
जापान में आयोजित एशियन गेम्स 2026 के महिला क्रिकेट मुकाबले में पाकिस्तानी टीम को एक बड़ा अप्रत्याशित झटका लगा है। टीम की सबसे अनुभवी विकेटकीपर और बाएं हाथ की सलामी बल्लेबाज मुनीबा अली अपनी मां की अचानक बिगड़ी तबीयत के चलते टूर्नामेंट बीच में ही छोड़कर वतन वापस लौट गई हैं। पारिवारिक आपातकाल की इस घड़ी में खिलाड़ी के साथ पूरा क्रिकेट जगत सहानुभूति प्रकट कर रहा है, मगर खेल के तकनीकी नजरिए से यह पाकिस्तान की खिताबी उम्मीदों के लिए बहुत बड़ा आघात साबित हुआ है।
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के सूत्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि मुनीबा अली के स्थान पर किसी भी अन्य खिलाड़ी को प्रतिस्थापन (रिप्लेसमेंट) के तौर पर जापान नहीं भेजा जाएगा। यह फैसला व्यावहारिक और समय की सीमाओं को ध्यान में रखकर लिया गया है। मौजूदा एशियन गेम्स का क्रिकेट प्रारूप सीधे नॉकआउट सिस्टम पर आधारित है और यह संक्षिप्त प्रतियोगिता 22 सितंबर तक पूरी तरह संपन्न हो जाएगी। इतने कम वक्त में नए खिलाड़ी के लिए वीजा प्रबंध, अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा और फिर जापानी मैदानों पर पहुंचकर बिना अभ्यास के उतरना लॉजिस्टिक रूप से असंभव था, जिसके चलते टीम प्रबंधन ने मौजूद स्क्वाड के साथ ही आगे का सफर तय करने का कठिन निर्णय लिया है।
मुनीबा अली पाकिस्तानी महिला क्रिकेट टीम की रीढ़ मानी जाती हैं। ड्रेसिंग रूम में उनका अनुभव युवा खिलाड़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का काम करता रहा है। हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात के दुबई में संपन्न हुए महिला एशिया कप में पाकिस्तानी बल्लेबाजी लाइन-अप लगातार संघर्ष करती दिखी थी, लेकिन उस पूरे टूर्नामेंट में मुनीबा अकेली ऐसी बल्लेबाज थीं जिन्होंने टीम की ओर से अर्धशतकीय पारी खेली थी। उनकी तकनीकी रूप से ठोस बल्लेबाजी विरोधी टीम के गेंदबाजों पर शुरुआत से ही दबाव बनाने का काम करती रही है।
इतना ही नहीं, हालिया महीनों में मुनीबा की नेतृत्व क्षमता की भी काफी सराहना हुई थी। जुलाई में जब पाकिस्तान की नियमित कप्तान फातिमा सना इंग्लैंड में ‘द विमेंस हंड्रेड’ लीग के तहत बर्मिंघम फीनिक्स का प्रतिनिधित्व कर रही थीं, तब श्रीलंका के खिलाफ द्विपक्षीय टी-20 श्रृंखला में कप्तानी की बागडोर मुनीबा अली के ही कंधों पर थी। उन्होंने उस कठिन दौरे पर टीम को न सिर्फ संगठित रखा बल्कि मैदान पर अपनी त्वरित निर्णय लेने की क्षमता से सभी को प्रभावित भी किया था। अब जब टीम जापान के मैदान पर नॉकआउट मैचों का दबाव झेल रही है, मुनीबा की अनुपस्थिति मैदान पर रणनीतिक रूप से बहुत खलेगी।
मुनीबा अली के स्वदेश लौट जाने के बाद टीम संयोजन में तुरंत बड़ा बदलाव करना पड़ा है। इस खाली जगह को भरने के लिए विकेटकीपर-बल्लेबाज गुल फिरोजा पर सबसे बड़ा दारोमदार आ गया है। थाईलैंड के खिलाफ खेले गए अहम मुकाबले में फिरोजा ने न केवल विकेटों के पीछे ग्लव्स संभाले, बल्कि पारी का आगाज करने की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी उठाई। यह पहली बार नहीं है जब गुल फिरोजा को टॉप ऑर्डर में परखा गया है।
