उत्तरकाशी के इन गांवों में आज भी नेटवर्क का अकाल, ग्रामीणों ने दी चुनाव बहिष्कार की चेतावनी

उत्तरकाशी: एक तरफ जहां पूरा देश 5G तकनीक और ‘डिजिटल इंडिया’ की सफलता का जश्न मना रहा है, वहीं उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो आधुनिक भारत के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जिला मुख्यालय से मात्र 40 किलोमीटर दूर स्थित डुण्डा विकासखंड के पटूडी और ढुगलधार गांव आज भी संचार क्रांति की पहुंच से कोसों दूर हैं। यहाँ के ग्रामीणों के लिए आज भी मोबाइल फोन किसी ‘खिलौने’ से ज्यादा कुछ नहीं है।

ऊंचे पेड़ों और चट्टानों पर ‘नेटवर्क की तलाश’

पटूडी और ढुगलधार के निवासियों की दिनचर्या का एक बड़ा हिस्सा मोबाइल सिग्नल खोजने में बीतता है। गाँव में टावर न होने के कारण स्थिति यह है कि:

  • लोग अपनों से बात करने के लिए घर की छतों, ऊंचे पेड़ों या दुर्गम पहाड़ियों की चोटियों पर मोबाइल टांगने को मजबूर हैं।

  • बुजुर्ग माता-पिता अपने शहर में रह रहे बच्चों की आवाज सुनने के लिए घंटों ऊंची चट्टानों पर इस उम्मीद में बैठे रहते हैं कि शायद उनके फोन में नेटवर्क की एक ‘डंडी’ दिख जाए।

शिक्षा, बैंकिंग और स्वास्थ्य सेवाएं ठप

डिजिटल युग में नेटवर्क न होना केवल बातचीत तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि इससे पूरा जनजीवन प्रभावित हो रहा है:

  • शिक्षा: ऑनलाइन पढ़ाई के दौर में यहाँ के बच्चे और युवा खुद को देश की मुख्यधारा से कटा हुआ महसूस कर रहे हैं।

  • बैंकिंग और सरकारी योजनाएं: डिजिटल ट्रांजैक्शन और ऑनलाइन सरकारी सेवाओं का लाभ यहाँ के लोग नहीं उठा पा रहे हैं।

  • आपातकालीन स्वास्थ्य: किसी के बीमार होने पर एम्बुलेंस बुलाना या डॉक्टर से संपर्क करना एक बड़ी चुनौती बन जाता है, जिससे कई बार जान पर बन आती है।

‘नेटवर्क नहीं तो वोट नहीं’: ग्रामीणों का कड़ा फैसला

क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की निरंतर अनदेखी से ग्रामीणों का आक्रोश अब फूट पड़ा है। बार-बार मिलने वाले खोखले आश्वासनों से तंग आकर पटूडी और ढुगलधार के निवासियों ने एकजुट होकर बड़ा ऐलान किया है:

ग्रामीणों की चेतावनी: “यदि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले गांव में मोबाइल टावर लगाकर नेटवर्क की समस्या दूर नहीं की गई, तो पूरा क्षेत्र सामूहिक रूप से मतदान का बहिष्कार करेगा।”

पलायन का मुख्य कारण बनती असुविधाएं

बुनियादी सुविधाओं के अभाव में इन सीमांत गांवों से नई पीढ़ी का पलायन तेजी से बढ़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब शिक्षा और रोजगार के लिए जरूरी इंटरनेट ही नहीं होगा, तो युवा गाँव में रहकर क्या करेंगे। प्रशासन की इस उपेक्षा ने अब एक बड़े जन-आंदोलन की नींव रख दी है।