UP Power Crisis: भीषण गर्मी में हांफा बिजली सिस्टम, लखनऊ में सड़कों पर उतरे परेशान लोग

उत्तर प्रदेश में सूर्यदेव के कड़े तेवर और भीषण लू (Heatwave) के बीच बिजली संकट ने विकराल रूप धारण कर लिया है। दिन और रात के तापमान में ज्यादा अंतर न होने की वजह से पूरे 24 घंटे बिजली की कल्ट डिमांड बनी हुई है। इस कड़े लोड के कारण पूरे प्रदेश की बिजली व्यवस्था चरमरा गई है।

राजधानी लखनऊ समेत राज्य के कई हिस्सों में घोषित कटौती न होने के बावजूद लोकल फॉल्ट, ट्रांसफार्मर ओवरलोडिंग और एरियल बंच कंडक्टर (ABC) के जलने से सप्लाई घंटों बाधित हो रही है। बिजली संकट की कूटनीतिक गूंज अब शासन स्तर पर भी सुनाई दे रही है; कैबिनेट मंत्री असीम अरुण ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर अपने क्षेत्र कन्नौज में बिजली कटौती का कड़ा मुद्दा उठाया है।

लखनऊ में टूटा जनता के सब्र का बांध, सड़कों पर भारी बवाल

लखनऊ शहर में बिजली की खपत 1,853 मेगावाट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है, जिसने लखनऊ इंटरग्रेटेड सप्लाई अथॉरिटी (लेसा) के पूरे सिस्टम को घुटनों पर ला दिया है। लो-वोल्टेज और घंटों की अघोषित बिजली कटौती से बेहाल जनता का गुस्सा सोमवार और मंगलवार को सड़कों पर फूट पड़ा।

इन इलाकों में हुआ चक्काजाम: लखनऊ के आरडीएसओ, राजाजीपुरम, एफसीआई, उतरेठिया, अहिबरनपुर, फैजुल्लागंज, दाऊदनगर, चौक, कमता और नादरगंज उपकेंद्र से जुड़े इलाकों में परेशान नागरिकों ने सड़क पर उतरकर भारी बवाल, चक्काजाम और बिजली कर्मचारियों के साथ मारपीट तक की।

मई में ही जून जैसी कल्ट डिमांड, टूट रहे हैं सारे रिकॉर्ड

आमतौर पर बिजली की अधिकतम मांग जून की उमस भरी गर्मी में चरम पर पहुंचती है, लेकिन इस साल मई महीने में ही मांग के कड़े आंकड़े बीते सालों के रिकॉर्ड को छू रहे हैं।

मई 2026 में बिजली की लगातार बढ़ती मांग (मेगावॉट में):

तारीख अधिकतम मांग (Maximum Demand) न्यूनतम मांग (Minimum Demand)
15 मई 27,032 मेगावॉट 16,869 मेगावॉट
16 मई 27,776 मेगावॉट 18,467 मेगावॉट
17 मई 28,904 मेगावॉट 19,847 मेगावॉट
18 मई 29,330 मेगावॉट 20,482 मेगावॉट

18 मई इस साल का सबसे कड़ा दिन दर्ज किया गया, जब राज्य में 617.1 मिलियन यूनिट बिजली की आपूर्ति की गई। तुलनात्मक रूप से देखें तो साल 2024 में जून के महीने में अधिकतम आपूर्ति 659.5 मिलियन यूनिट और साल 2025 में 655.9 मिलियन यूनिट पहुंची थी। इस बार मई में ही न्यूनतम आपूर्ति का ग्राफ पुराने सालों से काफी ऊपर निकल चुका है, जिससे आने वाले दिनों में और बड़े संकट की आशंका है।

आखिर क्यों फुंक रहे हैं ट्रांसफार्मर? एक्सपर्ट्स का कड़ा कूटनीतिक विश्लेषण

उत्तर प्रदेश में इन दिनों औसतन 700 से ज्यादा ट्रांसफार्मर रोज फुंक रहे हैं। बिजली क्षेत्र के विशेषज्ञों ने इसके पीछे दो सबसे बड़े कारण बताए हैं:

1. घटिया क्वालिटी के एबीसी (ABC) तार और शॉर्ट सर्किट

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा के मुताबिक, इस समय बिजली सप्लाई ठप होने की सबसे बड़ी वजह एरियल बंच कंडक्टर (ABC) का जलना है। जब लोड बढ़ता है तो ये केबल जल जाते हैं, जिससे कड़ा शॉर्ट सर्किट होता है और सीधे ट्रांसफार्मर फुंक जाते हैं। उन्होंने एबीसी की क्वालिटी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि अविकसित कॉलोनियों और बहुमंजिला इमारतों में नया ट्रांसफार्मर लगाने का खर्च उपभोक्ताओं पर डालने का कूटनीतिक दबाव बनाया जा रहा है।

2. 25% से ज्यादा ट्रांसफार्मर अपनी उम्र पूरी कर चुके

विद्युत परिषद अभियंता संघ के महासचिव जितेंद्र सिंह गुर्जर ने सिस्टम की एक और कड़वी हकीकत उजागर की है। उनके अनुसार, उत्तर प्रदेश में लगे कुल ट्रांसफार्मरों में से 25 फीसदी से ज्यादा ट्रांसफार्मर अपनी तय आयु (लाइफस्पैन) पूरी कर चुके हैं। ये ट्रांसफार्मर अपनी अधिकतम मरम्मत (Overhauling) की सीमा भी पार कर चुके हैं, जिसके कारण ये भीषण गर्मी का कड़ा लोड सहने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं।