शिवसेना के दोनों विरोधी गुटों में बड़ी हलचल! उद्धव और शिंदे को एक साथ लाने के लिए वरिष्ठ नेताओं ने भरी हुंकार

India News Live, Digital Desk : महाराष्ट्र की राजनीति इस समय अपने सबसे बड़े और अप्रत्याशित यू-टर्न की ओर बढ़ती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले दो धुर विरोधी गुटों—शिवसेना और शिवसेना (यूबीटी)—के भीतर से अब फिर से एक होने की आवाजें बेहद बुलंद होने लगी हैं। दोनों ही गुटों के बेहद रसूखदार और वरिष्ठ नेताओं ने खुले मंच से स्वीकार किया है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उनके साझा दुश्मन के रूप में उभर रही है, जिससे मूल शिवसेना के वजूद और अस्तित्व पर ही संकट मंडराने लगा है। नेताओं का साफ कहना है कि अब आपसी मतभेदों को भुलाकर दोनों गुटों के एक होने का सही समय आ गया है, अन्यथा ‘बड़ी मछली छोटी मछली को खा जाएगी’ की तर्ज पर उनका राजनीतिक आधार पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाएगा।

भाजपा छोटी मछली को निगलने वाली बड़ी मछली बन गई है – अंबादास दानवे का तीखा हमला

शिवसेना (यूबीटी) के कद्दावर नेता और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष अंबादास दानवे ने गठबंधन सहयोगी भाजपा की विस्तारवादी नीति पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने एक पुरानी मिसाल देते हुए कहा कि सत्ता में बैठी भाजपा इस समय एक ऐसी बड़ी मछली की तरह व्यवहार कर रही है जो लगातार छोटी मछलियों यानी क्षेत्रीय दलों को निगलने और उन्हें खत्म करने की कोशिशों में जुटी हुई है। जब दानवे से सीधे तौर पर यह सवाल पूछा गया कि क्या वाकई उद्धव और शिंदे गुट को अब सारे गिले-शिकवे भुलाकर एक मंच पर आ जाना चाहिए, तो उन्होंने बिना किसी झिझक के कहा कि कई महत्वपूर्ण राजनीतिक मोर्चों पर उन्हें व्यक्तिगत रूप से ऐसा महसूस हुआ है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि सिर्फ उनके अकेले चाहने से इतना बड़ा फैसला नहीं हो सकता, इसके लिए दोनों तरफ के शीर्ष नेतृत्व को बड़ी पहल करनी होगी।

हमारा बड़ा भाई ही हमें खत्म करने पर उतारू है, बदलाव अब बेहद जरूरी – अब्दुल सत्तार

राजनीतिक गलियारों में असली धमाका तब हुआ जब एकनाथ शिंदे गुट के बेहद कद्दावर नेता और कैबिनेट मंत्री अब्दुल सत्तार ने भी अंबादास दानवे के सुर में सुर मिलाया। सत्तार ने खुलकर अपनी ही गठबंधन सहयोगी भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि यह असुरक्षा की भावना किसी एक गुट की नहीं, बल्कि दोनों तरफ के शिवसैनिकों की है। उन्होंने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि अगर हमारा खुद का ‘बड़ा भाई’ (भाजपा) ही हमें राजनीतिक रूप से खत्म करने की साजिशें रच रहा है, तो ऐसी दोस्ती और गठबंधन का कोई मतलब नहीं रह जाता है। सत्तार ने छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) जिले की राजनीतिक स्थिति का हवाला देते हुए एक दर्दनाक रूपक का इस्तेमाल किया और कहा कि भाजपा ने पहले ही शिवसेना (यूबीटी) के हाथ-पैर काट दिए हैं, लेकिन अब वे छत्रपति संभाजीनगर जिले में शिंदे गुट वाली मूल शिवसेना का सिर काटने पर आमादा हैं, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

शिंदे हरी झंडी दें तो एक होने में पल भर की भी देरी नहीं होगी

अब्दुल सत्तार ने दोनों विरोधी धड़ों के विलय या गठबंधन की संभावनाओं पर एक बहुत बड़ा और स्पष्ट बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे खुले तौर पर यह स्टैंड लेते हैं कि दोनों पार्टियों को महाराष्ट्र के हित और बालासाहेब ठाकरे के विचारों को बचाने के लिए एक साथ आना चाहिए, तो इस ऐतिहासिक पुनर्मिलन में पल भर की भी देरी नहीं होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दोनों गुटों के इन वरिष्ठ नेताओं के बयानों से साफ है कि भाजपा के साथ गठबंधन में रहकर शिंदे गुट के नेता खुद को असहज महसूस कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि इन बयानों के बाद क्या उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे पर्दे के पीछे किसी नई राजनीतिक खिचड़ी को पकाने की शुरुआत करते हैं या महाराष्ट्र की सत्ता में कोई नया भूचाल आता है।