गुल फिरोजा का हालिया ट्रैक रिकॉर्ड उनके पक्ष में नजर आता है। हालिया एशिया कप में वह मुख्य रूप से तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी कर रही थीं, लेकिन उससे पहले टी-20 विश्व कप में उन्हें मुनीबा अली के साथ ही पारी की शुरुआत करने का अनुभव प्राप्त हुआ था। नीदरलैंड्स के विरुद्ध खेले गए अपने आखिरी लीग मुकाबले में फिरोजा ने नाबाद 63 रनों की विस्फोटक और धैर्यपूर्ण पारी खेलकर साबित किया था कि उनमें बड़े मंच पर लंबी पारियां खेलने की क्षमता मौजूद है। अब सेमीफाइनल और संभावित फाइनल मुकाबलों में फिरोजा की ओपनिंग साझेदारी ही तय करेगी कि पाकिस्तान एशियन गेम्स में पोडियम तक पहुंच पाता है या नहीं।
मुनीबा की गैरमौजूदगी के बीच पाकिस्तान ने क्वार्टर फाइनल मैच में थाईलैंड को एक बेहद रोमांचक और कांटे के मुकाबले में तीन विकेट से मात देकर सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली। मैच से ठीक पहले हुई भारी बारिश के कारण आउटफील्ड पूरी तरह गीली हो गई थी, जिसकी वजह से अंपायरों को मैच को घटाकर प्रति टीम 11 ओवर का करना पड़ा। पाकिस्तान की कप्तान फातिमा सना ने टॉस जीतकर पहले क्षेत्ररक्षण का फैसला किया ताकि विरोधी टीम को कम से कम स्कोर पर रोका जा सके।
फातिमा सना ने गेंदबाजी में खुद आगे बढ़कर नेतृत्व किया और अपने दूसरे ही ओवर में पहला झटका दिया। थाईलैंड की टीम ने हालांकि बीच के ओवरों में जवाबी हमला बोला। उम्म-ए-हानी के सातवें ओवर में नन्नापत कोंचारोएनकाई ने लगातार दो बाउंड्री लगाकर 14 रन बटोर लिए। फनिता माया ने 16 गेंदों पर 15 रन बनाए, लेकिन ओवरों की कमी देखते हुए टीम प्रबंधन ने उन्हें ‘रिटायर्ड आउट’ करवा दिया ताकि तेजी से रन बनाए जा सकें। कप्तान नारुमोल चाईवाई ने आते ही छक्का और चौका जड़कर रन गति को तेज किया, मगर सना ने वापसी करते हुए नन्नापत को 49 के निजी स्कोर पर एलबीडब्ल्यू कर दिया। थाईलैंड ने निर्धारित 11 ओवरों में 91 रनों का मजबूत और चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया।
संक्षिप्त ओवरों के इस मैच में 92 रनों का लक्ष्य आसान नहीं था। शवाल ज़ुल्फिकार ने तेज शुरुआत की लेकिन चौथे ओवर में उनके आउट होते ही थाईलैंड के स्पिनरों ने मैच पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया। ऑफ स्पिनर ओनिचा कामचोम्फू ने घातक गेंदबाजी करते हुए लगातार तीन विकेट चटकाए, जबकि सुलीपोर्न लाओमी ने दो ओवरों में महज तीन रन देकर आयशा जफर को पवेलियन भेज दिया। पाकिस्तान की टीम अचानक भारी दबाव में आ गई और अंतिम चार ओवरों में जीत के लिए 44 रन चाहिए थे, जबकि जरूरी रन रेट 11 के पार पहुंच चुका था।
इस नाजुक मोड़ पर कप्तान फातिमा सना ने मोर्चा संभाला। उन्होंने कामचोम्फू के एक ही ओवर में तीन चौके और एक गगनचुंबी छक्का जड़कर पूरा पासा पलट दिया। उसी ओवर में एमान फातिमा ने भी एक छक्का लगाया, जिससे उस ओवर से कुल 25 रन निकले। सना ने 21 रनों की तूफानी पारी खेली। उनके आउट होने के बाद मुकाबला अंतिम ओवर तक खिंचा, लेकिन तूबा हसन ने एक चौका और एक छक्का लगाकर टीम की नब्ज थाम ली। अंतिम ओवर में जीत के लिए चार रन चाहिए थे, जिसे बल्लेबाजों ने सूझबूझ से सिंगल लेकर दो गेंदें शेष रहते पूरा कर लिया और पाकिस्तान ने सेमीफाइनल का टिकट कटा लिया।
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