
मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में लंबे समय से जारी भीषण तनाव और युद्ध की विभीषिका के बीच एक बहुत बड़ी कूटनीतिक हलचल सामने आई है। हर किसी के जेहन में उठ रहे सबसे बड़े सवाल ‘आखिर ईरान-अमेरिका युद्ध कब खत्म होगा?’ के बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर शुक्रवार 22 मई 2026 को अचानक ईरान की राजधानी तेहरान पहुंच गए हैं। अंतरराष्ट्रीय रणनीतिकारों के मुताबिक, फील्ड मार्शल मुनीर की यह यात्रा बेहद संवेदनशील समय पर हो रही है और इसका एकमात्र मुख्य मकसद मध्य पूर्व में जारी जंग को हमेशा के लिए शांत करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच किसी अंतिम समझौते का रास्ता साफ करना है।
पाकिस्तानी सेना के आधिकारिक मुख्यालय (ISPR) द्वारा जारी एक बयान में पुष्टि की गई है कि फील्ड मार्शल मुनीर का यह तेहरान दौरा पर्दे के पीछे लंबे समय से चल रही अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की कोशिशों का ही एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। तेहरान के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरने के बाद ईरान के गृह मंत्री एस्कंदर मोमेनी ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख का बेहद गर्मजोशी से स्वागत किया। इस कूटनीतिक मिशन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस मौके पर पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी पहले से ही हवाई अड्डे पर मौजूद थे, जो पिछले कुछ दिनों से ईरान में ही डेरा डाले हुए हैं।
एक महीने में दूसरा गुप्त दौरा: गृह मंत्री मोहसिन नकवी की बातचीत में प्रगति के संकेत
पड़ोसी देश के रक्षा सूत्रों के मुताबिक, एक महीने से भी कुछ कम समय के भीतर फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का यह दूसरा तेहरान दौरा है। यह अचानक यात्रा ऐसे समय में बुलाई गई है जब पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी द्वारा ईरानी नेतृत्व के साथ की गई शुरुआती बातचीत में कुछ सकारात्मक और बड़ी प्रगति होने की खबरें छनकर बाहर आई हैं। नकवी बुधवार से ही ईरान के दौर पर हैं और उन्होंने वहां के शीर्ष राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के साथ कई दौर की गुप्त बैठकें की हैं, जिसमें ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ हुई दो विशेष मुलाकातें भी शामिल हैं।
ईरान के सरकारी समाचार चैनल ‘प्रेस टीवी’ ने भी इस खबर को प्रमुखता से दिखाते हुए बताया कि फील्ड मार्शल मुनीर शुक्रवार को तेहरान पहुंचे हैं ताकि युद्धविराम को एक स्थाई शांति समझौते में बदलने के उद्देश्य से ईरान और वाशिंगटन के बीच चल रही बातचीत के एजेंडे को अंतिम रूप दिया जा सके। अपनी इस यात्रा के दौरान पाकिस्तानी सेना प्रमुख ईरान के कई अन्य महत्वपूर्ण गणमान्य व्यक्तियों और सैन्य कमांडरों से मिलेंगे, जहां ईरान-अमेरिका वार्ता के अलावा क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और आपसी हित के अन्य रणनीतिक मामलों पर गहन चर्चा की जाएगी।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो का बड़ा दावा: पाकिस्तान की ‘शटल डिप्लोमेसी’ आई सामने
इस पूरी हाई-प्रोफाइल यात्रा को लेकर शुरू में सस्पेंस बना हुआ था। दरअसल, पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी से जब हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के ईरान जाने के बारे में पूछा गया था, तो उन्होंने बेहद सधे हुए अंदाज में कहा था कि वह इस कूटनीतिक दौरे की खबरों को न तो पूरी तरह नकार सकते हैं और न ही इसकी आधिकारिक पुष्टि कर सकते हैं।
लेकिन इस सस्पेंस से पर्दा तब उठा जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने गुरुवार को वाशिंगटन में एक बड़ा बयान दिया। रूबियो ने पूरी दुनिया के सामने यह दावा किया था कि उन्हें पूरा विश्वास है कि पाकिस्तानी सैन्य प्रतिनिधि आज तेहरान की यात्रा पर होंगे और वहां के नेतृत्व से बात करेंगे। अमेरिकी विदेश मंत्री का यह बयान बिल्कुल सटीक साबित हुआ, क्योंकि पाकिस्तान के गृह मंत्री नकवी पहले से ही तेहरान में मौजूद रहकर जमीन तैयार कर रहे थे और शुक्रवार को आर्मी चीफ भी वहां पहुंच गए। पाकिस्तान इस समय दोनों देशों के बीच सीधे युद्ध को रोकने के लिए ‘शटल डिप्लोमेसी’ (अप्रत्यक्ष मध्यस्थता वार्ताओं) का सहारा ले रहा है।
जानिए कैसे शुरू हुई थी शांति की पहल: इस्लामाबाद में हुई थी पहली डायरेक्ट टॉक
ईरान और अमेरिका-इजरायल गठबंधन के बीच हफ्तों तक चले भीषण मिसाइल और हवाई हमलों के बाद जब पूरी दुनिया पर तीसरे विश्व युद्ध का खतरा मंडराने लगा था, तब पाकिस्तान ने ही बीच-बचाव करते हुए बीती 8 अप्रैल को एक अस्थाई युद्धविराम की मध्यस्थता की थी। इस सफल युद्धविराम के तुरंत बाद 11 और 12 अप्रैल को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में वर्षों बाद पहली बार अमेरिका और ईरान के शीर्ष राजनयिकों के बीच आमने-सामने की प्रत्यक्ष वार्ता (Direct Talks) आयोजित की गई थी। हालांकि, दोनों देशों के अड़ियल रुख के कारण वह पहले दौर की चर्चा बिना किसी बड़ी सफलता के समाप्त हो गई थी।
इस विफलता के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस्लामाबाद में होने वाले दूसरे दौर की वार्ता की योजनाओं को अचानक रद्द कर दिया था, जिसमें अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के वरिष्ठ सलाहकार जारेड कुशनर खुद भाग लेने वाले थे। हालांकि, बातचीत रद्द होने के बावजूद राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के व्यक्तिगत अनुरोध और कूटनीतिक दबाव को स्वीकार करते हुए युद्धविराम की अवधि को अनिश्चित काल के लिए आगे बढ़ा दिया था। अब पाकिस्तान इसी युद्धविराम को एक ठोस समझौते में बदलने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रहा है, ताकि दुनिया को इस महासंकट से निकाला जा सके।
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