Asian Games 2026: भारत का ऐतिहासिक दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन, जीते कुल 85 मेडल; पीएम नरेंद्र मोदी ने दी बधाई

जापान के आइची-नागोया में आयोजित 20वें एशियाई खेल 2026 (Asian Games 2026) में भारतीय एथलीटों ने अपने अदम्य साहस, असाधारण अनुशासन और शानदार खेल कौशल के दम पर इतिहास के पन्नों में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है। 19 सितंबर से 4 अक्टूबर 2026 तक चले इस महाकुंभ में भारतीय दल ने कुल 85 पदक (21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य) अपने नाम किए। हांग्जो 2022 (107 पदक) के बाद एशियाई खेलों के 75 साल से अधिक के इतिहास में यह भारत का अब तक का दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन साबित हुआ है। महाद्वीपीय स्तर के इस सबसे बड़े खेल आयोजन में एशिया के 46 देशों के शीर्ष खिलाड़ियों के कड़े मुकाबले के बीच भारत ने पदक तालिका में चौथा स्थान (Fourth Position) बरकरार रखा। पूरे टूर्नामेंट के दौरान भारतीय दल ने न केवल पारंपरिक खेलों जैसे निशानेबाजी, एथलेटिक्स, तीरंदाजी और कुश्ती में अपना दबदबा बनाए रखा, बल्कि मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA), रोइंग और स्क्वॉश जैसे उभरते खेलों में भी ऐतिहासिक पदक जीतकर यह साबित कर दिया कि भारतीय खेल तंत्र अब बहुआयामी और विश्वस्तरीय बन चुका है।

भारतीय दल के इस अभूतपूर्व अभियान के समापन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सभी पदक विजेताओं और प्रतिभागी खिलाड़ियों को बधाई दी। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपने संदेश में लिखा कि 20वें एशियाई खेलों में हमारे एथलीटों का प्रदर्शन हर भारतवासी को गर्व से भर देने वाला है। पीएम मोदी ने कहा कि 85 पदकों की यह ऐतिहासिक उपलब्धि खिलाड़ियों की वर्षों की अथक तपस्या, उनके कोचों के समर्पण और देश के मजबूत होते खेल इकोसिस्टम का प्रत्यक्ष परिणाम है। उन्होंने रेखांकित किया कि ट्रैक एंड फील्ड से लेकर शूटिंग रेंज और रिंग तक, हमारे युवाओं ने जिस खेल भावना और कभी न हार मानने वाले जज्बे का परिचय दिया है, वह देश की भावी खेल पीढ़ी के लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा बनेगा। केंद्रीय खेल मंत्री और भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के शीर्ष अधिकारियों ने भी पूरे दल का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए इसे भारतीय ओलंपिक अभियान ‘मिशन 2028 लॉस एंजिल्स’ की दिशा में एक बेहद ठोस और मील का पत्थर करार दिया।

भारत के 85 पदकों के इस ऐतिहासिक सफर का विश्लेषण करें तो भारतीय निशानेबाजों और एथलीटों का योगदान सबसे अहम रहा। 21 गोल्ड मेडल्स में जहां शूटिंग रेंज से सटीक निशानों की गूंज सुनाई दी, वहीं एथलेटिक्स में भारतीय धावकों, जंपर्स और थ्रोअर्स ने ट्रैक पर स्वर्णिम चमक बिखेरी। 27 सिल्वर पदकों में सावन बरवाल द्वारा पुरुषों की मैराथन में 44 साल बाद विदेशी धरती पर जीता गया ऐतिहासिक पदक, श्रीशंकर मुरली का लंबी कूद में रजत, पारुल चौधरी की 3000 मीटर स्टीपलचेज और तजिंदरपाल सिंह तूर का शॉट पुट में रजत पदक मुख्य आकर्षण रहे। गुलवीर सिंह ने लंबी दूरी की दौड़ (1500 मीटर, 5000 मीटर और 10,000 मीटर) में बहुआयामी पदक जीतकर नया इतिहास रचा। 37 कांस्य पदकों में शूटिंग की महिला स्कीट टीम और मिक्स्ड स्कीट टीम के ऐतिहासिक पहले पदक, सुचिका तरियाल द्वारा एशियाई खेलों के इतिहास में एमएमए (MMA) का पहला ऐतिहासिक पदक और रोइंग में सतनाम सिंह व सलमान खान की डबल स्कल्स जोड़ी का ऐतिहासिक पदक शामिल रहा।

