हरिद्वार: उत्तराखंड में सरकारी जमीनों पर बने अवैध धार्मिक स्थलों और मदरसों के खिलाफ धामी सरकार का अभियान तेज होता जा रहा है। इसी कड़ी में हरिद्वार जिला प्रशासन ने जिले के 131 मदरसों की सघन जांच की, जिसमें चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच में 23 मदरसों में गंभीर अनियमितताएं और नियमों का उल्लंघन पाया गया है, जिसके बाद प्रशासन ने इन पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी कर ली है।
23 मदरसे जांच के घेरे में
प्रशासन की ओर से गठित विशेष टीमों ने मदरसों के भौतिक सत्यापन, छात्र संख्या, शिक्षकों की उपस्थिति और आय-व्यय के विवरण की जांच की थी।
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अवैध संचालन: 23 मदरसे ऐसे पाए गए हैं जिनके पास संचालन के लिए आवश्यक वैध दस्तावेज या मान्यता नहीं है।
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मान्यता का संकट: कई मदरसे मानक के अनुरूप नहीं चल रहे थे, जिसके कारण उनकी मान्यता रद्द करने की सिफारिश की जा रही है।
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फर्जीवाड़ा: कुछ मामलों में कागजों पर छात्र संख्या अधिक दिखाई गई थी, जबकि मौके पर स्थिति इसके विपरीत मिली।
जिलाधिकारी का सख्त रुख
हरिद्वार के जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जो भी मदरसे अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं या मानकों को पूरा नहीं करते, उन्हें तुरंत बंद करने की प्रक्रिया शुरू की जाए। इसके साथ ही, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को इन सभी 23 मदरसों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगने के निर्देश दिए गए हैं।
अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर नजर
यह कार्रवाई उत्तराखंड सरकार के उस व्यापक अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत सरकारी संपत्तियों पर किए गए अतिक्रमण और अवैध निर्माणों को चिन्हित किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य शिक्षा के नाम पर चल रहे अवैध केंद्रों पर लगाम कसना और यह सुनिश्चित करना है कि सभी संस्थान नियमों के दायरे में रहकर कार्य करें।
परियोजना का प्रभाव:
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पारदर्शिता: मदरसों के पंजीकरण और फंडिंग में पारदर्शिता आएगी।
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गुणवत्ता: केवल वही संस्थान संचालित हो पाएंगे जो सरकार द्वारा निर्धारित शैक्षणिक मानकों को पूरा करेंगे।
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अतिक्रमण मुक्त: सरकारी भूमि पर बने अवैध ढांचों को हटाने में मदद मिलेगी।
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