
मानव शरीर की पूरी संरचना मजबूत हड्डियों और जोड़ों पर टिकी है। हड्डियों के घनत्व (Bone Mineral Density) और मजबूती को बनाए रखने के लिए कैल्शियम सबसे आवश्यक पोषक तत्व माना जाता है। शरीर में मौजूद कुल कैल्शियम का 99 प्रतिशत हिस्सा हड्डियों और दांतों में संचित रहता है, जबकि शेष 1 प्रतिशत रक्त परिसंचरण, मांसपेशियों के संकुचन और तंत्रिका संकेतों के लिए आवश्यक होता है। जब दैनिक आहार में कैल्शियम की कमी होती है या शरीर कैल्शियम का सही ढंग से उपयोग नहीं कर पाता, तो शरीर अपने जैविक कार्यों को चलाने के लिए हड्डियों से कैल्शियम खींचना शुरू कर देता है।
अक्सर लोग दूध, दही, पनीर या सप्लीमेंट्स का सेवन तो भरपूर करते हैं, लेकिन फिर भी कुछ ही सालों में जोड़ों में कट-कट की आवाज, कमर दर्द, ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) और समय से पहले हड्डियों के फ्रैक्चर का शिकार हो जाते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह वे अस्वास्थ्यकर खाद्य और पेय पदार्थ हैं, जो या तो आंतों में कैल्शियम के अवशोषण को पूरी तरह रोक देते हैं या फिर हड्डियों में जमा कैल्शियम को सोखकर यूरिन (पेशाब) के जरिए शरीर से बाहर बहा देते हैं।
अत्यधिक मात्रा में नमक खाना हड्डियों के लिए सबसे बड़ा धीमा जहर साबित होता है।
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सोडियम-कैल्शियम का जैविक संबंध: जब आप अतिरिक्त नमक, चिप्स, पैक्ड नमकीन, सॉस या डिब्बाबंद फास्ट फूड खाते हैं, तो रक्त में सोडियम का स्तर तेजी से बढ़ता है।
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किडनी द्वारा निष्कासन: किडनी का काम शरीर से अतिरिक्त सोडियम को छानकर बाहर निकालना होता है। जैविक प्रक्रिया के अनुसार, किडनी जब एक अणु सोडियम को बाहर निकालती है, तो उसके साथ अनिवार्य रूप से कैल्शियम का भी एक हिस्सा पेशाब के जरिए शरीर से बाहर खींच लिया जाता है।
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प्रतिदिन 2,300 मिलीग्राम से अधिक सोडियम का सेवन हड्डियों के घनत्व को साल-दर-साल तेजी से घटाता है।
गर्मियों या पार्टी के दौरान कोल्ड ड्रिंक्स और एरेटेड बेवरेजेस पीना आज की जीवनशैली का हिस्सा बन चुका है, किंतु यह हड्डियों को अंदर से छलनी करने का मुख्य कारण है।
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फॉस्फोरिक एसिड का प्रभाव: अधिकांश डार्क कोला और कार्बोनेटेड पेय पदार्थों में तीखे स्वाद और प्रीजर्वेशन के लिए भारी मात्रा में ‘फॉस्फोरिक एसिड’ (Phosphoric Acid) मिलाया जाता है।
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खनिजों का असंतुलन: शरीर में कैल्शियम और फास्फोरस का एक निश्चित प्राकृतिक संतुलन (2:1 का अनुपात) होना चाहिए। जब अत्यधिक कोला पीने से शरीर में फास्फोरस का स्तर अत्यधिक बढ़ जाता है, तो रक्त की अम्लीयता (Acidity) को न्यूट्रलाइज करने के लिए शरीर खुद हड्डियों से कैल्शियम खींचकर रक्त में घोलने लगता है।
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इसके नियमित सेवन से कम उम्र में ही हड्डियों का घनत्व गिर जाता है और ऑस्टियोपीनिया की समस्या जन्म ले लेती है।
थकान मिटाने के नाम पर दिनभर में 4 से 5 कप तेज कैफीन युक्त कॉफी, ब्लैक टी या एनर्जी ड्रिंक्स गटकने की आदत हड्डियों की सेहत को भारी नुकसान पहुंचाती है।
