माली/बमाको: पश्चिमी अफ़्रीका का साहेल क्षेत्र एक बार फिर भीषण आतंकी हमलों से थर्रा उठा है। अल-कायदा से जुड़े आतंकी संगठन JNIM (जमात नुसरत अल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन) ने माली और पड़ोसी बुर्किना फासो में समन्वित हमलों की एक श्रृंखला को अंजाम दिया है। इन हमलों में अब तक 70 से अधिक लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है, जिनमें सुरक्षा बल और आम नागरिक दोनों शामिल हैं। आतंकी संगठन ने इस खूनी तांडव की जिम्मेदारी लेते हुए इसे अपनी अब तक की सबसे बड़ी ‘जीत’ बताया है।
राजधानी बमाको पर हमला: रक्षा मंत्री की मौत से मचा हड़कंप
हालिया रिपोर्टों के अनुसार, माली की राजधानी बमाको (Bamako) और सैन्य ठिकानों पर हुए भीषण हमलों ने सरकार की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। इन हमलों में माली के रक्षा मंत्री सादियो कैमारा की मौत की खबर ने देश को स्तब्ध कर दिया है। यह हमला केवल एक आतंकी हमला नहीं, बल्कि तख्तापलट की एक नाकाम कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। आतंकियों ने न केवल सैन्य हवाई अड्डों को निशाना बनाया, बल्कि कई महत्वपूर्ण सरकारी केंद्रों पर भी कब्जा करने का दावा किया है।
बुर्किना फासो: नरसंहार और विस्थापन का खौफनाक मंजर
आतंकियों का कहर केवल माली तक सीमित नहीं रहा। बुर्किना फासो के उत्तरी इलाकों में भी JNIM के लड़ाकों ने कई गांवों में घुसकर अंधाधुंध गोलीबारी की। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, आतंकियों ने जिबो (Djibo) और यौबा (Youba) जैसे क्षेत्रों में दर्जनों नागरिकों की बेरहमी से हत्या कर दी और दुकानों व स्वास्थ्य केंद्रों को आग के हवाले कर दिया। इन हमलों के कारण हजारों लोग अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने को मजबूर हैं।
अल-कायदा का ‘साडो गवर्नेंस’: क्या है आतंकियों का इरादा?
विशेषज्ञों का मानना है कि अल-कायदा समर्थित JNIM अब केवल हमले करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह उन क्षेत्रों में अपना ‘साडो गवर्नेंस’ (समानांतर शासन) चलाने की कोशिश कर रहा है जहां सरकारी नियंत्रण कमजोर है। आतंकियों का लक्ष्य साहेल क्षेत्र में एक कट्टरपंथी इस्लामी अमीरात की स्थापना करना है। माली की सैन्य जुंटा सरकार और रूसी सैन्य बलों (Africa Corps) की मौजूदगी के बावजूद, आतंकी लगातार अपने पैर पसार रहे हैं।
वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा
पश्चिमी देशों और संयुक्त राष्ट्र ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है। अफ़्रीका में बढ़ते इस कट्टरपंथ ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि यह क्षेत्र अब वैश्विक आतंकवाद का नया केंद्र बनता जा रहा है। यदि इन आतंकी समूहों को नहीं रोका गया, तो इसका असर न केवल अफ़्रीका बल्कि यूरोप और अन्य महाद्वीपों की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
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