
वैश्विक स्तर पर, विशेषकर पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते तनाव का असर अब भारत की जेब पर पड़ता नजर आ रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने संकेत दिए हैं कि यदि सीमा पार संघर्ष लंबा खिंचता है, तो सरकार कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमतों का बोझ आम जनता पर डाल सकती है। इसका सीधा मतलब है कि आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।
RBI गवर्नर की चेतावनी: “खर्च का बोझ उठाना होगा”
एक हालिया कार्यक्रम में गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि अब तक सरकारी तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का बोझ खुद उठा रही थीं, ताकि घरेलू महंगाई को नियंत्रित रखा जा सके।
-
महंगाई का गणित: अप्रैल में भारत की खुदरा महंगाई दर 3.48 प्रतिशत रही, जो उम्मीद से कम थी। इसका मुख्य कारण ईंधन की कीमतों का स्थिर रहना था।
-
सप्लाई चेन का खतरा: गवर्नर ने आगाह किया कि पश्चिम एशिया संकट के कारण सप्लाई चेन में रुकावटें आ रही हैं। यदि यह स्थिति जारी रही, तो सरकार के लिए सब्सिडी और राजकोषीय तालमेल बैठाना मुश्किल होगा और कीमतों में बढ़ोतरी अपरिहार्य हो जाएगी।
पीएम मोदी का ‘विदेशी मुद्रा बचाओ’ मिशन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) को सुरक्षित रखने के लिए देशवासियों से स्वेच्छा से कुछ त्याग करने और स्मार्ट विकल्प चुनने की अपील की है। हैदराबाद में एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए:
-
ईंधन का विवेकपूर्ण उपयोग: पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहन (जैसे मेट्रो) का उपयोग करें।
-
स्मार्ट विकल्प: कार पुलिंग (Car Pooling), इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देना और जहां संभव हो, ‘वर्क फ्रॉम होम’ (WFH) को अपनाना।
-
सोने की खरीदारी टालें: पीएम ने अपील की है कि कम से कम एक साल तक सोने की खरीद को स्थगित कर दें। गौरतलब है कि सरकार ने सोने पर कस्टम ड्यूटी को पहले ही दोगुना से अधिक कर दिया है ताकि आयात कम किया जा सके।
-
विदेश यात्रा: विदेशी मुद्रा बचाने के लिए अनावश्यक विदेश यात्राओं को कुछ समय के लिए टालने का सुझाव दिया गया है।
अर्थव्यवस्था पर असर और ग्रोथ का अनुमान
रिजर्व बैंक ने इस वित्त वर्ष के लिए 6.9 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि (Growth Rate) का अनुमान लगाया है। हालांकि, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि ग्लोबल टेंशन के कारण ईंधन की कीमतें बढ़ती हैं, तो न केवल महंगाई (Inflation) बढ़ेगी, बल्कि आर्थिक विकास की गति भी धीमी पड़ सकती है। वर्तमान में रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर स्थिर है, लेकिन भविष्य की चुनौतियां RBI के लिए नीतिगत फैसले लेना कठिन बना सकती हैं।
girls globe