
पश्चिम एशिया में इस समय भू-राजनीतिक समीकरण बेहद तेजी से बदल रहे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने जहां पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है, वहीं इस संकट के बीच सऊदी अरब एक बेहद मजबूत आर्थिक और रणनीतिक महाशक्ति बनकर उभरा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ($Strait\ of\ Hormuz$) में जहाजों पर मंडराते खतरों के कारण खाड़ी देशों से होने वाला वैश्विक व्यापार और तेल का निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस रास्ते के ब्लॉक होने से खाड़ी के कई मुल्कों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन इसी संकट को सऊदी अरब ने अपनी दूरदर्शिता से एक बड़े अवसर में बदल दिया है। सऊदी अरब इस समय पूरे खाड़ी क्षेत्र का सबसे बड़ा ट्रेड और एनर्जी हब बनकर सामने आया है।
सऊदी की पुरानी रणनीति आई काम: लाल सागर और ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का जलवा
जब युद्ध के हालात के चलते होर्मुज स्ट्रेट से कमर्शियल जहाजों का निकलना दूभर हो गया, तब सऊदी अरब ने अपने दशकों पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर का बखूबी इस्तेमाल किया। देश की प्रसिद्ध ‘ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन’ और लाल सागर ($Red\ Sea$) के किनारे बने आधुनिक बंदरगाहों ने तेल की वैश्विक सप्लाई चेन को बिना किसी रुकावट के जारी रखा। इसका नतीजा यह हुआ कि पश्चिम एशिया में तनाव शुरू होने के पहले ही महीने में सऊदी अरब का तेल निर्यात राजस्व (Oil Export Revenue) छलांग लगाकर 24.7 अरब डॉलर के पार पहुंच गया। वैश्विक मंदी और युद्ध के बाद भी यह सऊदी अरब की पिछले तीन वर्षों की सबसे बड़ी और रिकॉर्ड तोड़ कमाई मानी जा रही है।
निवेशकों का बढ़ा भरोसा: दुबई और अबू धाबी पिछड़े, सऊदी शेयर बाजार में रौनक
इस अशांत और अनिश्चित माहौल में भी वैश्विक निवेशकों ने खाड़ी क्षेत्र में सबसे ज्यादा भरोसा सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था पर जताया है। आंकड़े गवाह हैं कि युद्ध की शुरुआत के बाद से जहां एक तरफ यूएई के प्रमुख बाजारों यानी दुबई और अबू धाबी के शेयर सूचकांकों में क्रमश: 10% और 7% की भारी गिरावट दर्ज की गई है, वहीं इसके विपरीत सऊदी अरब का मुख्य स्टॉक इंडेक्स करीब 3% की बढ़त के साथ मजबूती से खड़ा है। बाजार के इस शानदार प्रदर्शन ने स्थानीय और विदेशी कंपनियों का हौसला बढ़ाया है। यही वजह है कि खाड़ी के अन्य देशों में जहां नए आईपीओ ($IPO$) की रफ्तार पूरी तरह सुस्त पड़ गई है, वहीं सऊदी अरब में कंपनियां अपनी पब्लिक लिस्टिंग की तैयारियां बिना रुके जारी रखे हुए हैं।
आईएमएफ का अनुमान और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का विजन
यह सच है कि लंबे समय तक चलने वाले किसी भी युद्ध का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ($IMF$) ने साल 2026 के लिए सऊदी अरब की आर्थिक ग्रोथ रेट के अनुमान को 0.9 प्रतिशत अंक घटाकर 3.1% कर दिया है। लेकिन राहत की बात यह है कि खाड़ी के बाकी देशों को लगी आर्थिक चोट के मुकाबले सऊदी के अनुमानों में की गई यह कटौती सबसे कम है।
आर्थिक और रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस वैश्विक संकट ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के उस सपने को और रफ्तार दे दी है, जिसके तहत वे देश को एशिया, अफ्रीका और यूरोप को जोड़ने वाला एक विशाल ग्लोबल लॉजिस्टिक्स हब बनाना चाहते हैं। इसी विजन के तहत सऊदी अरब अपने सबसे महत्वाकांक्षी और हाई-टेक ड्रीम प्रोजेक्ट ‘नेओम’ ($NEOM$) के तहत बनने वाले नए पोर्ट में बड़े रणनीतिक बदलाव कर रहा है। यह नया बंदरगाह आने वाले समय में यूरोपीय कंपनियों के लिए यूएई, कुवैत और इराक के साथ व्यापार करने का सबसे बड़ा और सुरक्षित केंद्र बन सकता है।
जोखिम अभी भी टले नहीं हैं, लेकिन वैकल्पिक रास्ते ही हैं भविष्य
सऊदी अरब के लिए राहें पूरी तरह कांटों से मुक्त नहीं हैं। लाल सागर के रूट पर यमन के हूती विद्रोहियों के ड्रोन और मिसाइल हमलों का खतरा अब भी लगातार बना हुआ है, जिससे सुरक्षा चुनौतियां बढ़ी हैं। इसके बावजूद दुनिया भर के बड़े विश्लेषकों का मानना है कि अगर भविष्य में होर्मुज स्ट्रेट का रास्ता दोबारा पूरी तरह सुरक्षित और बहाल हो भी जाता है, तब भी खाड़ी देश और वैश्विक व्यापारिक कंपनियां अब केवल एक ही समुद्री मार्ग पर निर्भर रहने की भूल नहीं करेंगी। खाड़ी देश अब वैकल्पिक व्यापारिक रास्तों और मजबूत पाइपलाइन नेटवर्क्स पर अपना भारी निवेश जारी रखेंगे, जिसका सीधा और दीर्घकालिक फायदा आने वाले दशकों में सऊदी अरब को मिलना तय है।
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