
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के व्यस्ततम इलाकों में से एक गोमती बैराज को लेकर प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। गोमती बैराज के पुराने हो चुके गेटों को बदलने और मरम्मत कार्य के चलते इस मार्ग को 15 जून तक के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है। सिंचाई विभाग और ट्रैफिक पुलिस की आपसी सहमति के बाद यह निर्णय लिया गया है, ताकि मानसून से पहले बैराज की मजबूती सुनिश्चित की जा सके। इस बंदी के कारण गोमती नगर से हजरतगंज और कैंट की ओर जाने वाले यात्रियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
क्यों बंद किया गया गोमती बैराज?
सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार, गोमती बैराज के गेट काफी पुराने हो चुके थे और उनमें लीकेज की समस्या आ रही थी। बैराज की सुरक्षा और जल स्तर को नियंत्रित करने के लिए इन गेटों को बदलना अनिवार्य हो गया है। 15 जून तक चलने वाले इस काम के दौरान भारी मशीनों का उपयोग किया जाएगा, जिसके चलते सुरक्षा की दृष्टि से यातायात को पूरी तरह प्रतिबंधित करना पड़ा है। मरम्मत का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया है ताकि डेडलाइन से पहले इसे पूरा किया जा सके।
ट्रैफिक डायवर्जन: इन रास्तों का करें इस्तेमाल
गोमती बैराज बंद होने से प्रतिदिन हजारों वाहन चालकों का रूट बदल गया है। ट्रैफिक पुलिस ने असुविधा से बचने के लिए वैकल्पिक मार्गों की सलाह दी है:
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वैकल्पिक मार्ग 1: गोमती नगर से हजरतगंज जाने वाले वाहन अब 1090 चौराहा होते हुए जा सकेंगे।
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वैकल्पिक मार्ग 2: समता मूलक चौराहे से होकर गांधी सेतु (पक्का पुल के पास) का उपयोग किया जा सकता है।
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वैकल्पिक मार्ग 3: जनेश्वर मिश्र पार्क की ओर से आने वाले लोग लोहिया पथ का सहारा ले सकते हैं।
पीक ऑवर में जाम की संभावना
बैराज बंद होने का सीधा असर लोहिया पथ और 1090 चौराहे पर दिखने लगा है। सुबह और शाम के व्यस्त समय (Peak Hours) में इन रास्तों पर वाहनों का दबाव बढ़ गया है। ट्रैफिक पुलिस ने अपील की है कि लोग वैकल्पिक रास्तों का ही चयन करें और अतिरिक्त समय लेकर घर से निकलें। बैराज के पास बैरिकेडिंग कर दी गई है और सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है ताकि कोई भी वाहन प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश न कर सके।
मानसून से पहले काम पूरा करने की चुनौती
प्रशासन का लक्ष्य 15 जून तक काम निपटाना है, क्योंकि इसके बाद मानसून की सक्रियता बढ़ जाती है। यदि काम समय पर पूरा नहीं हुआ, तो गोमती नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण मरम्मत में बाधा आ सकती है। सिंचाई विभाग के साथ ही जिला प्रशासन भी इस प्रोजेक्ट की निगरानी कर रहा है ताकि शहर की लाइफलाइन माने जाने वाले इस रास्ते को जल्द से जल्द बहाल किया जा सके।
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