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ड्यूरेटिक असर (मूत्रवर्धक प्रभाव): कैफीन एक प्राकृतिक मूत्रवर्धक है। यह किडनी में फिल्टरेशन की गति को बढ़ा देता है, जिससे पानी के साथ-साथ आवश्यक इलेक्ट्रोलाइट्स और घुला हुआ कैल्शियम भी पेशाब के माध्यम से बाहर बह जाता है।
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अवशोषण में बाधा: भोजन करने के तुरंत बाद चाय या कॉफी पीने से आंतों में कैल्शियम और आयरन को बांधने वाले रिसेप्टर्स ब्लॉक हो जाते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, 400 मिलीग्राम से अधिक कैफीन (लगभग 3-4 कप स्ट्रॉन्ग कॉफी) का दैनिक सेवन हड्डियों की कोशिकाओं (Osteoblasts) की मरम्मत की गति को धीमा कर देता है।
सफेद चीनी, मैदा, पेस्ट्री, केक और अतिरिक्त मिठास वाले खाद्य पदार्थ न केवल मोटापा और डायबिटीज का कारण बनते हैं, बल्कि हड्डियों के सबसे बड़े दुश्मन हैं।
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मैग्नीशियम और विटामिन डी की बर्बादी: चीनी को पचाने और मेटाबोलाइज करने के लिए शरीर को बड़ी मात्रा में मैग्नीशियम, कॉपर और अन्य एंजाइम्स की आवश्यकता होती है। शरीर में जब ये खनिज कम होने लगते हैं, तो आंतों में विटामिन डी का सक्रिय रूप (Active Vitamin D) नहीं बन पाता।
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अम्लीय वातावरण: बिना पर्याप्त विटामिन डी के आंतें भोजन से एक प्रतिशत भी कैल्शियम अवशोषित नहीं कर सकतीं। इसके अलावा रिफाइंड शुगर से बनने वाले एसिडिक वेस्ट को बेअसर करने के लिए भी शरीर हड्डियों के कैल्शियम बैंक पर डाका डालता है।
नियमित रूप से अत्यधिक शराब का सेवन करना शरीर के हार्मोनल और पोषण तंत्र को पूरी तरह ध्वस्त कर देता है।
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हार्मोनल असंतुलन: शराब का सेवन पैराथायराइड हार्मोन (PTH) के सामान्य कार्य को बाधित करता है, जो रक्त में कैल्शियम के स्तर को संतुलित रखने के लिए जिम्मेदार होता है।
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विटामिन डी का एक्टिवेशन रुकना: अत्यधिक शराब पीने से लिवर और किडनी पर दबाव पड़ता है, जिसके चलते सूर्य की रोशनी या डाइट से मिलने वाला इनएक्टिव विटामिन डी अपने सक्रिय रूप में नहीं बदल पाता। इसके परिणामस्वरूप पेट में मौजूद कैल्शियम सीधे बिना पचे मल के रास्ते निकल जाता है।
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साथ ही सिगरेट में मौजूद निकोटीन हड्डियों की नई कोशिकाओं के निर्माण को सीधे तौर पर मार देता है।
यदि आप चाहते हैं कि बुढ़ापे तक आपकी हड्डियां फौलाद की तरह मजबूत रहें, तो इन स्वस्थ आदतों को अपनी दिनचर्या में शामिल करें:
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नमक और चीनी पर नियंत्रण: दैनिक नमक की मात्रा को 1 छोटा चम्मच (5 ग्राम से कम) रखें और पैकेज्ड जंक फूड से दूरी बनाएं।
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कैल्शियम और विटामिन डी का तालमेल: डाइट में तिल, रागी, मखाना, हरी पत्तेदार सब्जियां, बादाम और कम वसा वाले डेयरी उत्पाद शामिल करें। रोजाना सुबह 15 से 20 मिनट गुनगुनी धूप में बैठें ताकि शरीर प्राकृतिक रूप से विटामिन डी बना सके।
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वेट-बेयरिंग एक्सरसाइज: रोजाना कम से कम 30 मिनट पैदल चलना, सीढ़ियां चढ़ना, हल्का वजन उठाना या योग करना हड्डियों के घनत्व को प्राकृतिक रूप से बढ़ाता है।
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