
पटना: बिहार की एनडीए (NDA) सरकार के मंत्रियों की संपत्ति का ब्योरा सामने आते ही प्रदेश की सियासत में ‘अमीरी’ की चर्चा तेज हो गई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कैबिनेट के 32 मंत्री करोड़पति हैं। दिलचस्प बात यह है कि उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा समेत कई मंत्रियों की कुल संपत्ति मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से कहीं अधिक है। कैबिनेट सचिवालय द्वारा सार्वजनिक की गई इस जानकारी ने जनता के बीच नई उत्सुकता पैदा कर दी है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार: सादगी या कम संपत्ति?
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की चल-अचल संपत्ति पिछले साल की तुलना में मामूली रूप से बढ़ी है। उनके पास फिलहाल करीब 1.64 करोड़ रुपये की कुल संपत्ति है। इसमें दिल्ली के द्वारका में एक फ्लैट और पैतृक गांव में कुछ जमीन शामिल है। उनके पास नकदी (Cash) के नाम पर केवल कुछ हजार रुपये ही रहते हैं, जो उनकी ‘मिस्टर क्लीन’ की छवि को और पुख्ता करता है।
डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा की ‘अथाह’ दौलत
मुख्यमंत्री के मुकाबले उनके दोनों उपमुख्यमंत्री संपत्ति के मामले में काफी आगे हैं:
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सम्राट चौधरी: उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की कुल संपत्ति करीब 7.5 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। उनके पास पटना और अन्य शहरों में कीमती जमीनें और लग्जरी गाड़ियां हैं।
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विजय कुमार सिन्हा: दूसरे उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के पास भी 6 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति है। उनकी पत्नी के नाम पर भी अच्छी-खासी अचल संपत्ति और आभूषण दर्ज हैं।
कैबिनेट के सबसे अमीर मंत्री: कौन है नंबर-1?
नीतीश कैबिनेट में सबसे धनी मंत्रियों की सूची में कुछ नाम चौंकाने वाले हैं:
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अशोक चौधरी: भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी के पास करोड़ों की संपत्ति है। उनके परिवार के पास दिल्ली और बिहार के पॉश इलाकों में जमीन और फ्लैट्स हैं।
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सुमित कुमार सिंह: विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री सुमित सिंह भी राज्य के सबसे अमीर मंत्रियों में शुमार हैं। उनके पास पटना और जमुई में काफी अचल संपत्ति है।
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नीतिन नवीन: नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतिन नवीन की संपत्ति भी पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है।
गाड़ियों और गहनों का शौक: मंत्रियों की लाइफस्टाइल
संपत्ति के ब्योरे से यह भी पता चला है कि बिहार के मंत्रियों को लग्जरी गाड़ियों और सोने-चांदी के गहनों का काफी शौक है। अधिकांश मंत्रियों के पास फॉर्च्यूनर, स्कॉर्पियो और सफारी जैसी गाड़ियां हैं। वहीं, महिला मंत्रियों के साथ-साथ पुरुष मंत्रियों ने भी बड़ी मात्रा में सोने के आभूषणों का विवरण दिया है। कई मंत्रियों ने शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड्स में भी भारी निवेश कर रखा है।
क्यों सार्वजनिक की जाती है संपत्ति?
बिहार में यह एक परंपरा और नियम है कि हर साल के अंत या नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत में मुख्यमंत्री समेत सभी मंत्रियों को अपनी और अपने परिवार की चल-अचल संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करना होता है। इसका उद्देश्य सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाना और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना है। हालांकि, विपक्ष अक्सर इन आंकड़ों को लेकर सरकार पर निशाना साधता रहता है।
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