़ी संख्या के बावजूद सुनवाई अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ रही है।हाईकोर्ट के समक्ष रखी गई जानकारी के मुताबिक 23 जुलाई 2026 तक मुकदमे में चार गवाहों के बयान दर्ज हुए थे, जबकि चार्जशीट के अनुसार अभी 26 गवाहों

हाईकोर्ट ने किन शर्तों पर दी जमानत?

न्यायमूर्ति कृष्ण पहल की पीठ ने मुबारक अली की जमानत अर्जी स्वीकार करते हुए उसे निजी मुचलके और दो जमानतदार पेश करने की शर्त पर रिहा करने का निर्देश दिया। जमानतदारों का सत्यापन संबंधित अदालत द्वारा किया जाएगा।अदालत ने आरोपी को निर्देश दिया है कि वह मुकदमे से जुड़े साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करेगा और किसी गवाह को डराने या प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेगा। साथ ही उसे ट्रायल कोर्ट में निर्धारित तारीखों पर पेश होना होगा।

शर्तों का उल्लंघन हुआ तो रद्द हो सकती है जमानत

हाईकोर्ट ने साफ किया है कि जमानत की शर्तों का उल्लंघन होने पर इसे रद्द किया जा सकता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत देते समय की गई टिप्पणियों का असर ट्रायल कोर्ट की स्वतंत्र कार्यवाही पर नहीं पड़ेगा। यानी मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर स्वतंत्र रूप से अपना निष्कर्ष तय करेगी।इस मामले में हाईकोर्ट ने जमानत का फैसला आरोपी के लंबे समय से जेल में रहने, ट्रायल की प्रगति और उपलब्ध रिकॉर्ड समेत संबंधित परिस्थितियों को देखते हुए किया है। जमानत का यह आदेश मामले में आरोपी को दोषमुक्त घोषित करने के समान नहीं है और मुकदमे की सुनवाई आगे जारी रहेगी।