
बीजिंग: दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियों के बीच एक बार फिर हाथ मिलने जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इसी हफ्ते (13-15 मई, 2026) अपनी पहली बीजिंग यात्रा पर रवाना हो रहे हैं, जहां उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होगी। लगभग 9 साल बाद किसी अमेरिकी राष्ट्रपति का यह पहला चीन दौरा है। हालांकि, बीजिंग के ‘ग्रेट हॉल ऑफ पीपल’ में होने वाली यह गुफ्तगू जितनी वाशिंगटन और बीजिंग के लिए अहम है, उससे कहीं ज्यादा भारत के लिए चिंता का सबब बन गई है।
भारत के लिए क्यों बढ़ रहा है खतरा? तीन मुख्य कारण
रक्षा और कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रम्प और जिनपिंग की यह मुलाकात भारत के लिए कई मोर्चों पर चुनौतियां खड़ी कर सकती है:
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अमेरिका का ‘ट्रांजैक्शनल’ रवैया: ट्रम्प अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के लिए जाने जाते हैं। जानकारों को डर है कि चीन से व्यापारिक डील या ईरान संकट (2026 Iran War) में बीजिंग की मदद लेने के बदले ट्रम्प प्रशासन भारत के हितों या सीमा विवाद (LAC) पर चुप्पी साध सकता है।
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इंडो-पैसिफिक विजन पर धुंध: अब तक अमेरिका इंडो-पैसिफिक में चीन को घेरने के लिए भारत का साथ देता रहा है। लेकिन अगर इस मीटिंग में चीन और अमेरिका के बीच कोई ‘पावर शेयरिंग’ समझौता होता है, तो हिंद महासागर में भारत का प्रभुत्व प्रभावित हो सकता है।
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ईरान संकट और ऊर्जा सुरक्षा: वर्तमान में चल रहे ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच ट्रम्प चाहते हैं कि चीन हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खुलवाने में मदद करे। इसके बदले में चीन एशिया में अपनी मनमानी करने की छूट मांग सकता है, जो भारत के लिए सीधा खतरा है।
‘रिस्क मैनेजमेंट’ या नई दोस्ती?
विशेषज्ञ इस शिखर सम्मेलन को ‘रिस्क मैनेजमेंट’ (जोखिम प्रबंधन) समिट कह रहे हैं। ट्रम्प का लक्ष्य अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए चीन से बड़े सौदे हासिल करना है, जिसमें अमेरिकी कृषि उत्पादों और बोइंग विमानों की खरीद शामिल हो सकती है। वहीं, चीन चाहता है कि अमेरिका उस पर लगे तकनीकी प्रतिबंधों (Semiconductors) में ढील दे। यदि इन दोनों के बीच ‘व्यापारिक सुलह’ होती है, तो वैश्विक बाजार में भारत के लिए कॉम्पिटिशन बढ़ जाएगा।
दिल्ली की नजर: क्या भारत को दरकिनार किया जाएगा?
भारत के विदेश मंत्रालय की इस पूरी यात्रा पर पैनी नजर है। पिछले कुछ वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच ‘आईसेट’ (iCET) जैसे महत्वपूर्ण रक्षा समझौते हुए हैं। सवाल यह है कि क्या ट्रम्प अपने ‘पुराने मित्र’ मोदी और भारत के साथ किए गए वादों को चीन के साथ एक बड़ी आर्थिक डील के लिए किनारे करेंगे? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रम्प की ‘लेन-देन’ वाली राजनीति में कोई भी गठबंधन स्थायी नहीं है, और यही अनिश्चितता भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
बीजिंग में ट्रम्प का शाही स्वागत
चीनी मीडिया के अनुसार, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ट्रम्प के लिए ‘स्टेट विजिट प्लस’ (State Visit-Plus) की तैयारी की है। बीजिंग की सड़कों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है और अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष वाहन ‘द बीस्ट’ (The Beast) को पहले ही वहां देखा जा चुका है। 14 मई को होने वाली मुख्य वार्ता के बाद पूरी दुनिया की नजरें जारी होने वाले ‘जॉइंट स्टेटमेंट’ पर होंगी।
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