
अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनातनी कम होने का नाम नहीं ले रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार और वैश्विक समुद्री व्यापारिक मार्गों पर अपना दबदबा बनाए रखने की यह जंग अब एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुकी है। हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर सख्त आर्थिक कार्रवाई करते हुए प्रतिबंधों के एक नए सेट की घोषणा की है। इस बार अमेरिका के निशाने पर ईरान की वह नई नवेली एजेंसी है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्ग—होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz)—से गुजरने वाले जहाजों को अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश कर रही है।
जहाजों से मोटी वसूली की तैयारी में था ईरान
अमेरिकी वित्त मंत्रालय (US Treasury) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर ईरान की ‘पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी’ (Persian Gulf Strait Authority) और उसके साथ सहयोग करने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्था पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है।
दरअसल, ईरान ने हाल ही में इस विशेष एजेंसी का गठन किया था। इसका मुख्य काम इस संकरे समुद्री रास्ते से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों को अनुमति देना और उन पर भारी-भरकम शुल्क थोपना था। रिपोर्ट्स की मानें तो ईरान इस रास्ते से निकलने वाले प्रति जहाज से 20 लाख डॉलर (करीब 16.5 करोड़ रुपये) तक की मोटी रकम जबरन वसूलने की फिराक में था, जिसे वैश्विक व्यापार पर सीधे हमले के रूप में देखा जा रहा है।
‘आर्थिक संकट में फंस चुका है ईरान’
इस कड़ी कार्रवाई पर बात करते हुए अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि वैश्विक समुद्री व्यापार पर दबाव बनाने का ईरानी सेना का यह नया प्रयास साफ दिखाता है कि अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों के आगे ईरान बेबस हो चुका है। वह अंदरूनी रूप से गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहा है और अब पैसे जुटाने के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रहा है। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि वॉशिंगटन ईरान पर अपनी यह आर्थिक सख्ती तब तक बरकरार रखेगा, जब तक वह अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं का सम्मान करना नहीं सीख जाता।
क्यों खास है होर्मुज जलडमरूमध्य?
भौगोलिक और व्यापारिक दृष्टिकोण से यह रास्ता दुनिया की लाइफलाइन माना जाता है। दुनिया के कुल तेल और गैस की सप्लाई का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में ईरान द्वारा इस मार्ग पर मनमानी टैक्स वसूली और सैन्य नियंत्रण बढ़ाने की कोशिशों ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट (वैश्विक ऊर्जा बाजार) की नींद उड़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के दामों में एक बार फिर तेज उछाल देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नए विवाद के कारण जलमार्ग की स्थिति को पूरी तरह सामान्य होने में कई हफ्ते या महीनों का समय लग सकता है।
ईरान की धमकी और ‘आत्मरक्षा’ में अमेरिकी कार्रवाई
दूसरी तरफ, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स अपनी इस हरकत को सही ठहराने में जुटे हैं। उनका कहना है कि वे केवल समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं और उनके तय किए गए रास्तों से गुजरने वाले जहाज ही सुरक्षित रहेंगे। इसके साथ ही उन्होंने धमकी भरे लहजे में कहा कि जो देश या कंपनियां उनके नियमों का पालन नहीं करेंगी, उन्हें समंदर में मिसाइल हमलों और अन्य अप्रत्याशित खतरों का सामना करना पड़ सकता है।
इस धमकी के बीच, अमेरिकी सेना ने भी दावा किया है कि उसने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र की सुरक्षा और आत्मरक्षा में ईरानी मिसाइल ठिकानों और ड्रोन गतिविधियों के खिलाफ सीधे सैन्य एक्शन लिया है।
बातचीत भी जारी, पर ट्रंप अभी संतुष्ट नहीं
इस गहरे तनाव और समंदर में जारी सैन्य झड़पों के बीच, दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने को लेकर कूटनीतिक बातचीत का सिलसिला भी चल रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद दावा किया है कि दोनों देश एक शांति समझौते के बेहद करीब पहुंच चुके हैं, लेकिन अभी तक बात पूरी तरह बनी नहीं है।
ट्रंप ने अपने बयान में कहा, “ईरान निश्चित रूप से इस आर्थिक मंदी से बाहर निकलने के लिए समझौता करना चाहता है, लेकिन उनके मौजूदा प्रस्तावों और शर्तों से हम अभी संतुष्ट नहीं हैं। अगर वे सही शर्तों पर राजी नहीं हुए, तो हमें अपनी कार्रवाई को अंजाम तक पहुंचाना होगा।”
अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक कोई लिखित और औपचारिक समझौता नहीं हो जाता, तब तक ईरानी बंदरगाहों पर लगी उसकी समुद्री पाबंदियां नहीं हटाई जाएंगी। इस पूरे विवाद का असर अब अमेरिकी घरेलू राजनीति पर भी दिखने लगा है, जहां बढ़ती ईंधन की कीमतों ने मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले ट्रंप प्रशासन के सामने एक नई आर्थिक चुनौती खड़ी कर दी है।
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