टूर्नामेंट के अंतिम चरण में भारत की पुरुष और महिला टीमों ने मैदान पर अपनी बादशाहत को और पुख्ता किया। भारतीय महिला और पुरुष हॉकी टीमों ने अपने आक्रामक खेल और मजबूत रक्षापंक्ति के दम पर पोडियम पर शीर्ष स्थान हासिल कर देश का मान बढ़ाया। इसके अलावा क्रिकेट स्पर्धा में भी भारतीय टीमों ने अपनी स्पष्ट श्रेष्ठता साबित करते हुए स्वर्ण पदकों पर कब्जा जमाया। तीरंदाजी में धीरज बोम्मदेवरा, नीरज चौहान और कुमकुम अनिल मोहोद की जोड़ी ने रिकर्व और कंपाउंड दोनों श्रेणियों में पोडियम फिनिश करके कोरियाई दिग्गजों को कड़ी टक्कर दी। कुश्ती के मैट पर दीपक पूनिया और सुनील कुमार ने ग्रीको-रोमन और फ्रीस्टाइल दोनों शैलियों में पदक जीतकर भारत की झोली भरी। स्क्वॉश कोर्ट पर अनाहत सिंह ने महिला सिंगल्स में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया, जो एशियाई खेलों में इस स्पर्धा का भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।

विदेशी धरती पर भारत के इस दूसरे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की सबसे बड़ी ताकत केंद्र सरकार की जमीनी खेल योजनाएं—टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) और खेलो इंडिया (Khelo India) रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में देश के टियर-2 और टियर-3 शहरों से निकले युवा प्रतिभाओं को विश्वस्तरीय विदेशी कोच, अत्याधुनिक स्पोर्ट्स साइंस लैब्स, मानसिक कंडीशनिंग और अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर मुहैया कराया गया। कई पदक विजेता ऐसे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों से आते हैं जहां कुछ साल पहले बुनियादी खेल सुविधाएं तक नहीं थीं, लेकिन सरकारी स्कॉलरशिप और आधुनिक ट्रेनिंग टेस्टबेड्स ने उन्हें एशियाई मंच पर पदक के प्रबल दावेदार के रूप में खड़ा किया। खिलाड़ियों के पोषण, इंजरी मैनेजमेंट और साइकोलॉजिकल सपोर्ट पर किए गए संस्थागत निवेश का सीधा नतीजा रहा कि दबाव भरे फाइनल मुकाबलों में भी भारतीय खिलाड़ी घबराए नहीं बल्कि आखिरी पलों में बाजी पलटते नजर आए।

आइची-नागोया 2026 में 85 पदकों का यह ऐतिहासिक मुकाम केवल एक टूर्नामेंट का अंत नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत के महाशक्ति बनने के सफर की एक नई शुरुआत है। हालांकि 85 पदक एक बहुत बड़ी उपलब्धि है, लेकिन खेल विश्लेषकों का मानना है कि बैडमिंटन और मुक्केबाजी जैसे कुछ खेलों में आए अप्रत्याशित झटकों से सबक लेते हुए हमें आगामी 2028 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक की तैयारियां अभी से तेज करनी होंगी। चौथे स्थान पर मजबूती से टिके रहने के बाद अब भारतीय खेल जगत का अगला बड़ा लक्ष्य चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसी एशियाई खेल महाशक्तियों के शीर्ष 3 के क्लब में सेंध लगाना है। आइची-नागोया से लौटे भारतीय दल का देश भर में ऐतिहासिक स्वागत किया जा रहा है, और देश के करोड़ों खेल प्रेमियों की आंखें अब इन युवा सितारों को ओलंपिक पोडियम पर तिरंगा लहराते देखने के लिए बेताब हैं।