वैश्विक पटल पर गहराते युद्ध के संकट और अस्थिर होती अर्थव्यवस्था के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता को सावधान किया है। हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने देशवासियों से उन आदतों को दोबारा अपनाने का आह्वान किया है, जो हमने कोरोना काल के दौरान सीखी थीं। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज ‘राष्ट्रभक्ति’ का मतलब केवल सीमा पर जान देना नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए छोटे-छोटे त्याग करना भी है।
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच कड़े फैसले: ‘विदेशी मुद्रा’ बचाना अब सबसे बड़ी चुनौती
प्रधानमंत्री की इन अपीलों के पीछे का सबसे मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की बढ़ती कीमतें हैं। खासकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के खतरों को देखते हुए पीएम मोदी ने आगाह किया कि इसका सीधा असर भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में हमें अपनी घरेलू मुद्रा को बचाने के लिए सख्त कदम उठाने होंगे।
सोना न खरीदें और विदेश यात्रा टालें: पीएम मोदी की 7 विशेष अपील
प्रधानमंत्री मोदी ने जनता के सामने सात सूत्रीय मांगें रखी हैं, जिन्हें उन्होंने ‘राष्ट्रहित’ में बेहद जरूरी बताया है:
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एक साल तक सोना न खरीदें: पीएम ने अपील की कि विदेशी मुद्रा बचाने के लिए कम से कम एक साल तक सोने के आभूषण या निवेश से बचें।
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वर्क फ्रॉम होम को प्राथमिकता: ऊर्जा और ईंधन की बचत के लिए कंपनियों और कर्मचारियों से फिर से घर से काम करने का आग्रह किया।
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पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग: निजी वाहनों के बजाय मेट्रो, बस और ट्रेनों का इस्तेमाल करें।
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कार-पूलिंग अपनाएं: अगर निजी वाहन जरूरी हो, तो अकेले चलने के बजाय कार-पूलिंग करें।
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विदेश यात्रा से परहेज: छुट्टियों के लिए विदेश जाने के बजाय देश के पर्यटन स्थलों को चुनें।
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नेचुरल फार्मिंग: किसानों से केमिकल खाद का उपयोग कम कर प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने को कहा।
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स्वदेशी और बचत: आयातित वस्तुओं की जगह स्वदेशी उत्पादों को अपनाएं।
कोरोना काल के संयम की याद: क्या फिर से लगने वाला है लॉकडाउन?
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कोरोना काल का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय देश ने जिस अनुशासन और संयम का परिचय दिया था, आज फिर उसकी जरूरत है। हालांकि उन्होंने किसी आधिकारिक लॉकडाउन की घोषणा नहीं की है, लेकिन उनके शब्दों से साफ है कि यदि जनता ने अभी से सावधानी नहीं बरती, तो आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है। उन्होंने कहा, “कोरोना के समय हमने जिन नियमों का पालन किया, वे अब हमारे स्वभाव में हैं, उन्हें फिर से लागू करना कठिन नहीं होगा।”
विपक्ष का तंज: राहुल गांधी बोले- ‘ये उपदेश नहीं, 12 साल की नाकामी है’
एक तरफ जहां सरकार इसे राष्ट्रहित का कदम बता रही है, वहीं नेता विपक्ष राहुल गांधी ने इसे सरकार की विफलता करार दिया है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा कि 12 साल सत्ता में रहने के बाद अगर पीएम को जनता से ये कहना पड़ रहा है कि क्या खरीदें और क्या न खरीदें, तो यह सरकार के आर्थिक कुप्रबंधन का सबसे बड़ा सबूत है। उन्होंने इसे जनता पर जिम्मेदारी डालकर जवाबदेही से बचने का प्रयास बताया।
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