ईरान का अमेरिका को दोटूक: ‘हम खुद एक सुपरपावर, झुकने का सवाल ही नहीं

तेहरान: पश्चिम एशिया में पिछले दो महीनों से जारी भीषण तनाव और युद्ध के बादलों के बीच ईरान ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। ईरान ने अमेरिकी वर्चस्व को सीधी चुनौती देते हुए खुद को ‘महाशक्ति’ (Superpower) घोषित कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने स्पष्ट किया है कि ईरान अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा और अमेरिका की एकतरफा शर्तों के आगे झुकने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता।

ईरान ने खुद को क्यों बताया ‘सुपरपावर’?

हाल ही में ‘द हिंदू’ को दिए एक विशेष इंटरव्यू में इस्माइल बघाई ने वैश्विक राजनीति में ईरान की स्थिति को लेकर बड़े दावे किए। जब उनसे पूछा गया कि अमेरिका जैसी सैन्य शक्ति के सामने ईरान खुद को कहां पाता है, तो उन्होंने बेबाकी से जवाब दिया। बघाई ने कहा, “जो देश अपनी गरिमा और संप्रभुता की रक्षा के लिए दो परमाणु संपन्न देशों (अमेरिका और इजरायल) के खिलाफ मजबूती से खड़ा रहा, वह खुद ही इस बात का प्रमाण है कि उसे ‘सुपरपावर’ माना जाना चाहिए।”

भारत के साथ दोस्ती पर मुहर: जहाजों से टैक्स वसूलने की खबरों का खंडन

क्षेत्रीय तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर भी सामने आई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Hormuz Strait) में तनातनी के बीच यह चर्चा थी कि क्या ईरान वहां से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाएगा? इस पर बघाई ने साफ किया कि भारत के साथ ईरान के संबंध ऐतिहासिक हैं और किसी भी भारतीय जहाज से कोई शुल्क नहीं वसूला जाएगा।

उन्होंने कहा, “ईरान को भारत के साथ अपने प्राचीन और सांस्कृतिक संबंधों पर गर्व है। हम किसी देश से टैक्स नहीं लेते, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं। भारत और ईरान दोनों ‘गुटनिरपेक्ष आंदोलन’ (NAM) के स्तंभ रहे हैं और हमारी सरकारें इन रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

युद्धविराम की कोशिशें: ‘भरोसे की कमी’ बनी सबसे बड़ी बाधा

शांति वार्ता और युद्धविराम की संभावनाओं पर ईरानी प्रवक्ता ने स्वीकार किया कि पर्दे के पीछे बातचीत जारी है, लेकिन भरोसे की भारी कमी है। ईरान ने पहले अमेरिका को एक 40-सूत्रीय शांति प्रस्ताव भेजा था, जिसके जवाब में अमेरिका ने भी अपना नया प्रस्ताव दिया है।

बघाई ने बताया, “हम फिलहाल अमेरिकी प्रस्ताव का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं। इसके बाद हम अपने सहयोगी और मध्यस्थ देश पाकिस्तान के जरिए अपना आधिकारिक जवाब सौंपेंगे।” हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि शांति तभी संभव है जब अमेरिका ईरान की संप्रभुता का सम्मान करे।

अमेरिकी वर्चस्व को चुनौती और क्षेत्रीय सुरक्षा

ईरान का यह बयान ऐसे समय में आया है जब इजरायल और ईरान के बीच छद्म युद्ध (Proxy War) ने पूरे मध्य पूर्व को अस्थिर कर दिया है। विशेषज्ञ ईरान के इस ‘सुपरपावर’ वाले बयान को अपनी जनता का मनोबल बढ़ाने और पश्चिमी देशों को एक कड़ा कूटनीतिक संदेश देने के रूप में देख रहे हैं। भारत के लिए ईरान के साथ चाबहार बंदरगाह और ऊर्जा सुरक्षा जैसे रणनीतिक हित जुड़े हैं, ऐसे में ईरान का सकारात्मक रुख नई दिल्ली के लिए काफी अहम माना जा रहा है।