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हनुमान जयंती 2026 तेलुगु : 12 मई को दक्षिण भारत में मचेगी धूम, जानें साल में दो बार क्यों मनाई जाती है बजरंगबली की जयंती?

 उत्तर भारत में चैत्र पूर्णिमा के दिन हनुमान जयंती मनाए जाने के बाद, अब दक्षिण भारत (विशेषकर आंध्र प्रदेश और तेलंगाना) में हनुमान जयंती की तैयारियां जोरों पर हैं। साल 2026 में तेलुगु हनुमान जयंती 12 मई को मनाई जाएगी। यह उत्सव केवल एक दिन का नहीं, बल्कि 41 दिनों की लंबी ‘हनुमान दीक्षा’ के समापन का प्रतीक होता है।

तेलुगु हनुमान जयंती 2026 की तिथि और मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, दक्षिण भारत में हनुमान जयंती वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को मनाई जाती है।

  • दशमी तिथि प्रारंभ: 11 मई 2026 को शाम 06:45 बजे से।

  • दशमी तिथि समाप्त: 12 मई 2026 को शाम 05:12 बजे तक।

  • उदयातिथि: 12 मई को होने के कारण मुख्य उत्सव इसी दिन मनाया जाएगा।

आखिर साल में दो बार क्यों मनाई जाती है हनुमान जयंती?

हनुमान जी के जन्मोत्सव को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में दो अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं:

  1. चैत्र पूर्णिमा (उत्तर भारत): उत्तर भारत और महाराष्ट्र में चैत्र मास की पूर्णिमा को हनुमान जयंती मनाई जाती है। माना जाता है कि इसी दिन माता अंजनी की कोख से पवनपुत्र का जन्म हुआ था।

  2. वैशाख दशमी (दक्षिण भारत): आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में वैशाख कृष्ण दशमी को हनुमान जयंती मनाई जाती है। यह तिथि हनुमान जी के जन्म के बजाय उनकी आध्यात्मिक यात्रा और प्रभु राम से उनके मिलन के विशेष कालखंड को समर्पित मानी जाती है।

  3. नरक चतुर्दशी (दीपावली के समय): कई स्थानों पर कार्तिक मास की कृष्ण चतुर्दशी को भी हनुमान जयंती मनाई जाती है। वाल्मीकि रामायण के कुछ अंशों के अनुसार, इसी दिन उनका जन्म हुआ था।

दक्षिण भारत में कैसे मनाया जाता है यह पर्व?

दक्षिण भारत में यह उत्सव बेहद खास होता है। चैत्र पूर्णिमा से भक्त 41 दिनों का ‘हनुमान मंडल दीक्षा’ (Hanuman Mandala Deeksha) व्रत शुरू करते हैं, जिसका समापन वैशाख दशमी को होता है।

  • हनुमान दीक्षा: इन 41 दिनों तक भक्त नंगे पैर रहते हैं, नारंगी रंग के वस्त्र धारण करते हैं और ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं।

  • अभिषेकम: 12 मई को मंदिरों में ‘पंचामृत’ और ‘फलों के रस’ से भगवान का भव्य अभिषेक किया जाएगा।

  • हनुमान चालीसा का पाठ: इस दिन सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करने की परंपरा है।

धार्मिक महत्व

मान्यता है कि वैशाख मास में हनुमान जी की पूजा करने से शनि दोष और मंगल दोष से मुक्ति मिलती है। दक्षिण भारतीय परंपरा में इस दिन को विजय और शक्ति के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। विशेष रूप से उन लोगों के लिए यह दिन महत्वपूर्ण है जो साहस और मानसिक शांति की कामना रखते हैं।