
मुंबई अंडरवर्ल्ड और बॉलीवुड का कनेक्शन पुराना है, लेकिन इस बार मामला किसी फिल्मी कहानी से भी ज्यादा पेचीदा और गंभीर हो चुका है। सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के हवाले से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि अभिनेता रणवीर सिंह की हालिया रिलीज और सुपरहिट फिल्म ‘धुरंधर’ की सफलता के बाद दाऊद इब्राहिम के गैंग यानी डी-कंपनी के भीतर जबरदस्त बेचैनी और नाराजगी देखी जा रही है।
इस घबराहट की वजह फिल्म का एक खास किरदार है, जिसे लेकर अंडरवर्ल्ड को लगता है कि इससे उनके आका की छवि को नुकसान पहुंचा है। अपनी कमजोर पड़ती पकड़ को दोबारा मजबूत करने और दुनिया को यह संदेश देने के लिए कि ‘डॉन’ अभी भी जिंदा और सक्रिय है, गैंग ने बैकस्टेज एक नई साजिश बुननी शुरू कर दी थी। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी ने समय रहते इस नेटवर्क को भांप लिया है।
‘बड़े साहब’ के किरदार से क्यों लगी डी-कंपनी को मिर्ची?
खुफिया सूत्रों के मुताबिक, फिल्म ‘धुरंधर’ में ‘बड़े साहब’ नाम का एक बेहद दमदार लेकिन अपनी आखिरी घड़ियां गिन रहा कमजोर किरदार दिखाया गया है। इस किरदार का पूरा अंदाज और पृष्ठभूमि अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से काफी हद तक मिलती-जुलती है।
गैंग के भीतर इस बात को लेकर भारी गुस्सा है कि फिल्म में इस कैरेक्टर को बेहद लाचार और अंतिम दौर में दिखाया गया है। डी-कंपनी को डर है कि इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके उगाही (Extortion) और तस्करी के धंधे पर बुरा असर पड़ेगा, क्योंकि लोग अब उन्हें कमजोर समझने लगेंगे। इसी नैरेटिव को बदलने के लिए पाकिस्तान में बैठे आकाओं ने भारत में अपने पुराने स्लीपर सेल्स को दोबारा जिंदा करने का हुक्म दे दिया।
अंडरवर्ल्ड की नई साजिश का पूरा इनसाइड ट्रैक
सुरक्षा एजेंसियों की जांच में जो बातें सामने आई हैं, उनसे साफ होता है कि डी-कंपनी अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार थी:
भावनाओं का खेल और गुमराह होते युवा
इस पूरे मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जिन नए युवाओं को इस ऑपरेशन के लिए जाल में फंसाया जा रहा था, उन्हें गैंग के असली और खूनी इरादों की भनक तक नहीं थी। सूत्रों के अनुसार, शकील गैंग के लोग इन लड़कों को सीधे तौर पर अंडरवर्ल्ड से जुड़ने की बात नहीं कह रहे थे। इसके बजाय, उन्हें बांद्रा गरीब नगर में हुई कानूनी बुलडोजर कार्रवाई की तस्वीरें और वीडियो दिखाकर धार्मिक व भावनात्मक रूप से भड़काने की कोशिश की जा रही थी। खुफिया एजेंसियों का मानना है कि डी-कंपनी हमेशा से स्थानीय संवेदनशील मुद्दों की आड़ लेकर युवाओं को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करती आई है।
दिल्ली पुलिस की ‘स्पेशल सेल’ ने खोला कच्चा-चिट्ठा
इस बड़ी साजिश की कड़ियों को जोड़ने में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की कार्रवाई सबसे टर्निंग पॉइंट साबित हुई है। स्पेशल सेल ने हाल ही में एक बड़े इनपुट के आधार पर कथित आतंकी और आपराधिक मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था। इसी जांच के दौरान यह बात कंक्रीट के रूप में सामने आई कि कैसे पाकिस्तान में बैठे तत्व और मुंबई का अंडरवर्ल्ड एक बार फिर मिलकर देश की शांति को भंग करने की फिराक में हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की कड़ाई और डिजिटल पेमेंट के बढ़ने से अंडरवर्ल्ड के उगाही और हवाला नेटवर्क की कमर पूरी तरह टूट चुकी है। यही वजह है कि खुद को सुर्खियों में बनाए रखने और दहशत का अपना पुराना साम्राज्य वापस पाने के लिए वे किसी बड़े हाई-प्रोफाइल टारगेट या अप्रिय घटना को अंजाम देने की कोशिश में थे, जिसे समय रहते विफल कर दिया गया है। फिलहाल मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे देश में हाई अलर्ट है और जांच की जा रही है।
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