
साल 2018 में आई रणबीर कपूर स्टारर फिल्म ‘संजू’ बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर हिट साबित हुई थी। हालांकि, उस वक्त कुछ आलोचकों ने इस फिल्म पर यह आरोप भी लगाया था कि इसमें संजय दत्त की जिंदगी से जुड़े असली विवादों को छुपाकर उनकी इमेज चमकाने (इमेज मेकओवर) की कोशिश की गई है। खैर, विवाद जो भी हो, फैंस ने इस फिल्म को हाथों-हाथ लिया था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि असल जिंदगी में संजू बाबा सेट पर कितने बड़े प्रैंकस्टर (मजाकिया) थे? ‘कांटे’, ‘मुसाफिर’ और ‘शूटआउट’ जैसी दमदार फिल्मों के डायरेक्टर संजय गुप्ता ने हाल ही में एक इंटरव्यू में संजय दत्त की उन्हीं मजेदार और खतरनाक शैतानियों का खुलासा किया है, जो अक्सर क्रू मेंबर्स के लिए जी का जंजाल बन जाती थीं।
असिस्टेंट डायरेक्टर्स के लिए किसी ‘बुरे सपने’ जैसे थे संजू बाबा!
डायरेक्टर संजय गुप्ता ने एक हालिया पॉडकास्ट में संजय दत्त के साथ काम करने के अपने पुराने दिनों को याद किया। उन्होंने हंसते हुए बताया, “संजू के प्रैंक इतने गजब और अप्रत्याशित होते थे कि उनके साथ काम करना किसी भी नए असिस्टेंट डायरेक्टर (AD) के लिए किसी बुरे सपने (नाइटमेयर) से कम नहीं होता था। वह अक्सर सेट पर ऐसी मजेदार हरकतें कर देते थे, जिसकी गाज सीधे मासूम काम करने वालों और असिस्टेंट्स पर गिरती थी।”
‘थानेदार’ के सेट पर जब चुपचाप गायब कर दी इंस्पेक्टर की नेमप्लेट
संजय गुप्ता ने संजू बाबा की इस आदत का एक बेहद दिलचस्प और मजेदार उदाहरण दिया। उन्होंने बताया, “यह किस्सा साल 1990 में आई सुपरहिट फिल्म ‘थानेदार’ की शूटिंग के समय का है। इस फिल्म में संजय दत्त के साथ माधुरी दीक्षित और जीतेंद्र जैसे बड़े सितारे काम कर रहे थे। संजय दत्त सेट पर आते थे, अपनी लाइनें दोहराते थे और मजाकिया अंदाज में अपने मेकअप मैन को लताड़ना शुरू कर देते थे। इसके बाद, शॉट शुरू होने के ठीक आखिरी पल में, जब फाइनल टचअप चल रहा होता था, तब संजू चुपचाप अपने पुलिस यूनिफॉर्म से इंस्पेक्टर की नेमप्लेट निकालकर अपने हाथ में छुपा लेते थे।”
शॉट ओके होने के बाद खुद ही चिल्लाने लगते थे संजय दत्त, फिर खुलता था राज
किस्से को आगे बढ़ाते हुए संजय गुप्ता ने बताया, “मेकअप मैन को भनक भी नहीं लगती थी और वह अपना सामान लेकर चला जाता था। इसके बाद डायरेक्टर ‘एक्शन’ बोलते थे और सीन की शूटिंग शुरू हो जाती थी। संजय दत्त इतने मंझे हुए कलाकार हैं कि बिना नेमप्लेट के भी वह बहुत ही कमाल का शॉट दे देते थे। जब शॉट पूरी तरह ओके हो जाता और पूरी टीम खुश होकर अगले सीन की तैयारी में जुटती, तभी असली ड्रामा शुरू होता था। संजय दत्त अचानक खुद ही डायरेक्टर और असिस्टेंट्स पर चिल्लाने लगते थे कि— अरे, मेरी यूनिफॉर्म पर नेमप्लेट तो है ही नहीं! किसी ने ध्यान क्यों नहीं दिया? इसके बाद वह सेट पर मौजूद सभी लोगों की खिंचाई शुरू कर देते थे और बाद में हंसते हुए अपने हाथ से नेमप्लेट दिखाते थे।”
दो भाइयों की सस्पेंस भरी कहानी थी फिल्म ‘थानेदार’
आपको बता दें कि राज एन. सिप्पी के निर्देशन में बनी फिल्म ‘थानेदार’ संजय दत्त के करियर की बेहतरीन फिल्मों में से एक मानी जाती है। इस फिल्म में संजू बाबा ने एक जांबाज पुलिस ऑफिसर का किरदार निभाया था। फिल्म की कहानी दो ऐसे भाइयों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो बचपन में अपने पिता की मौत के बाद एक-दूसरे से बिछड़ जाते हैं। बड़ा होने पर एक भाई (संजय दत्त) पिता के नक्शेकदम पर चलकर पुलिसवाला बनता है, जबकि दूसरा भाई अनजाने में अपराध की दुनिया में कदम रख देता है। सालों बाद जब दोनों भाई आमने-सामने आते हैं, तो उनके बीच जज्बातों और कर्मों का एक जबरदस्त टकराव देखने को मिलता है। अगर आप इस सदाबहार फिल्म को देखना चाहते हैं, तो यह इस समय ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेजन प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम के लिए उपलब्ध है।
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