मंत्रियों की ‘क्लास’ में सम्राट का सख्त संदेश: बिना होमवर्क मीडिया के सामने न जाएं, पहले फाइलों को समझें फिर दें बयान

पटना: बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी इन दिनों एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। सरकार की छवि को लेकर बेहद गंभीर सम्राट चौधरी ने अपनी ही कैबिनेट के मंत्रियों को दो टूक नसीहत दे डाली है। उन्होंने साफ लहजे में कहा है कि मंत्री मीडिया से बात करने से पहले अपने विभाग की योजनाओं और विकास कार्यों की पूरी जानकारी रखें। सम्राट चौधरी का यह सख्त संदेश उस वक्त आया है जब विपक्षी दल लगातार सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। डिप्टी सीएम का मानना है कि अधूरी जानकारी के साथ मीडिया के सामने जाना न केवल मंत्री की छवि खराब करता है, बल्कि सरकार की साख पर भी बट्टा लगाता है।

फाइलों में सिर खपाएं मंत्री, जुबानी जमाखर्च से बचें

सम्राट चौधरी ने मंत्रियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे केवल उद्घाटन और शिलान्यास तक सीमित न रहें, बल्कि विभाग की बारीकियों को समझें। उन्होंने कहा कि अक्सर देखा जाता है कि मंत्री मीडिया के तीखे सवालों के सामने असहज हो जाते हैं क्योंकि उनके पास विभाग के आंकड़ों और प्रगति की सटीक जानकारी नहीं होती। डिप्टी सीएम ने कहा, “मंत्री को पता होना चाहिए कि उनके विभाग में क्या योजनाएं चल रही हैं, बजट का कितना हिस्सा खर्च हुआ है और जनता को उसका क्या लाभ मिल रहा है।” उन्होंने मंत्रियों को सलाह दी है कि वे नियमित रूप से अपने विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक करें और फाइलों का अध्ययन करें।

‘सरकार की फजीहत बर्दाश्त नहीं’: विपक्ष के हमलों को धार न दे लापरवाही

राजनीतिक गलियारों में सम्राट चौधरी के इस रुख को ‘डैमेज कंट्रोल’ के तौर पर भी देखा जा रहा है। दरअसल, पिछले कुछ समय में कुछ मंत्रियों के विरोधाभासी बयानों के कारण सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा था। सम्राट चौधरी ने चेतावनी दी है कि किसी भी मंत्री की लापरवाही से सरकार की फजीहत बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि मीडिया ब्रीफिंग के दौरान मंत्रियों को पूरी तरह से ‘अपडेटेड’ रहना चाहिए ताकि वे विपक्ष के दुष्प्रचार का तार्किक जवाब दे सकें। यह निर्देश भाजपा और जदयू दोनों ही कोटे के मंत्रियों के लिए एक तरह से ‘वार्निंग बेल’ माना जा रहा है।

कार्यप्रणाली में बदलाव की तैयारी, मंत्रियों की होगी ‘परफॉर्मेंस ऑडिट’

सूत्रों का कहना है कि सम्राट चौधरी अब मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा भी कर सकते हैं। वे चाहते हैं कि सरकार की विकास योजनाओं का शोर जमीन पर सुनाई दे, न कि विवादों में। मंत्रियों को यह भी कहा गया है कि वे जनता के बीच जाकर केंद्र और राज्य सरकार की साझा उपलब्धियों को गिनाएं। इस नई गाइडलाइन के बाद अब सचिवालय से लेकर मंत्रियों के आवास तक हलचल बढ़ गई है। अब देखना दिलचस्प होगा कि सम्राट की इस ‘पाठशाला’ के बाद बिहार के मंत्री कितनी संजीदगी से अपनी फाइलों और मीडिया के सवालों का सामना करते हैं।