बहुमुखी कलाकार पीयूष मिश्रा अपनी बेबाकी के लिए जाने जाते हैं, लेकिन हाल ही में उन्होंने अपनी निजी जिंदगी और शादीशुदा रिश्तों के ‘अंधेरे कोनों’ को जिस ईमानदारी से दुनिया के सामने रखा है, उसने हर किसी को चौंका दिया है। अपनी आत्मकथा ‘तुम्हारी औकात क्या है’ के संदर्भ में बात करते हुए पीयूष ने स्वीकार किया कि वे एक समय में एक “बुरे पति” और “गैर-जिम्मेदार साथी” थे। उनकी यह कहानी गिल्ट, बेवफाई और फिर आत्म-सुधार के एक लंबे सफर की दास्तां है।
रिश्तों के प्रति बदला नजरिया: ‘जवानी का प्यार और बुढ़ापे का साथ’
पीयूष मिश्रा ने स्वीकार किया कि उम्र के साथ प्यार की परिभाषा बदल जाती है। उन्होंने कुछ प्रमुख बिंदुओं पर अपने विचार साझा किए:
जिम्मेदारी का अभाव: पीयूष ने माना कि शुरुआत में वे शादी को एक बड़ी जिम्मेदारी के रूप में नहीं देखते थे। उनके अनुसार, जवानी में प्यार सहज होता है, लेकिन उसे निभाने के लिए जिस परिपक्वता की जरूरत होती है, वह उनमें नहीं थी।
भावनात्मक दूरी: उन्होंने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि उन्हें यह समझने में 10 से 15 साल लग गए कि प्रिया उनकी पत्नी हैं। उससे पहले वे उन्हें केवल घर संभालने वाली और बच्चों की देखभाल करने वाली एक महिला के रूप में देखते थे।
असामाजिक व्यवहार: अभिनेता ने खुद को उस दौर में “बेहद रूखा” और “इमोशनली डिटैच्ड” बताया।
प्रिया का त्याग: ‘वह मेरे लिए घर छोड़कर भाग आई थी’
पीयूष ने अपनी पत्नी प्रिया नारायणन (आर्किटेक्ट) की सहनशीलता को अपनी शादी बचने की इकलौती वजह बताया।
“प्रिया ने अपने माता-पिता की मर्जी के खिलाफ जाकर मुझसे शादी की थी। उसने कहा था कि वह मुझे कभी नहीं छोड़ेगी। यह उसकी महानता थी कि उसने मेरे सबसे बुरे दौर में मेरा साथ दिया। आज मैं समझता हूं कि मैं कितना भाग्यशाली हूं।”
वो पल जब सब कुछ सच कह दिया: ‘एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर और गिल्ट’
पीयूष के जीवन में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब उन्होंने अपनी पत्नी के सामने अपनी सारी गलतियों का कच्चा चिट्ठा खोल दिया।
सच का सामना: उन्होंने अपने एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स (अतिरिक्त वैवाहिक संबंध) के बारे में प्रिया को सब कुछ बता दिया।
भावनात्मक कैथार्सिस: इस बातचीत के दौरान दोनों फूट-फूट कर रोए और एक-दूसरे को गले लगाया। पीयूष के अनुसार, इस ईमानदारी ने उनके बीच के बोझ को हल्का कर दिया और उनके रिश्ते को एक नई और मजबूत नींव दी।
सुधार का समय: सच बोलने की हिम्मत जुटाने में उन्हें लगभग 5 से 6 साल का समय लगा।
आज का सच: एक सुधरा हुआ रिश्ता
1995 में शादी के बंधन में बंधे पीयूष और प्रिया आज अपने दो बेटों, जोश और जय के साथ एक खुशहाल जीवन बिता रहे हैं। पीयूष का मानना है कि अब वे एक बेहतर पति हैं क्योंकि उन्होंने अपनी गलतियों से सीखा है और सहानुभूति विकसित की है। उनकी यह स्वीकारोक्ति उन लोगों के लिए एक सबक है जो रिश्तों में ईमानदारी और जिम्मेदारी के महत्व को कम आंकते हैं।
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