Apara Ekadashi 2026: अपरा एकादशी कब है? जानें इसे क्यों कहते हैं भद्रकाली एकादशी और क्या है महत्व

सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, और इनमें भी ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी, जिसे ‘अपरा एकादशी’ कहा जाता है, बेहद फलदायी मानी गई है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, ‘अपरा’ का अर्थ है ‘अपार’, यानी वह व्रत जिसे करने से व्यक्ति को अपार सुख और पुण्य की प्राप्ति होती है। साल 2026 में यह एकादशी बेहद शुभ संयोगों के साथ आ रही है।

क्यों कहा जाता है इसे ‘भद्रकाली एकादशी’?

अपरा एकादशी को देश के कई हिस्सों में, विशेषकर पंजाब, हरियाणा और उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में ‘भद्रकाली एकादशी’ के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन देवी भद्रकाली प्रकट हुई थीं। इसलिए इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ मां काली की शक्ति साधना का भी विधान है। इस संयोग के कारण व्रत करने वाले भक्त को श्रीहरि की कृपा के साथ-साथ शक्ति का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है, जिससे उसके जीवन के शत्रुओं और बाधाओं का नाश होता है।

अपरा एकादशी का धार्मिक महत्व

शास्त्रों में वर्णित है कि अपरा एकादशी का व्रत करने से अनजाने में हुए बड़े से बड़े पापों से मुक्ति मिल जाती है। मान्यता है कि इस व्रत का फल ब्रह्म हत्या, परनिंदा और झूठ बोलने जैसे दोषों को दूर करने वाला है।

  • यह व्रत व्यक्ति को भूत-प्रेत योनि जैसी बाधाओं से बचाता है।

  • माना जाता है कि इस एकादशी का फल कार्तिक मास में स्नान करने या गंगा तट पर पितरों को पिंडदान करने के समान मिलता है।

  • धार्मिक दृष्टि से यह व्रत यश, पुण्य और धन-धान्य की वृद्धि के लिए सर्वोत्तम माना गया है।

अपरा एकादशी की पौराणिक कथा

कथा के अनुसार, प्राचीन काल में ‘महीध्वज’ नाम का एक धर्मात्मा राजा था, जिसका छोटा भाई ‘वज्रध्वज’ बहुत क्रूर और अधर्मी था। वज्रध्वज ने अपने बड़े भाई की हत्या कर दी और उसके शव को एक पीपल के पेड़ के नीचे गाड़ दिया। अकाल मृत्यु के कारण राजा की आत्मा प्रेत बनकर उसी पीपल के पेड़ पर रहने लगी।

एक दिन ‘धौम्य’ ऋषि वहां से गुजरे और उन्होंने तपोबल से प्रेत के कष्ट को जान लिया। ऋषि ने राजा को प्रेत योनि से मुक्ति दिलाने के लिए स्वयं अपरा एकादशी का व्रत किया और उसका पुण्य राजा की आत्मा को अर्पित कर दिया। इस व्रत के प्रभाव से राजा प्रेत योनि से मुक्त होकर स्वर्ग लोक चला गया। तभी से इस व्रत का प्रचलन और महत्व बढ़ गया।

साल 2026 में अपरा एकादशी की तिथि

साल 2026 में ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी की तिथि को लेकर भक्तों में उत्साह है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्योदय के साथ ही व्रत का संकल्प लिया जाएगा और अगले दिन द्वादशी को पारण किया जाएगा। भगवान विष्णु को तुलसी दल, फल और पीले फूल अर्पित करना इस दिन अत्यंत शुभ माना जाता है।