
मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के पुलिस महकमे और प्रशासनिक गलियारों से इस समय एक बहुत बड़ी और कड़क खबर सामने आ रही है। राज्य के अलग-अलग थानों में लंबे समय से एक ही सीट या एक ही क्षेत्र में जमे पुलिसकर्मियों का जल्द ही बोरिया-बिस्तर बंधने वाला है। प्रदेश के पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने कानून-व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने और कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए एक बड़े फेरबदल की व्यापक तैयारी शुरू कर दी है।
सूबे के पुलिस महानिदेशक (DGP) कैलाश मकवाना ने इस मामले में बेहद सख्त और कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि अब सूबे का कोई भी पुलिस अधिकारी या मैदानी कर्मचारी एक ही थाने के भीतर 4 साल से ज्यादा की अवधि तक नहीं टिक पाएगा। इस ऐतिहासिक और कड़े आदेश को अमलीजामा पहनाने के लिए भोपाल और इंदौर के पुलिस कमिश्नरों समेत मध्य प्रदेश के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) को लिखित दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
क्यों लिया गया रोटेशन सिस्टम लागू करने का कड़ा फैसला?
पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ सूत्रों के मुताबिक, लंबे समय से पीएचक्यू को फील्ड और खुफिया तंत्र से लगातार यह गंभीर शिकायतें मिल रही थीं कि कई थानों में वर्षों से जमे कुछ अधिकारी और कर्मचारी स्थानीय स्तर पर अपने निजी समीकरण बना लेते हैं। इसके कारण न केवल पुलिसिंग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता प्रभावित हो रही थी, बल्कि आम फरियादियों को न्याय मिलने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
मुख्यालय का सख्त संदेश: इस प्रशासनिक शिथिलता और थानों के भीतर बनने वाले ‘नेक्सस’ को पूरी तरह से तोड़ने के लिए डीजीपी कैलाश मकवाना ने ‘रोटेशन सिस्टम’ (Rotation System) को कड़ाई से लागू करने का बड़ा फैसला लिया है। नए नियम के तहत तय समय-सीमा (4 साल) पूरी होते ही संबंधित पुलिसकर्मी का ट्रांसफर गैर-विवादित और दूसरे सर्किल या थाने में ऑटोमैटिक प्रोसेस के तहत कर दिया जाएगा।
आदेश के बाद पुलिस महकमे में मची भारी खलबली
डीजीपी दफ्तर से जारी हुए इस कड़े और स्पष्ट आदेश के बाद पूरे मध्य प्रदेश पुलिस महकमे के निचले से लेकर मध्यम स्तर के स्टाफ में हलचल और हड़कंप मच गया है। खासकर उन पुलिसकर्मियों, बीट प्रभारियों और थाना प्रभारियों की चिंताएं और सिरदर्द काफी ज्यादा बढ़ गया है, जो राजनीतिक रसूख या अन्य जुगाड़ के दम पर सालों से मलाईदार थानों में अपनी पोस्टिंग बरकरार रखे हुए थे।
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि आने वाले कुछ ही दिनों के भीतर भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन समेत प्रदेश भर के सैकड़ों थानों का पूरा चेहरा और स्टाफ पूरी तरह से बदलता हुआ नजर आएगा। इस बड़े बदलाव का सीधा असर जमीनी स्तर पर पुलिस की कार्यशैली को सुधारने और जनता के बीच खाकी की छवि को और अधिक मजबूत व निष्पक्ष बनाने में देखने को मिल सकता है। जिला कप्तानों ने डीजीपी के आदेश के आलोक में अपने-अपने जिलों में 4 साल की अवधि पार कर चुके पुलिसकर्मियों की सूचियां (Scrutiny List) तैयार करना भी शुरू कर दिया है।
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