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Bride Leaves Husband for Lover: ‘प्रेमी को नहीं छोड़ सकती, उसी के साथ जिऊंगी…’, शादी के महज 14 दिन बाद ससुराल छोड़ मायके पहुंची दुल्हन, थाने में हाई-वोल्टेज ड्रामा

भारतीय समाज में विवाह को सात जन्मों का अटूट पवित्र बंधन माना जाता है, जहां दोनों पक्ष जीवनभर एक-दूसरे का साथ निभाने की कसमें खाते हैं। किंतु पश्चिमी उत्तर प्रदेश और मध्य भारत के ग्रामीण व अर्ध-शहरी अंचलों से इन दिनों ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं जहां पारिवारिक दबाव में हुई शादियां चंद दिनों में ही बिखर रही हैं। ऐसा ही एक सनसनीखेज और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां शादी की मेहंदी का रंग अभी दुल्हन के हाथों से छूटा भी नहीं था कि महज चौदह दिन बाद नवविवाहिता ने अपने ससुराल का घर छोड़ दिया और सीधे मायके पहुंचकर अपने पुराने प्रेमी के साथ रहने का खुला ऐलान कर दिया। दुल्हन के इस अप्रत्याशित कदम से जहां ससुराल पक्ष के पैरों तले जमीन खिसक गई, वहीं मायके वाले भी गहरे सदमे और सामाजिक लोक-लाज के भय में आ गए।

परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, दोनों परिवारों की रजामंदी और सामाजिक रीति-रिवाजों के साथ करीब पखवाड़े भर पहले दोनों की शादी बड़े धूमधाम से संपन्न हुई थी। दूल्हा एक प्रतिष्ठित निजी संस्थान में कार्यरत था और विवाह समारोह में दोनों पक्षों ने लाखों रुपये खर्च किए थे। ससुराल पहुंचने पर दुल्हन का गृह-प्रवेश गाजे-बाजे और पारंपरिक रस्मों के साथ कराया गया था।

ससुराल वालों का कहना है कि शुरुआती दिनों में दुल्हन का व्यवहार सामान्य लग रहा था, लेकिन वह अधिकांश समय फोन पर व्यस्त रहती थी और पति से दूरी बनाकर रखती थी। जब भी परिवार के लोग उससे बातचीत का प्रयास करते, तो वह सिरदर्द या तबीयत खराब होने का बहाना बना देती थी। शादी के 10-12 दिन बीतने के बाद जब पहली विदाई (मायके जाने की रस्म) की तारीख आई, तो युवती अपने मायके लौट आई।

मायके पहुंचने के दो दिन बाद ही मामले ने तब विस्फोटक रूप ले लिया जब युवती ने ससुराल वापस जाने से सीधे तौर पर इनकार कर दिया। जब माता-पिता और बड़े-बुजुर्गों ने उससे ससुराल लौटने की तैयारी करने को कहा, तो युवती ने दो टूक शब्दों में कहा कि वह अपने कॉलेज के समय के प्रेमी से बेहद प्यार करती है और यह शादी उसकी मर्जी के खिलाफ केवल पारिवारिक दबाव में कराई गई थी।

उसने परिजनों के सामने स्पष्ट कर दिया:

  • वह अपने पति के साथ अब एक दिन भी नहीं बिताएगी।

  • उसका प्रेमी ही उसका सब कुछ है और वह उसी के साथ कानूनी विवाह कर जीवन बिताएगी।

  • यदि उसे जबरन ससुराल भेजा गया या उस पर दबाव डाला गया, तो वह कोई भी आत्मघाती कदम उठा लेगी, जिसकी जिम्मेदारी पूरे परिवार की होगी।

बेटी के इस हठीले रुख से घबराए परिजन और जानकारी मिलने पर मायके पहुंचे ससुराल वाले मामले को लेकर स्थानीय पुलिस थाने पहुंच गए। थाने के प्रांगण में दोनों पक्षों के दर्जनों रिश्तेदारों की मौजूदगी में कई घंटों तक पंचायत चली।

पुलिस अधिकारियों और महिला कांउसलरों ने दोनों पक्षों को आमने-सामने बिठाकर युवती को समझाने का हरसंभव प्रयास किया। पति ने भी रिश्ते को बचाने के लिए काफी मान-मनौव्वल की, लेकिन दुल्हन अपनी जिद पर अड़ी रही। उसने पुलिसकर्मियों के सामने लिखित बयान दिया कि वह बालिग है और अपनी जिंदगी का फैसला खुद लेने का उसे विधिक अधिकार है। जब पुलिस ने पूछा कि क्या ससुराल में उसके साथ कोई दुर्व्यवहार या दहेज की मांग हुई, तो उसने साफ कहा कि ससुराल वालों का व्यवहार बहुत अच्छा था, लेकिन उसकी आत्मा और दिल केवल उसके प्रेमी से जुड़ा हुआ है।

युवती के बालिग होने और साफ इनकार के चलते पुलिस प्रशासन ने भी कानूनन जबरदस्ती करने से हाथ खड़े कर दिए। आखिरकार दोनों पक्षों के संभ्रांत लोगों और पुलिस की मध्यस्थता में आपसी सहमति का रास्ता निकाला गया:

  • सामान और स्त्रीधन की वापसी: शादी में दिया गया सारा दहेज, कपड़े और उपहार मायके पक्ष द्वारा ससुराल पक्ष को लौटाए जाएंगे, जबकि ससुराल वालों द्वारा दिए गए सोने-चांदी के सभी जेवरात वापस कर दिए जाएंगे।

  • पारस्परिक तलाक (Mutual Divorce): दोनों पक्षों ने भविष्य में किसी भी प्रकार की पुलिसिया कार्रवाई या मुकदमेबाजी से बचने के लिए कानूनी रूप से आपसी सहमति से तलाक (Section 13B) की अर्जी दाखिल करने पर दस्तखत किए।

  • बिना किसी विवाद के शादी को औपचारिक रूप से समाप्त करने का फैसला हुआ, जिसके बाद युवती अपने प्रेमी के साथ जाने के लिए स्वतंत्र हो गई।

यह घटना उन परिवारों के लिए एक कड़ा सबक है जो बच्चों की मर्जी और उनकी पसंद-नापसंद को जाने बिना सामाजिक प्रतिष्ठा के नाम पर जबरन विवाह के फैसले थोप देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शादी से पहले युवाओं को अपने अतीत और प्राथमिकताओं के बारे में स्पष्ट बात करनी चाहिए, ताकि शादी जैसे गंभीर रिश्ते में बंधने के बाद दोनों परिवारों को इस तरह की सार्वजनिक शर्मिंदगी, मानसिक संताप और आर्थिक बर्बादी का सामना न करना पड़े।