
गीर सोमनाथ: गुजरात के प्रभास पाटन स्थित प्रथम ज्योतिर्लिंग भगवान सोमनाथ के मंदिर में सोमवार को एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। ‘सोमनाथ अमृत पर्व-2026’ के समापन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर के 90 मीटर ऊंचे शिखर पर ऐतिहासिक ‘कुंभाभिषेक’ संपन्न किया। आजादी के बाद मंदिर के पुनर्निर्माण और प्राण-प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित यह चार दिवसीय उत्सव (8 मई से 11 मई) भक्ति और आधुनिक इंजीनियरिंग के अनूठे संगम का गवाह बना।
90 मीटर की ऊंचाई पर 1.86 टन वजनी स्वर्ण कलश से अभिषेक
मंदिर के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब शिखर के ऊपर ‘कुंभाभिषेक’ की रस्म अदा की गई। दक्षिण भारतीय मंदिरों की परंपरा के अनुरूप किए गए इस अनुष्ठान के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं:
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विशाल स्वर्ण कलश: अभिषेक के लिए 8 फीट ऊंचा और 760 किलोग्राम वजनी एक विशेष कलश तैयार किया गया था। 1100 लीटर की क्षमता वाले इस कलश में जब 11 पवित्र तीर्थों का जल भरा गया, तो इसका कुल वजन लगभग 1.86 मीट्रिक टन हो गया।
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जीरो लोड इंजीनियरिंग: मंदिर की प्राचीन और संवेदनशील संरचना पर कोई दबाव न पड़े, इसके लिए ‘जीरो लोड सिद्धांत’ अपनाया गया। 350 टन की एक विशाल ऑल-टेरेन क्रेन के जरिए कलश को शिखर तक पहुंचाया गया।
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11 तीर्थों का पवित्र जल: देश के 11 प्रमुख तीर्थ स्थलों से लाए गए पवित्र जल से शिखर का अभिषेक किया गया, जो भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बना।
पीएम मोदी ने की महापूजा, जारी किया स्मारक सिक्का और डाक टिकट
शिखर पर कुंभाभिषेक और ध्वजारोहण के बाद प्रधानमंत्री ने गर्भगृह में भगवान सोमनाथ की विशेष महापूजा की। इस अवसर पर उन्होंने ‘अमृत पर्व’ की स्मृति में एक स्मारक डाक टिकट और चांदी का सिक्का भी जारी किया। पीएम ने अपने संबोधन में कहा कि सोमनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत के आत्मविश्वास और पुनरुत्थान का प्रतीक है। उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल को भी नमन किया, जिनके संकल्प से इस भव्य मंदिर का पुनर्निर्माण संभव हुआ था।
1666 स्वर्ण कलशों से दमक उठा सोमनाथ धाम
अमृत पर्व के दौरान सोमनाथ मंदिर का वैभव देखते ही बन रहा था। मंदिर के शिखर पर लगे 1666 स्वर्ण मढ़ित कलशों और 14,200 ध्वजाओं ने पूरे परिसर को अलौकिक आभा से भर दिया। रविवार रात को हुई ‘लेजर लाइट एंड साउंड शो’ ने मंदिर के विनाश से लेकर पुनर्निर्माण तक की गौरवगाथा को जीवंत कर दिया। इस ऐतिहासिक समारोह में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी और सोमनाथ ट्रस्ट के पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
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