यूपी की राजनीति में बहुत बड़ा उलटफेर! बसपा में होने जा रही है दिग्गज पुराने नेताओं की घर वापसी

उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों से इस समय की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जो आने वाले समय में सूबे के पूरे राजनीतिक समीकरण को बदलकर रख सकती है। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने पार्टी को जमीनी स्तर पर फिर से मजबूत करने और सोशल इंजीनियरिंग को धार देने के लिए एक मास्टरप्लान तैयार किया है। इस नए प्लान के तहत बसपा को छोड़कर जा चुके कई कद्दावर और पुराने दिग्गजों की जल्द ही पार्टी में सम्मानजनक ‘घर वापसी’ होने जा रही है। इसी के साथ, राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा भी बेहद तेज हो गई है कि बसपा आगामी चुनावों को देखते हुए कांग्रेस के साथ एक नए सियासी गठबंधन की जमीन तैयार कर रही है। इस पूरे मिशन को बेहद सीक्रेट और सफल बनाने के लिए ‘बहन जी’ ने अपनी कोर कमेटी के ‘टॉप 3’ भरोसेमंद नेताओं को एक बहुत बड़ी और अहम जिम्मेदारी सौंप दी है।

आखिर कौन हैं वो ‘टॉप 3’ रणनीतिकार जिन्हें मायावती ने सौंपी है रूठे नेताओं को मनाने की जिम्मेदारी

बसपा के भीतर चल रही इस बड़ी हलचल के बीच हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर मायावती के वो ‘टॉप 3’ सिपहसालार कौन हैं, जिन पर पार्टी को पुनर्जीवित करने का दारोमदार टिका है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, मायावती ने पार्टी के राष्ट्रीय समन्वयकों और बेहद करीबी रणनीतिकारों की एक हाई-लेवल टीम बनाई है। इस टीम को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वे उन सभी पुराने, जनाधार वाले और कद्दावर नेताओं से तुरंत संपर्क साधें जो किसी मनमुटाव या गलतफहमी के कारण पार्टी से अलग हो गए थे या जिन्हें निष्कासित कर दिया गया था। इन ‘टॉप 3’ नेताओं को यह टास्क दिया गया है कि वे रूठे हुए नेताओं की चिंताओं को दूर करें और उन्हें सम्मान के साथ दोबारा हाथी की सवारी कराने के लिए राजी करें, ताकि पार्टी का पुराना कैडर वोट बैंक फिर से एकजुट हो सके।

कांग्रेस के साथ गठबंधन की अटकलों में कितना है दम और क्या है इसके पीछे की बड़ी वजह

बसपा के इस बदले हुए रुख के साथ ही देश के राजनीतिक हलकों में कांग्रेस (Congress) और बीएसपी के बीच पर्दे के पीछे चल रही बातचीत की अटकलें भी परवान चढ़ रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बढ़ते प्रभाव को चुनौती देने के लिए दोनों ही दलों को एक-दूसरे के मजबूत वोट बैंक की जरूरत महसूस हो रही है। यदि दलित, मुस्लिम और कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक एक मंच पर आता है, तो यह राज्य में एक बेहद शक्तिशाली और नया राजनीतिक विकल्प खड़ा कर सकता है। हालांकि, गठबंधन के इस ब्लूप्रिंट को लेकर अभी तक किसी भी दल ने खुलकर पत्ता नहीं खोला है, लेकिन बसपा मुख्यालय में चल रही मैराथन बैठकों और पुराने नेताओं की वापसी की सुगबुगाहट को इसी महागठबंधन की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

मायावती के इस मास्टरस्ट्रोक से विरोधी दलों के खेमे में मची खलबली, जानिए आगे क्या होगा

‘बहन जी’ के इस अचानक लिए गए बड़े फैसले और रणनीति में बदलाव ने समाजवादी पार्टी और बीजेपी जैसी विरोधी पार्टियों के रणनीतिकारों को भी सतर्क कर दिया है। पुराने नेताओं की वापसी से बसपा का कैडर कैम्प एक बार फिर से रिचार्ज होता हुआ दिखाई दे रहा है। जानकारों का कहना है कि मायावती इस बार किसी भी हाल में अपनी पुरानी राजनीतिक ताकत को वापस पाना चाहती हैं, और इसके लिए वे पुराने साथियों को गले लगाने और नए सहयोगियों के साथ हाथ मिलाने से भी गुरेज नहीं कर रही हैं। आने वाले कुछ दिन उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण होने वाले हैं, क्योंकि जैसे ही इन पुराने दिग्गजों की घर वापसी की आधिकारिक घोषणा होगी, यूपी का सियासी ड्रामा एक बिल्कुल नए मोड़ पर पहुंच जाएगा।