भारत के बाद अब पाकिस्तान में भी बनी ‘कॉकरोच पार्टी’! युवाओं को लेकर छिड़ी बड़ी जंग, जानिए क्या है इनका असली एजेंडा और क्यों डरी सरकारें

इन दिनों इंटरनेट और सोशल मीडिया की दुनिया में एक बेहद अजीबोगरीब लेकिन बेहद शक्तिशाली राजनीतिक आंदोलन तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का नाम दिया गया है। भारत में शुरू हुए इस डिजिटल आंदोलन ने सोशल मीडिया पर लोकप्रियता और फॉलोअर्स के मामले में देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी भाजपा (BJP) को भी पीछे छोड़ दिया है। इस अनोखी पार्टी की गूंज अब सीमा पार पाकिस्तान तक पहुंच चुकी है। पड़ोसी देश पाकिस्तान, जिसकी हमेशा से भारत की हर ट्रेंडिंग चीज को कॉपी करने की आदत रही है, वहां के युवाओं ने भी झट से इस आईडिया को अपना लिया है और पाकिस्तान में भी कई ‘कॉकरोच पार्टियां’ अस्तित्व में आ गई हैं।

भारत में इस डिजिटल मूवमेंट के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने सुरक्षा और व्यवस्था का हवाला देकर इसके मुख्य सोशल मीडिया अकाउंट को ब्लॉक करने का आदेश दिया था। इसके बावजूद, पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बिना समय गंवाए एक नया अकाउंट तैयार कर लिया, जिससे एक बार फिर लाखों की संख्या में यूजर्स और युवा तेजी से जुड़ रहे हैं। इस अनोखे आंदोलन का पूरा फोकस देश भर में फैले बेरोजगार युवाओं, छात्रों और आम जनता की समस्याओं पर टिका हुआ है।

पाकिस्तान में ‘कॉकरोच अवामी पार्टी’ का उदय: सोशल मीडिया पर बने अकाउंट्स

भारत में कॉकरोच जनता पार्टी की अभूतपूर्व सफलता को देखते हुए पाकिस्तानी इंटरनेट यूजर्स ने भी अपने देश की व्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए इसी नाम का सहारा लिया है। पाकिस्तान के सोशल मीडिया स्पेस में इस समय ‘कॉकरोच अवामी लीग’, ‘कॉकरोच अवामी पार्टी’ और ‘मुत्तहिदा कॉकरोच मूवमेंट’ (MCM) जैसे कई नए अकाउंट्स और पेजेस धड़ाधड़ बनाए जा रहे हैं, जो वहां के युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो रहे हैं।

इनमें से ‘कॉकरोच अवामी पार्टी’ के आधिकारिक बायो में साफ तौर पर लिखा गया है, “यह युवाओं के लिए और युवाओं द्वारा पाकिस्तान के बेहतर भविष्य के लिए शुरू किया गया एक मजबूत पॉलिटिकल फ्रंट है।” पाकिस्तान में भी बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और खस्ताहाल राजनीतिक व्यवस्था से तंग आ चुके युवा इस नए डिजिटल अभियान की तरफ आकर्षित हो रहे हैं।

आखिर क्या है इन ‘कॉकरोच पार्टियों’ का मुख्य एजेंडा और लोगो का राज?

पाकिस्तान में बने इन डिजिटल आंदोलनों के बैनर और लोगो (Logo) भी बकायदा तैयार किए गए हैं, जिनमें कॉकरोच की तस्वीर को मुख्य प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। एक अन्य पाकिस्तानी कॉकरोच पार्टी के सोशल मीडिया बायो में बेहद दिलचस्प बात लिखी गई है, “जिन्हें इस सड़ चुके सिस्टम ने ‘कॉकरोच’ समझकर कुचलने की कोशिश की, हम उन्हीं दबे-कुचले आम आवाम की बुलंद आवाज हैं।”

इन सोशल मीडिया अकाउंट्स के पोस्ट और कंटेंट को देखकर इनका मुख्य एजेंडा साफ तौर पर समझ आता है। भारत की ही तरह पाकिस्तान में भी ये पार्टियां वहां की मौजूदा सत्ताधारी सरकार, भ्रष्टाचार और नीतियों का पुरजोर विरोध करने के लिए बनाई गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या ये पार्टियां केवल सोशल मीडिया पर लाइक्स और फॉलोअर्स तक ही सीमित रहती हैं या फिर भविष्य में जमीन पर उतरकर किसी बड़े आंदोलन का रूप लेती हैं। फिलहाल, दोनों ही देशों में इन कॉकरोच पार्टियों का पूरा फोकस और ताकत वहां का युवा वर्ग ही है।

भारत में क्यों और किसने शुरू की ‘कॉकरोच जनता पार्टी’? जानिए इसके पीछे की पूरी कहानी

भारत में इस पूरे विवाद और आंदोलन की शुरुआत देश के माननीय मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की एक बेहद विवादित टिप्पणी के बाद हुई थी। एक सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कथित तौर पर बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से करते हुए कहा था कि ये बाद में चलकर मीडिया, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और आरटीआई (RTI) एक्टिविस्ट बन जाते हैं। इस टिप्पणी के सामने आते ही देश भर के युवाओं और छात्रों में भारी आक्रोश फैल गया। हालांकि, बाद में विवाद बढ़ता देख इस पर सफाई भी पेश की गई कि उनके बयान को गलत संदर्भ में दिखाया गया था और उनका मकसद युवाओं का अपमान करना कतई नहीं था।

लेकिन तब तक यह मुद्दा एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुका था। वर्तमान में अमेरिका में रहकर पढ़ाई कर रहे भारतीय मूल के छात्र और एक्टिविस्ट अभिजीत दीपके ने युवाओं के इस गुस्से को एक रचनात्मक और डिजिटल राजनीतिक मंच देते हुए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की स्थापना कर दी। देखते ही देखते इंस्टाग्राम और एक्स (ट्विटर) पर इस पार्टी से करोड़ों लोग जुड़ गए। इंस्टाग्राम पर तो इस अकाउंट ने लोकप्रियता के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त करते हुए महज कुछ ही समय में 2 करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स का आंकड़ा पार कर लिया है, जो इस बात का सबूत है कि रोजगार और युवाओं से जुड़े मुद्दे आज के दौर में कितने संवेदनशील और महत्वपूर्ण हैं।